Skip to main content

RTI MCQ SEC 13- 16 : टीम अभिव्यक्ति

 प्रश्न-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 13 में “विहीत” किये गये अनूसार मुख्य सूचना आयुक्त की पदावधि और सेवा शर्ते क्या है?

उत्तर-धारा 13.  के अनुसार मुख्य सूचना आयुक्त पदावधि और सेवा शर्ते निम्नानूसार होगीं -

1) सूचना आयुक्त, उस तारीख से, जिसको वह अपना पद ग्रहण करता है, पांच वर्ष की अवधि के लिए पद धारण करेगा और पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा: 

पंरतु यह कि कोई मुख्य सूचना आयुक्त पैसठ वर्ष की आयु प्राप्त करने के पश्चात उस रूप में पद धारण नहीं करेगा।


2) प्रत्येक सूचना आयुक्त, उस तारीख से, जिसको वह अपना पद ग्रहण करता है पांच वर्ष की अवधि के लिए या पैसंठ वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, इनमें से जो भी पूर्वतर हो पद धारण करेगा और एसे सूचना आयुक्त के रूप में पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा:

      परंतु प्रत्येक सूचना आयुक्त, इस उपधारा के अधीन अपना पद रिक्त करने पर धारा 12 की उपधारा (3)  में विनिर्दिष्ट रीति से मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में नियुक्त के लिए पात्र होगा;

    परंतु यह और कि जां सूचना आयुक्त को मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में नियुक्त किया जाता है वहां उसकी पदावधि सूचना आयुक्त और मूख्य सूचना आयुक्त के रूप में कुल मिलाकर पांच वर्ष से अधिक नहीं होगी।    


3) मुख्य सूचना आयुक्त या कोई सूचना आयुक्त, अपना पद ग्रहण करने से पूर्व राष्ट्रपति या उनके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति के समक्ष पहली अनुसूची में इस प्रयोजन के लिए उपवर्णित प्ररूप के अनुसार एक शपथ या प्रतिज्ञान लेगा और उस पर हस्ताक्षर करेगा। 


4) मुख्य सूचना आयुक्त या कोई सूचना आयुक्त, किसी भी समय, राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा:

   परंतु मुख्य सूचना आयुक्त या किसी सूचना आयुक्त को धारा 14 में विनिर्दिष्ट रीति से हटाया जा सकेगा।

  

5)   संदेय वेतन और भत्ते तथा सेवा के अन्य निबंधन और शर्ते-

(क) मुख्य सूचना आयुक्त की वही होंगी, जो मुख्य निर्वाचन आयुक्त की है;

(ख)  सूचना आयुक्त की वही होगी, जो निर्वाचन आयुक्त की है:

    परंतु मुख्य सूचना आयुक्त या कोई सूचना आयुक्त अपनी नियुक्ति के समय, भारत सरकार के अधीन या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी पूर्व सेवा के संध में कोई पेंशन, अक्षमता या क्षति पेंशन से भिन्न प्राप्त कर रहा है तो मुख्य सूचना आयुक्त या कोई सूचना आयुक्त के रूप में सेवा के संबंध में उसके वेतन में से, उस पेंशन की, जिसके अंतर्गत पेंशन का ऐसा कोई भाग, जिसे संराशिकृत किया गया था और सेवानिवृत्ति उपदान के समतुल्य पेंशन को छोडकर सेवा निवृत्ति फायदों के अन्य रुपों के समतुल्य पेंशन भी है, रकम को कम कर दिया जायगा:

    परंतु यह और कि मुख्य सूचना आयुक्त या कोई सूचना आयुक्त अपनी नियुक्ति के समय, किसी केन्द्रीय अधिनियम या राज्य अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित किसी निगम में या केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन किसी सरकारी कंपनी में की गई किसी पूर्व सेवा के संबंध में सेवानिवृत्ति फायदे प्राप्त कर रहा है तो मुख्य सूचना आयुक्त या कोई सूचना आयुक्त के रूप में सेवा के संबंध में उसके वेतन में से, सेवा निवृत्ति फायदों के समतुल्य पेंशन की रकम कम कर दी जाएगी:

