प्रश्न- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 में विहीत “धारा 4” लोक प्राधिकारियों की बाध्यताएं कौन सी है?
उत्तर-
4. लोक प्राधिकारियों की बाध्यताएं
1. प्रत्येक लोक प्राधिकारी -
(क) सम्यक रूप से सूचीपत्रित और अनुक्रमणिकाबद्ध अपने सभी अभिलेखों को किसी ऐसी रीति और रूप में रखेगा, जो इस अधिनियम के अधीन सूचना के अधिकार को सूकर बनाता है और सुनिश्चित करेगा कि ऐसे सभ अभिलेख जो कंप्यूटरीकृत किए जाने के लिए समुचित है, युक्तियुक्त समय के भीतर है और संसाधनों की उपलभ्यता के अधीन रहते हुए है, कंप्युटरीकृत और विभिन्न प्रणालियों पर संपूर्ण देश में नेटवर्क के माध्यम से संबद्ध है जिससे कि ऐसे अभिलेख तक पहुंच को सूकर बनाया जा सके;
(ख) इस अधिनियम के अधिनियमन से एक सौ बीस दिन के भीतर-
i. अपने संगठन की विशिष्टियां, कृत्य और कर्तव्य;
ii. अपने अधिकारीयों और कर्मचारीयों की शक्तियाँ और कर्तव्य;
iii. विनिश्चय करने की प्रक्रिया में पालन की जाने वाली प्रक्रिया जिसमें पर्यवेक्षण और उत्तरदायित्व के क्या माध्यम सम्मिलित है;
iv. अपने कृत्यों के निर्वहन के लिए स्वयं द्वारा स्थापित मापमान;
v. अपने द्वारा या अपने नियंत्रणाधीन धारित या अपने कर्मचारीयों द्वारा अपने कृत्यों के निर्वहन के लिए प्रयोग किये गये नियम, विनियम, अनुदेश, निर्देशिका और अभिलेख;
vi. ऐसे दस्तावेजों के, जो उसके द्वारा धारित या उसके नियंत्रणाधीन है, प्रवर्गों का विवरण;
vii. किसी व्यवस्था की विशिष्टीयाँ जो उसकी निती की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विदयमान है;
viii. ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितीयों व अन्य निकायों के विवरण जिनमें दो या अधिक व्यक्ति है, जिनका उसके भाग रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितीयों व अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी;
ix. अपने अधिकारियों और कर्मचारियों की निर्देशिका;
x. अपने प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी द्वारा प्राप्त मासिक पारश्रमिक जिसमें उसके विनियमों में यथा उपबंधित प्रतिकर की प्रणाली सम्मिलीत है ;
xi. . सभी योजनाओं, प्रस्तावित व्ययोँ और किये गये संवितरणों पर रिपोर्टों की विशिष्टीयां उपदर्शित करते हुए अपने प्रत्येक अभिकरण को आबंटीत बजट ;
xii. सहायिकी कार्यक्रमों के निष्पादन की रिती जिसमें आबंटीत राशि और ऐसे कार्यक्रमों के फायदाग्राहियों के ब्यौरे सम्मिलित है;
xiii. अपने द्वारा अनुदत्त रियातों, अनुज्ञापत्रों या प्राधिकारों के प्राप्ति कर्ताओं की विशिष्टीयां;
xiv. किसी इलेक्ट्रॉनिक रूप में सूचना के संबंध में ब्यौरे, जो उसको उपलब्ध हो या उसके द्वारा धारित हो;
xv. सूचना अभिप्राप्त करने के लिए नागरिकों को उपलब्ध सुविधाओं की विशिष्टीयां, जिनके अन्तर्गत किसी पुस्तकालय या वाचन कक्ष के यदि लोक उपयोग के लिए अनुरक्षित हैं तो कार्यकरण घण्टे सम्मिलित हैं;
xvi. लोक सूचना अधिकारीयों के नाम, पदनाम और अन्य विशिष्टीयां;
xvii. ऐसी अन्य सूचना, जो विहित की जाए;
प्रकाशित करेगि और तत्पशचात इन प्रकाशनों को प्रत्येक वर्ष में अद्तन करेगा;
