महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीडन (निवारण , प्रतिषेध और प्रतितोष ) अधिनियम , 2013 के तहत दो तरह की समितियों लैंगिक अपराध के मामलों में जांच कर एक्शन लेने का कार्य करती है जहाँ असंगठित क्षेत्र में यौन शोषण की शिकायतें मुख्यत: लोकल कंप्लेंट कमिटी द्वारा सुनी जाती है जिसे जिला प्रशासन द्वारा स्थापित किया जाता है वही संगठित क्षेत्रों के लिए सम्बंधित नियुक्ता ( employer) अपनी संस्था में ही एक कमिटी का गठन करता है जिसे आतंरिक परिवाद कमिटी या ICC कहा जाता है. इन समितियों का क्या अधिकार क्षेत्र है और वे किस तरह लैंगिक हिंसा के मामलों में एक्शन लेती है? शिकायत कब और कैसे की जाती है ? अधिनियम की धारा ९ के तहत पीड़ित महिला लिखित में अपनी शिकायत दे सकती है. अगर वह स्वयं शिकायत करने में असमर्थ है तो कमेटी का कर्तव्य है कि पीड़ित महिला को जरुरी सहायता प्रदान करें. अधिनियम के तहत पारित किये गए नियमो के अनुसार महिला की कोई सहकर्मी , उसका कोई मित्र , उसका कानूनी वारिस महिला आयोग आदि भी कुछ मामलों में शिकायत कर सकते है अगर पीड़ित महिला शारीरिक/मानसिक कारणों या किसी अन्य कारण की वजह से ...
महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीडन (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष ) अधिनियम, 2013 : टीम अभिव्यक्ति
महिलाओं का कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीडन (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष ) अधिनियम, 2013 (2013 का अधिनियम संख्यांक 14 ) [22 अप्रैल, 2013] महिलाओं के कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न से संरक्षण और लैंगिक उत्पीड़न के परिवादों के निवारण तथा प्रतितोषण और उससे संबंधित या उसके आनुषंगिक विषयों का उपबंध करने के लिए अधिनियम लैंगिक उत्पीड़न के परिणामस्वरूप भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 औरअनुच्छेद 15 के अधीन समता तथा संविधान के अनुच्छेद 21 के अधीन प्राण और गरिमा से जीवन व्यतीत करने के किसी महिला के मूल अधिकारों और किसी वृत्ति का व्यवसाय करने या कोई उपजीविका, व्यापार या कारबार करने के अधिकार का, जिसके अंतर्गत लैंगिक उत्पीड़न से मुक्त सुरक्षित वातावरण का अधिकार भी है, उल्लंघन होता है; और लैंगिक उत्पीड़न से संरक्षण तथा गरिमा से कार्य करने का अधिकार, महिलाओं के प्रति सभी प्रकार के विभेदों को दूर करने संबंधी अभिसमय जैसे अंतरराष्ट्रीय अभिसमयों और लिखतों द्वारा सर्वव्य...