      परंतु यह भी कि मुख्य सूचना आयुक्त या कोई सूचना आयुक्त के वेतन, भत्तों और सेवा की अन्य शर्तों में उसकी नियुक्ति के पश्चात उसके अलाभकर रूप में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा।

  

6) केन्द्रीय सरकार, मुख्य सूचना आयुक्त या सूचना आयुक्तों को उतने अधिकारी और कर्मचारी उपलब्ध कराएगी, जितने इस अधिनियम के अधीन उनके कृत्यों के दक्ष पालन के लिए आवश्यक हों और इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए नियुक्त किए गय अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को संदेय वेतन और भत्ते तथा सेवा के निबंधन और शर्ते ऐसी होंगी जो विहीत की जाएं।

टिप्पणी

 धारा 13 मुख्य सूचना आयुक्त एवं सूचना आयुक्त की पदावधि तथा सेवा शर्ते के बारे में प्रावधान करती है।

पदावधि-

 मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति पाँच वर्षों के लिए की जाएगी, लेकिन वह-

i. 65  वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद पद धारण नहीं कर सकेगा; तथा

ii. पुनर्नियुक्ति का पात्र नहीं होगा।

सूचना आयुक्त की नियुक्ति भी पाँच वर्षों॑ के लिए की जाएगी लेकिन वह-

    i    65  वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद पद धारण नहीं कर सकेगा; तथा

ii     पुनर्नियुक्ति का पात्र नहीं होगा।

     iii      मुख्य सूचना आयुक्त का पद रिक्त होने पर ऐसे पद पर नियुक्त किया जा सकेगा, लेकिन दोनो पदों की अवधि कुल मिलाकर पाँच वर्षों से अधिक नहीं हो सकेगी।

शपथ-

         मुख्य सूचना आयुक्त तथा  सूचना आयुक्त को पदभार ग्रहण करने से पूर्व राष्ट्रपति या उसके द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति के समक्ष निर्धारित प्ररुप में शपथ या प्रतिज्ञान करना होगा तथा उस पर उसके हस्ताक्षर किए जाएंगे।

त्यागपत्र-

         मुख्य सूचना आयुक्त अथवा सूचना आयुक्त द्वारा राष्ट्रपति को सम्बोधित करते हुए कभी भी अपने पद से त्यागपत्र दिया जा सकेगा।

  मुख्य सूचना आयुक्त तथा  सूचना आयुक्त को निर्दारित अवधि से पुर्व कभी भी धारा 14 के अन्तर्गत अपने पद से हटाया जा सकेगा।

सेवा शर्तें-

          उपधारा (5)  के अनुसार मुख्य सूचना आयुक्त की सेवा शर्ते वे ही होंगी जो मुख्य निर्वाचन आयुक्त की है।

      इसी प्रकार सूचना आयुक्त की सेवा शर्ते वे ही होगी जो निर्वाचन आयुक्त की है।

   उनको संदेय वेतन एवं भत्ते भी तदनुरुप ही होगे। इनकी सेवा शर्तों तथा वेतन भत्तों में ऐसा कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा जो उनके लिए अहितकर हो।

   लेकिन यदि सूचना आयुक्त  या मुख्य सूचना आयुक्त कोई सेवानिवृत्त लाभ जैसे-पेंशन आदि प्राप्त कर रहे हैं तो वह उनको संदेय वेतन-भत्तों में से कम कर दी जाएगी।

    मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति के बारे में प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 324 में किया गया है। एस. एस. धनोय बनाम युनियन आफ इण्डिया के मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा यह अभिनिर्धारित किया गया है कि निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति तथा पदच्युति की शक्तियां राष्ट्रपति में निहित्त है। राष्ट्रपति द्वारा आवश्यकतानुसार आयुक्त के पदों की संख्या में कमी की जा सकती है और पद को समाप्त भी किया जा सकता है।