(ग) महत्त्वपूर्ण नीतीयों की विरचना करते समय या ऐसी विनिश्चयों की घोषणा करते समय, जो जनता को प्रभावित करते हो, सभी सुसंगत तथ्यों को प्रकाशित करेगा;
(घ) पर्भावित व्यक्तियों को अपने प्रशासनिक या न्यायिककल्प विनिश्चयों के लिए कारण उपलब्ध कराएगा।
2. प्रत्येक लोक अधिकारी का निरंतर यह प्रयास होगा कि यह स्वप्रेरणा से संसूचना के विभिन्न साधनों के माध्यम से, जिसके अंतर्गत इंटरनेट भी है, नियमित अंतरालों पर जनता को उतनी सूचना उपलब्ध कराने के लिए उपधारा (1) के खंड (ख) की अपेक्षाओं के अनुसार उपाय करे, जिससे कि जनता को सूचना प्राप्त करने के लिए इसअधिनियम का कम से कम अवलम्ब हो।
3. उपधारा (1) के प्रयोजन के लिए, प्रत्येक सूचना को विस्तृत रूप से और ऐसे प्ररूप और रीति में प्रसारिर किया जाएगा, जो जनता के लिए सहज रूप से पहुंच योग्य हो सके।
4. सभी सामग्री को, उस क्षेत्र में लागत प्रभावशीलता, स्थानीय भाषा और संसूचना की अत्यंत प्रभावी पद्धती को ध्यान में रखते हुए, प्रसारित किया जाएगा तथा सूचना तक, यथास्थिति, केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य सूचना अधिकारी के पास इलेक्ट्रानिक प्ररूप में संभव सीमा तक निःशुल्क या माध्यम की ऐसी लागत पर या ऐसी मुद्रण लागत कीमत पर, जो विहीत की जाए, सहज पहुंच होनी चाहिए।
स्पष्टीकरण=- उपधारा (3) या उपधारा (4) के प्रयोजनों के लिए ‘प्रसारित’ से सूचना पट्टों, समाचारपत्रों, लोक उदघोषणाओं, मिडिया प्रसारणों, इंटरनेट या किसी अन्य युक्ति के माध्यम से जिसमें किसी लोक प्राधिकारी के कार्यालयों का निरीक्षण सम्मिलित है, जनता को सूचना की जानकारी देना या संसूचित कराना अभिप्रेत है।
टिप्पणी
धारा 4 में लोक प्राधिकारियों की बाध्यताओं का उल्लेख किया गया है। दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि धारा 4 लोक प्राधिकारियों पर कतिपय बाध्यतायें अधिरोपित करती है। इन बाध्यताओं में से कुछ महत्त्वपूर्ण बाध्यताएं निम्नांकित है-
i. सभी संगठनों की विशिष्टियों, अधिकारियों के अधिकारों एवं कर्तव्यों, उनके द्वारा अपनाई जानेवाली प्रक्रीया, निर्णय लेने में अनुपालन किए जाने वाले मानकों आदि का अभिलेख संधारित कराना, ताकि जनसाधारण की उन तक पहँच सुगम हो सके।
ii. जन साधारण को प्रभावित करने वाले विनिश्चयों, नीतीयों आदि से संबंधित तथ्यों का अभिलेख तैयार करना।
iii. नीतियों एवं विनिश्चयों की पृष्ठभूमि के कारण।
यह कुछ ऐसे अभिलेख एवं ऐसी बाध्यताएं है जो नैसर्गिक न्याया के सिध्दांतों काअनुसरण करने का मार्ग प्रशस्त करती है। ये लोकतांत्रिक मूल्यों को अग्रसर करने में भी सहायक बनती है।
इन बाध्यताओं को समय समय पर प्रकाशित करने तथा उन्हें अद्यतन रखने का दायित्व भी लोक प्राधिकारियों पर अधिरोपित किया गया है।
कुल मिलाकर इन बाध्यताओं का मुख्य उद्देश्य अभिलेखों का सदैव तैयार रखना है ताकि कभी भी जनसाधारण की उन तक पहुँच सुगम एवं सुनिश्चित हो सके।
प्रश्न-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 5 में “ विहीत” लोक सूचना अधिकारियों का पदनाम कौन से है व उनके कार्य क्या है ?
