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Education (शिक्षा) Advocacy Programme


यह शिक्षा से संबंधित मुद्दों पर बातचीत का मंच है l

स्कूली शिक्षा के निम्न कार्यक्षेत्र है :-

क) केंद्र सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थान 

  1. जवाहर नवोदय विद्यालय
  2. केंद्रीय विद्यालय
  3. एकलव्य आवासीय विद्यालय 

ख) छत्तीसगढ़ प्रदेश की सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थान 

  1. शासकीय विद्यालय
  2. अशासकीय/ निजी विद्यालय
  3. प्रयास आवासीय विद्यालय 

स्कूल शिक्षा व्यवस्था से व्यथित पक्षकार

  1.  बच्चें और उनके अभिभावक 
  2. शिक्षक / विद्यालय प्रबंधन  

उच्च शिक्षा के निम्न कार्यक्षेत्र है :-

क) केंद्र सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त उच्च शिक्षण संस्थान 

  1. केंद्रीय विश्वविद्यालय 
  2. केंद्रीय मुक्त विश्वविद्यालय

ख) छत्तीसगढ़ प्रदेश की सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त उच्च शिक्षण संस्थान 

  1. शासकीय शैक्षणिक संस्थाए/  शासकीय महाविद्यालय/ विश्वविद्यालय 
  2. अशासकीय शैक्षणिक संस्थाए/ अशासकीय महाविद्यालय/ निजी विश्वविद्यालय 

ग) केंद्र सरकार द्वारा घोषित स्वायत्त शिक्षण संस्थान

  1. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान
  2. राज्य मुक्त विश्वविद्यालय
  3. राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान
  4. भारतीय प्रबंधन संस्थान 
  5. राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय
  6. कृषि विश्वविद्यालय
  7. अंतर्राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान

उच्च शिक्षा व्यवस्था से व्यथित पक्षकार

  1.  बच्चें और उनके अभिभावक
  2. शिक्षक / महाविद्यालय/ विश्वविद्यालय प्रबंधन


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छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण में बड़े पैमाने पर मुआवजा घोटाले का खुलासा हुआ है। इस घोटाले में राजस्व अधिकारियों और भू-माफियाओं की मिलीभगत से सरकारी खजाने को लगभग ₹43 करोड़ का नुकसान हुआ है।( स्त्रोत :  The Rural Press ) घोटाले का तरीका भूमि रिकॉर्ड में हेरफेर : अभनपुर तहसील के नायकबांधा, उरला, भेलवाडीह और टोकनी गांवों में भूमि अधिग्रहण के दौरान, अधिकारियों ने खसरा नंबरों में हेरफेर कर एक ही भूमि को छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित कर दिया। इससे 17 असली भू-स्वामियों की भूमि को 97 हिस्सों में बांटकर 80 नए नाम रिकॉर्ड में जोड़ दिए गए ।(स्त्रोत :  हरिभूमि ) मुआवजा राशि में बढ़ोतरी : इस हेरफेर के परिणामस्वरूप, मुआवजा राशि ₹29.5 करोड़ से बढ़कर ₹78 करोड़ हो गई, जिससे ₹43 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान हुआ ।( स्त्रोत :  The Rural Press ) जांच और कार्रवाई शिकायत और जांच : 8 अगस्त 2022 को कृष्ण कुमार साहू और हेमंत देवांगन ने इस घोटाले की शिकायत की। इसके बाद, रायपुर कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए, जिसमें घोटाले की प...

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भारत में लालफीताशाही (Red Tapeism) एक ऐसी प्रशासनिक प्रणाली को दर्शाती है जिसमें सरकारी कार्य अत्यधिक नियमों, प्रक्रियाओं और दस्तावेज़ीकरण की वजह से धीमी गति से होते हैं। यह शब्द आमतौर पर नकारात्मक अर्थ में प्रयोग होता है और इसके कारण नागरिकों, उद्यमियों और कभी-कभी स्वयं अधिकारियों को भी भारी परेशानी होती है। छत्तीसगढ़ प्रदेश में हाल में कई राष्ट्रीय एजेंसियां भ्रष्टाचार के प्रकरणों में अन्वेषण कर रही है, तथाकथित प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों पर लगातार हो रही कार्यवाहियां यह दर्शाता है कि प्रशासनिक नक्सलवाद कई दशकों से छत्तीसगढ़ के सम्पदा का दोहन विधिविरुद्ध तरीके से प्रशासनिक अधिकारी कर रहें है. लालफीताशाही के प्रमुख लक्षण: ब्यूरोक्रेटिक प्रक्रिया की अधिकता: किसी भी कार्य को करने के लिए अनेक स्तरों पर अनुमति लेनी पड़ती है। निर्णय लेने में विलंब: अधिकारी निर्णय लेने से बचते हैं या अत्यधिक दस्तावेज़ मांगते हैं। दस्तावेज़ों की अधिकता: फॉर्म भरने, प्रमाणपत्र देने, अनुमोदन लेने आदि के लिए कई दस्तावेज़ों की आवश्यकता होती है। अधिकारियों का असहयोग: कई बार सरकारी कर्मचारी नागरिकों को...