कर्मचारिवृन्द-

    मुख्य सूचना आयुक्त तथा  सूचना आयुक्त के कार्यालयों में केन्द्रीय सरकार द्वारा आवश्यकतानुसार कर्मचारियों की नियुक्ति की जा सकेगी तथा उनके वेतन, भत्ते व अन्य सेवा शर्ते वे होंगी जो विहित की जाये।


प्रश्न-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 13 (1) में “विहीत” किये गये अनूसार   सूचना आयुक्त नियुक्ति के बाद उसके  पद धारण करने की अवधि क्या है ?

उत्तर- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 धारा - 13. (1) के अनुसार पद धारण की अवधि-

सूचना आयुक्त, उस तारीख से, जिसको वह अपना पद ग्रहण करता है, पांच वर्ष की अवधि के लिए पद धारण करेगा और पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा: 

पंरतु यह कि कोई मुख्य सूचना आयुक्त पैसठ वर्ष की आयु प्राप्त करने के पश्चात उस रूप में पद धारण नहीं करेगा।

पदावधि हेतु टिप्पणी-

मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति पाँच वर्षों के लिए की जाएगी, लेकिन वह-

i. 65  वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद पद धारण नहीं कर सकेगा; तथा

ii. पुनर्नियुक्ति का पात्र नहीं होगा।


प्रश्न-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 13 (2) में “विहीत” किये गये अनूसार  सूचना आयुक्त कितने वर्ष की आयु प्राप्त करने तक पद धारित कर सकेगा?

उत्तर-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 धारा - 13. (2) के अनुसार

प्रत्येक सूचना आयुक्त, उस तारीख से, जिसको वह अपना पद ग्रहण करता है पांच वर्ष की अवधि के लिए या पैसंठ वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, इनमें से जो भी पूर्वतर हो पद धारण करेगा और एसे सूचना आयुक्त के रूप में पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा:

      परंतु प्रत्येक सूचना आयुक्त, इस उपधारा के अधीन अपना पद रिक्त करने पर धारा 12 की उपधारा (3)  में विनिर्दिष्ट रीति से मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में नियुक्त के लिए पात्र होगा;

    परंतु यह और कि जां सूचना आयुक्त को मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में नियुक्त किया जाता है वहां उसकी पदावधि सूचना आयुक्त और मूख्य सूचना आयुक्त के रूप में कुल मिलाकर पांच वर्ष से अधिक नहीं होगी।    


पदावधि हेतु टिप्पणी-

सूचना आयुक्त की नियुक्ति भी पाँच वर्षों॑ के लिए की जाएगी लेकिन वह-

    i    65  वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद पद धारण नहीं कर सकेगा; तथा

ii     पुनर्नियुक्ति का पात्र नहीं होगा।

     iii      मुख्य सूचना आयुक्त का पद रिक्त होने पर ऐसे पद पर नियुक्त किया जा सकेगा, लेकिन दोनो पदों की अवधि कुल मिलाकर पाँच वर्षों से अधिक नहीं हो सकेगी।


प्रश्न- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 13 (3) में “विहीत” किये गये अनूसार  मुख्य सूचना आयुक्त  या   सूचना आयुक्त पद ग्रहण करने के पूर्व किसके समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान लेगा और उस पर हस्ताक्षर करेगा ?

उत्तर-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 धारा - 13. (3) के अनुसार

मुख्य सूचना आयुक्त या कोई सूचना आयुक्त, अपना पद ग्रहण करने से पूर्व राष्ट्रपति या उनके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति के समक्ष पहली अनुसूची में इस प्रयोजन के लिए उपवर्णित प्ररूप के अनुसार एक शपथ या प्रतिज्ञान लेगा और उस पर हस्ताक्षर करेगा। 

शपथ हेतु टिप्पणी-

         मुख्य सूचना आयुक्त तथा  सूचना आयुक्त को पदभार ग्रहण करने से पूर्व राष्ट्रपति या उसके द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति के समक्ष निर्धारित प्ररुप में शपथ या प्रतिज्ञान करना होगा तथा उस पर उसके हस्ताक्षर किए जाएंगे।


प्रश्न-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 13 (4) में “विहीत” किये गये अनूसार  मुख्य सूचना आयुक्त  या   सूचना आयुक्त किसे सम्बोधित अपने पद का त्याग करने का अधिकार रखता है ?