उत्तर-
5. लोक सूचना अधिकारियों का पदनाम
1. प्रत्येक लोक प्राधिकारी, इस अधिनियम के अधिनियमन के सौ दिन के भीतर उतने अधिकारीयों को, जितने इस अधिनियम के अधीन सूचना के लिए अनुरोध करने वाले व्यक्तियों को सूचना प्रदान करने के लिए आवश्यक हो, सभी प्रशासकीय एककों या उसके अधीन कार्यालयों, यथास्थिति, केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारियों या राज्य सूचना अधिकारियों के रूप में अभिहित करेगा।
2. उपधारा (1) के उपबंधों पर प्रतिकुल प्रभाव डाले बिना, प्रत्क लोक प्राधिकारी, इस अधिनियम के अधिनियमन के सौ दिन के भीतर किसी अधिकारी को प्रत्येक उपमंडल स्तर या अन्य उप जिला स्तर पर इस अधिनियम के अधीन सूचना या अपीलों के लिए आवेदन प्राप्त करने और तुरंत उसे या धारा 19 की उपधारा (1) के अधीन विनिर्दिष्ट वरिष्ठ अधिकारी या यथास्थिति, केन्द्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग को अग्रेषित करने के लिए यथास्थिति, केन्द्रीय सहायक लोक सूचना अधिकारी या राज्य सहायक सूचना अधिकारी के रूप में पदाभिहित करेगाः
परंतु यह कि जहां सूचना या अपील के लिए कोई आवेदन यथास्थिति, किसी केन्द्रीय सहायक लोक सूचना अधिकारी या किसी राज्य सहायक लोक सूचना अधिकारी कोदिया जाता है, वहां धारा 7 की उपधारा (1) के अधीन विनिर्दिष्ट उत्तर के लिए अवधि की संगणना करने में पांच दिन की अवधि जोड दी जाएगी।
3. प्रत्यक लोक सूचना अधिकारी, सूचना की मांग करने वाले व्यक्तियों के अनुरोधों पर कार्यवाही करेगा और ऐसी सूचना की मांग करने वाले व्यक्तियों को युक्तियुक्त सहायता प्रदान करेगा
4. यथास्थिति, केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी, ऐसे किसी अन्य अधिकारी की सहायता की मांग कर सकेगा, जिसे वह अपने कृत्यों के समुचित निर्वहन के लिड आवश्यक समझे।
5. कोई अधिकारी, जिसकी उपधारा (4) के अधीन सहायता चाही गई है, उसकी सहायता चाहने वाले यथास्थिति, केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी को सभी सहायता प्रदान करेगा और इस अधिनियम के उपबंधों के किसी उल्लंघन के प्रयोजनों के लिए ऐसे अन्य अधिकारी को यथास्थिति, केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी समझा जाएगा।
टिप्पणी
धारा 5 लोक सूचना अधिकारियों के बारे में प्रावधान करती है। इन लोक सूचनि अधिकारियों का मुख्य कार्य सूचना प्राप्त करने के लिए आवेदन करने वाले व्यक्तियों को सूचना उपलब्ध कराने में सहायता प्रदान करना होगा।
यह लोक सूचना अधिकारी दो वर्ग के होंगे-
a) केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी; तथा
b) राज्य लोक सूचना अधिकारी
उप मण्डल एवं उप जिला स्तर पर-
a) केन्द्रीय सहायक लोक सूचना अधिकारी ;
b) राज्य सहायक लोक सूचना अधिकारी वर्ग के व्यक्ति होंगे।
कार्य- प्रत्येक लोक सूचना अधिकारी का यह कर्तव्य होगा कि वह सूचना की मांग करने वाले व्यक्ति की सुनवाई करे और सूचना उपलब्ध कराने में उनकी युक्तियुक्त सहायता करे।
सहायता- केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी अपने कर्तव्यों के निर्वहन में अन्य अधिकारियों की सहायता की मांग कर सकेगा और ऐसी मांग की जाने पर ऐसे अधिकारी केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी की सहायता करेंगे।
यह तथ्य कि याचिकाकर्ता द्वारा क्लर्क के पद के लिए डाक द्वारा उत्तरवादी बैंक को प्रार्थना पत्र निर्धारित तिथी तक प्राप्त नहीं हुआ। इसलिए बैंक ने स पर विचार नहीं किया। इस संबंध में बैंक द्वारा याचिकाकर्ता को सूचित किया गया इस सूचना को याचिकाकर्ता ने चुनौती नहीं दी। यह निर्णय दिया गया कि वह सूचना के अधिकार के तहत क्लर्क के पद के संबंध में विवरण प्राप्त करने की अधिकारिणी नहीं है।
प्रश्न-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 6 में विहीत अनूसार सूचना अभिप्राप्त (प्राप्त) करने के लिए अनुरोध हेतू प्रक्रिया क्या है?
उत्तर-
6. सूचना अभिप्राप्त करने के लिए अनुरोध-
1.कोई व्यक्ति, जो इस अधिनियम के अधीन कोई सूचना अभिप्राप्त करना चाहता है, लिखित में या इलेक्ट्रानिक युक्ति के माध्यम से अंग्रेजी या हिन्दी में या क्षेत्र की राजभाषा जिसमें आवेदन किया जा रहा है, ऐसी फीस के साथ, जो विहित की जाए,-
(क) संबंधित लोक प्राधिकरण के यथास्थिति, केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी;
(ख) यथास्थिति, केन्द्रीय सहायक लोक सूचना अधिकारी या राज्य
सहायक लोक सूचना अधिकारी;
को, उसके द्वारा माँगी गई सूचना की विशष्टियां विनिर्दिष्ट करते हुए अनुरोध करेगा:
सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी अनुरोध करने वाले व्यक्ति को सभी युक्तियुक्त सहायता मौखिक रूप से देगा, जिससे कि उसे लेखबद्ध किया जा सके।
1. सूचना के लिए अनुरोध करने वाले आवेदक से सूचना का अनुरोध करने वाले अनुरोध के लिए किसी कारण को या किसी अन्य व्यक्तिगत ब्यौरे को, सिवाय उसके जो उससे संपर्क करने के लिए आवश्यक हो, देने की अपेक्षा नहीं की जाएगी।
2. जहां, किसी ऐसी सूचना के लिए अनुरोध करते हुए कोई आवेदन किसी लोक प्राधिकारी को किया जाता है,-
i. जो किसी अन्य लोक प्राधिकारी द्वारा धारित की गई है; या
ii. जिसकी विषय- वस्तु किसी अन्य लोक प्राधिकारी के कृत्यों से अधिक निकट रूप से संबंधित है,
वहां, वह लोक प्राधिकारी, जिसको ऐसा आवेदन किया जाता है, ऐसे आवेदन या उसके ऐसे भाग को, जो समुचित हो, उस अन्य लोक प्राधिकारी को अंतरित करेगा और ऐसे अतंरण के संबंध में आवेदक को तुरंत सूचना देगा:
परंतु यह कि उपधारा के अनुसरण में किसी आवेदन का अंतरण यथासाध्य शीघ्रता से किया जाएगा, किन्तु किसी भी दशा में आवेदन की प्राप्ति की तारीख से पांच दिनों के पश्चात नहीं किया जाएगा।
टिप्पणी
धारा 6 के उपबंध अत्त महत्त्वपूर्ण है। ये सूचना प्राप्ति हेतु अनुरोध के बारे में प्रावधान करते हैं। इसके अनुसार सूचना प्राप्त करने के लिए इच्छुक व्यक्ति को इस आशय का एक लिखित आवेदन पत्र प्रस्तुत करना होगा या इलेक्ट्रानिक युक्ति के माध्यम से आवेदन करना होगा।
आवेदन हिन्दी, अंग्रेजी या क्षेत्रीय राजभाषा में किया जायेगा।
आवेदन किसे करना होगा-
आवेदन निम्नांकित में से किसी अधिकारी को किया जायेगा-
i. केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी
ii. राज्य लोक सूचना अधिकारी;
iii. केन्द्रीय सहायक लोक सूचना अधिकारी
iv. राज्य सहायक लोक सूचना अधिकारी।
यदि कोई आवेदन किसी ऐसे लोक प्राधिकारी को किया जाता है जो ऐसी सूचना धारण नहीं करता है, वहां ऐसा आवेदन पत्र उस लोक प्राधिकारी को अन्तरित कर दिया जाएगा, जो ऐसी सूचना धारण करता है। ऐसा अंतरण अधिकतम 5 दिन में कर दिया जाएगा तथा इस आशय की सूचना आवेदक को दी जायेगी।
आवेदन पत्र की अन्तर्वस्तुएं
आवेदन पत्र में चाही गई सूचना की विशिष्टियों का उल्लेख किया जाएगा तथा निर्धारित शुल्क भी देय होगा।
प्रश्न--सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 7 में विहीत अनूसार सूचना अभिप्राप्त करने के लिए अनुरोधों के निपटारा हेतू प्रक्रिया क्या है?