उत्तर-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 धारा - 13. (4)  विहीत किये गये अनुसार-

            मुख्य सूचना आयुक्त या कोई सूचना आयुक्त, किसी भी समय, राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा:

   परंतु मुख्य सूचना आयुक्त या किसी सूचना आयुक्त को धारा 14 में विनिर्दिष्ट रीति से हटाया जा सकेगा।

त्यागपत्र हेतु टिप्पणी-

         मुख्य सूचना आयुक्त अथवा सूचना आयुक्त द्वारा राष्ट्रपति को सम्बोधित करते हुए कभी भी अपने पद से त्यागपत्र दिया जा सकेगा।

  मुख्य सूचना आयुक्त तथा  सूचना आयुक्त को निर्दारित अवधि से पुर्व कभी भी धारा 14 के अन्तर्गत अपने पद से हटाया जा सकेगा।


प्रश्न- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 13 (5) में “विहीत” किये गये अनूसार  मुख्य सूचना आयुक्त  या  सूचना आयुक्त के संदेय वेतन और भत्ते तथा उसके सेवा के अन्य निबन्धन और शर्ते क्या हैं?

उत्तर- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 धारा - 13. (5) के अनुसार 

संदेय वेतन और भत्ते तथा सेवा के अन्य निबंधन और शर्ते-

(क) मुख्य सूचना आयुक्त की वही होंगी, जो मुख्य निर्वाचन आयुक्त की है;

(ख)  सूचना आयुक्त की वही होगी, जो निर्वाचन आयुक्त की है:

    परंतु मुख्य सूचना आयुक्त या कोई सूचना आयुक्त अपनी नियुक्ति के समय, भारत सरकार के अधीन या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी पूर्व सेवा के संध में कोई पेंशन, अक्षमता या क्षति पेंशन से भिन्न प्राप्त कर रहा है तो मुख्य सूचना आयुक्त या कोई सूचना आयुक्त के रूप में सेवा के संबंध में उसके वेतन में से, उस पेंशन की, जिसके अंतर्गत पेंशन का ऐसा कोई भाग, जिसे संराशिकृत किया गया था और सेवानिवृत्ति उपदान के समतुल्य पेंशन को छोडकर सेवा निवृत्ति फायदों के अन्य रुपों के समतुल्य पेंशन भी है, रकम को कम कर दिया जायगा:

    परंतु यह और कि मुख्य सूचना आयुक्त या कोई सूचना आयुक्त अपनी नियुक्ति के समय, किसी केन्द्रीय अधिनियम या राज्य अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित किसी निगम में या केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन किसी सरकारी कंपनी में की गई किसी पूर्व सेवा के संबंध में सेवानिवृत्ति फायदे प्राप्त कर रहा है तो मुख्य सूचना आयुक्त या कोई सूचना आयुक्त के रूप में सेवा के संबंध में उसके वेतन में से, सेवा निवृत्ति फायदों के समतुल्य पेंशन की रकम कम कर दी जाएगी:

      परंतु यह भी कि मुख्य सूचना आयुक्त या कोई सूचना आयुक्त के वेतन, भत्तों और सेवा की अन्य शर्तों में उसकी नियुक्ति के पश्चात उसके अलाभकर रूप में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा।

सेवा शर्तें हेतु टिप्पणी-

          उपधारा (5)  के अनुसार मुख्य सूचना आयुक्त की सेवा शर्ते वे ही होंगी जो मुख्य निर्वाचन आयुक्त की है।