उत्तर-
धारा 7. अनुरोधों का निपटारा
1. धारा 5 की उपधारा (2) के परंतुक या धारा 6 की उपधारा (3) के परंतुक के अधीन रहते हुए, धारा 6 के अधीन अनुरोध के प्राप्त होने पर, यथास्थिति, किसी केन्द्रीय स लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी यथा संभव शीघ्रता से, और किसी भी दशा में अनुरोध की प्राप्ति के तीस दिन के भीतर, ऐसी फीस के संदाय पर, जो विहीत की जाए, या तो सूचना उपलब्ध कराएगा या धारा 8 और धारा 9 में विनिर्दिष्ट कारणों में ये किसी कारण से अनुरोध को अस्वीकार करेगा:
परंतु जहां मांगी गई जानकारी का संबंध किसी व्यक्ति के जीवन या स्वतंत्रता से है, वहां वह अनुरोध प्राप्त होने के अडतालीस घंटे के भीतर उपलब्ध कराई जाएगी।
2. यदि लोक सूचना अधिकारी, उपधारा (1) के अधीन विनिर्दिष्ट अवधि के भीतर सूचना के लिए अनुरोध पर विनिश्चय करने में असफल रहता है, यथास्थिति, किसी केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी के बारे में यह समझा जाएगा कि उसने अनुरोध को नामंजूर कर दिया।
3. जहां, सूचना उपलब्ध कराने की लागत के रूप में किसी और फीस के संदाय पर सूचना उपलब्ध कराने का विनिश्चय किया जाता है, वहां यथास्थिति, किसी केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी अनुरोध करने वाले व्यक्ति को,
(क) उपधारा (1) के अधीन विहीत फीस के अनुसरण में रकम निकालने के लिए की गई संगणनाओं के साथ उसके द्वारा यथाअवधारित सूचना उपलब्ध कराने की लागत के रूप में और फिस के ब्यौरे देते हुए उससे उस फीस को जमा करने का अनुरोध करते हुए कोई संसूचना भेजेगा और उक्त संसूचना के प्रेषण और फिस के संदाय के बीच मध्यवर्ती अवधि को उस धारा में निर्दिष्ट तीस दिन की अवधि की संगणना करने के प्रोयजन के लिए अपवर्जित किया जाएगा;
(ख) प्रभारित फिस की राशि या उपलब्ध कराई गई पहुंच के प्ररूप के बारे में, जिसके अंतर्गत अपील प्राधिकारी की विशिष्टियां, समय-सीमा, प्रक्रिया और कोई अन्य प्ररूप भी है, विनिश्चय के पुनर्विलोकन के संबंध में उसके अधिकार से संबंधित सूचना देते हुए, कोई संसूचना भेजेगा।
4. जहां, इस अधिनियम के अधीन अभिलेख या उसके किसी भाग तक पहुंच अपेक्षित है और ऐसा व्यक्ति, जिसको पहुंच उपलब्ध कराई जाना है, संवेदनात्मक रूप से निःशक्त है, वहां यथास्थिति, केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी सूचना तक पहंच को समर्थ बनाने के लिए सहायता उपलब्ध कराएगा जिसमें निरीक्षण के लिए ऐसी सहायता कराना सम्मिलित है, जो समुचित हो।
5. जहां, सूचना तक पहंच मुद्रीत या किसी इलेक्ट्रानिक प्ररूप में उपलब्ध कराई जानी है, वहां आवेदक, उपधारा (6) के अधीन रहते हुए ऐसी फीस का संदाय करेगा, जो विहीत की जाए:
परंतु धारा 6 की उपधारा (1) और धारा 7 की उपधारा (1) और उपधारा (5) के अधीन विहीत फीस युक्तियुक्त होगी और ऐसे व्यक्तियों से, जो गरीबी की रेखा के नीचे है, कोई फिस प्रभारित नहीं की जाएगी, जैसा समूचित सरकार द्वारा अवधारित किया जाए।
6. उपधारा (5) में किसी बात के होते हुए भी, जहां कोई लोक प्राधिकारी उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट समय-सीमा का अनुपालन करने में असफल रहता है, वहां सूचना के लिए, अनुरोध करने वाले व्यक्ति कोप्रभार के बिना सूचना उपलब्ध कराई जाएगी।
7. उपधारा (1) के अधीन कोई विनिश्चय करने से पूर्व, यथास्थिति, केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी धारा 11 के अधीन किसी तीसरे पक्षकार द्वारा किए गए अभ्यावेदन को ध्यान में रखेगा।
8. जहां, किसी अनुरोध को उपधारा (2) के अधीन अस्वीकृत किया गया समझा गया है, वहां लोक सूचना अधिकारी अनुरोध करने वाले व्यक्ति को,-
i. ऐसी अस्वीकृति के कारण;
ii. वह अवधि, जिसके भीतर ऐसी अस्विकृति के विरुद्ध कोई अपील की जा सकेगी; और
iii. अपील प्राधिकारी की विशिष्टियां, संसूचित करेगा।
9. किसी सूचना को साधारणतया उसी प्ररूप में उपलबर्ध कराया जाएगा, जिसमें उसे मांगा गया है, जब तक कि यह लोक प्राधिकार के संशोधनों को अननुपाती रूप से विचलित न करता हो या प्रश्नगत अभिलेख की सुरक्षा या संरक्षण के प्रतिकुल न हो।
टिप्पणी
धारा 7 चाही गइ सूचना के आवेदनों / अनुरोधों के निपटान के बारे में प्रावधान करती है। इसके अनुसार-
(क) सामान्य आवेदनों का निपटारा 30 दिनों में कर दिया जाना चाहिए अर्थात 30 दिनों में वांछित सूचना आवेदक को उपलब्ध करा दी जानी चाहिए।
(ख) यदि ऐसी सूचना किसी व्यक्ति के जीवन या स्वतंत्रता से संबंधित है, तो संबंधित आवेदन/ अनुरोध का निपटारा 48 घंटों में कर दिया जाना चाहिए।
उपरोक्त अवधि में आवेदन का निपटारा नहीं किए जाने का अभिप्राय यह होगा कि वह आवेदन नामंजूर कर दिया गया है।
यदि सूचना उपलब्ध कराने के लिए और कोई शुल्क देय है तो ऐसा शुल्क जमा कराने हेतु आवेदक को कहा जायेगा।
यदि आवेदक किसी अभिलेख तक पहुँच के लिए निःशक्त है तो केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी द्वारा पहुँच सुगम कराने में सहायता की जायेगी।
इन्क्वारी का आदेश-
यदि किसी लोक प्राधिकारी द्वारा सूचना उपलब्ध करान से इन्कार किया जाता है अर्थात आवेदन को अस्वीकार किया जाता है तब ऐसा लोक सूचना अधिकारी आवेदक को निम्नांकित बातें संसूचित करेगा-
i. आवेदन को अस्वीकार किए जाने के कारण;
ii. अपील किए जाने की अवधि; तथा
iii. अपील प्राधिकारी की विशिष्टियां
सामान्यतः सूचना उसी प्ररूप में उपलब्ध कराई जाएगी जिस प्ररूप में वे चाही गई है।
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