      इसी प्रकार सूचना आयुक्त की सेवा शर्ते वे ही होगी जो निर्वाचन आयुक्त की है।

   उनको संदेय वेतन एवं भत्ते भी तदनुरुप ही होगे। इनकी सेवा शर्तों तथा वेतन भत्तों में ऐसा कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा जो उनके लिए अहितकर हो।

   लेकिन यदि सूचना आयुक्त  या मुख्य सूचना आयुक्त कोई सेवानिवृत्त लाभ जैसे-पेंशन आदि प्राप्त कर रहे हैं तो वह उनको संदेय वेतन-भत्तों में से कम कर दी जाएगी।

    मुख्य निर्वाचन आयुक्त तथा निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति के बारे में प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 324 में किया गया है। एस. एस. धनोय बनाम युनियन आफ इण्डिया के मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा यह अभिनिर्धारित किया गया है कि निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति तथा पदच्युति की शक्तियां राष्ट्रपति में निहित्त है। राष्ट्रपति द्वारा आवश्यकतानुसार आयुक्त के पदों की संख्या में कमी की जा सकती है और पद को समाप्त भी किया जा सकता है।


प्रश्न- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 13 (6) में “विहीत” किये गये अनूसार  मुख्य सूचना आयुक्त  या  सूचना आयुक्त को  उसके कृत्यों के दक्ष पालन करने हेतु उतने अधिकारी और कर्मचारी कौन उपलब्ध कराएगा, और उनकी सेवा के अन्य निबन्धन और शर्ते क्या है?

उत्तर- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 धारा - 13. (6) के अनुसार

1) केन्द्रीय सरकार, मुख्य सूचना आयुक्त या सूचना आयुक्तों को उतने अधिकारी और कर्मचारी उपलब्ध कराएगी, जितने इस अधिनियम के अधीन उनके कृत्यों के दक्ष पालन के लिए आवश्यक हों और इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए नियुक्त किए गय अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को संदेय वेतन और भत्ते तथा सेवा के निबंधन और शर्ते ऐसी होंगी जो विहीत की जाएं।

कर्मचारिवृन्द हेतु टिप्पणी-

    मुख्य सूचना आयुक्त तथा  सूचना आयुक्त के कार्यालयों में केन्द्रीय सरकार द्वारा आवश्यकतानुसार कर्मचारियों की नियुक्ति की जा सकेगी तथा उनके वेतन, भत्ते व अन्य सेवा शर्ते वे होंगी जो विहित की जाये।


प्रश्न-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 14 में “विहीत” किये गये अनूसार मुख्य सूचना आयुक्त या सूचना आयुक्त को हटाये जाने की प्रक्रिया क्या है?

उत्तर-धारा 14  के अनुसार  मुख्य सूचना आयुक्त या सूचना आयुक्त को हटाये जाने की प्रक्रिया निम्नानूसार होगीं –

14. (1) उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, मुख्य सूचना आयुक्त या किसी सूचना आयुक्त को राष्ट्रपति के आदेश द्वारा साबित कदाचार या असमर्थता के आधार पर उसके पद से तभी हटाया जाएगा, जब उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रपति द्वारा उसे किए गए किसी निर्देश पर जांच के पश्चात यह रिपोर्ट दी हो कि, यथास्थिति, मुख्य सूचना आयुक्त या सूचना आयुक्त को उस आधारपर हटा दिया जाना चाहिए।

(2) राष्ट्रपति, उस मुख्य सूचना आयुक्त या सूचना आयुक्त को, जिसके विरूद्ध उपधारा (1) के अधीन उच्चतम न्यायालय को निर्देश किया गया है, ऐसे निर्देश पर उच्चतम न्यायालय की रिपोर्ट प्राप्त होने पर राष्ट्रपति द्वारा आदेश पारित किए जाने तक पद से निलंबित कर सकेगा और यदि आवश्यक समझे तो जांच के दौरान कार्यालय में उपस्थिति होने से भी प्रतिषिद्ध कर सकेगा।

(3) उपधारा (1)  में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी राष्ट्रपति, मुख्य सूचना आयुक्त या सूचना आयुक्त को आदेश द्वारा पद से हटा सकेगा, यदि यथास्थिति, मुख्य सूचना आयुक्त या सूचना आयुक्त-

(क)  दिवालिया न्यायनिर्णीत किया गया है; या

(ख)  वह ऐसे अपराध के लिए दोषसिद्ध ठहराया गया है, जिसमें राष्ट्रपति के राय में, नैतिक अधमता अंतर्वतित है; या

(ग)  अपनी पदावधि के दौरान, अपने पद के कर्तव्यों से परे किसी वैतनिक नियोजन में लगा हुआ है; या 

(घ) राष्ट्रपति की राय में, मानसिक या शारीरिक अक्षमता के कारण पद पर बने रहने के अयोग्य है; या

(ड)  उसने ऐसे वित्तिय और अन्य हित अर्जित किए है, जिनसे मुख्य सूचना आयुक्त या सूचना आयुक्त के रूप में उसके कृत्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पडने की संभावना है।


(4) यदि मुख्य सूचना आयुक्त या सूचना आयुक्त , किसी प्रकार भारत सरकार द्वारा या उसमें हितबद्ध है या किसी संविदा या करार से संबंद्ध या उसमें हितबद्ध है या किसी निगमित कंपनी के किसी सदस्य के रूप में से अन्यथा और उसके अन्य सदस्यों के साथ सामान्यत: उसके लाभ में या उससे प्रोदभूत होने वाले किसी फायदे या परिलब्धियों में हिस्सा लेता है तो वह उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, कदाचार का दोषी समझा जाएगा।

टिप्पणी

  धारा 14 मुख्य सूचना आयुक्त तथा सूचना आयुक्तों को पद से हटाये जाने के संबंध में है। मुख्य सूचना आयुक्त तथा  सूचना आयुक्त को निम्नांकित आधारों पर राष्ट्रपति द्वारा पद से हटाया जा सकेगा-

(क) कदाचार; अथवा

(ख) असमर्थता।

  लेकिन इन आधारों पर पदच्युति केवल तभी की जा सकेगी जब उच्चतम न्यायालय द्वारा जांच के पश्चात इस आशय की रिपोर्ट दे दी जाये।

       जब राष्ट्रपति द्वारा कदाचार असमर्थता बाबत जांच के लिए कोई मामला उच्चतम न्यायालय को निर्देशित किया जाता है, तब ऐसी रिपोर्ट के आने तक राष्टपति द्वारा सूचना आयुक्त अथवा मुख्य सूचना आयुक्त को निलम्बित किया जा सकेगा और आवश्यक होने पर उसे कार्यालय में उपस्थित होने से भी रोका जा सकेगा।

  उपधारा (4)  के अनुसार निम्नांकित को कदाचार माना गया है-

(क) भारत सरकार द्वारा या उसकी ओर से की गई किसी संविदा या करार से सम्बद्ध या हितबध्द रहना; या

(ख)  किसी निगमित कम्पनी के सदस्य से अन्यथा किसी रूप में और उसके अन्य सदस्यों के साथ संयुक्त रुप में उसके लाभ में या उससे प्रोदभुत होने वाले किसी फायदे या परिलब्धियों में हिस्सा लेना।

पदच्युति के आधार-

      राष्टपति द्वारा निम्नांकित आधारों पर भी मुख्य सूचना आयुक्त या  सूचना आयुक्त

को उसके पद से हटाया जा सकेगा-

1. जब वह नैतिक अधमता के किसी मामले में दोष सिध्द ठहराया गया हो।

2. जब उसने लाभ का कोई पद धारण कर लिया हो अर्थात वह वैतनिक नियोजन में लग गया हो।

3. जब वह दिवालिया न्यायनिर्णित कर दिया गया हो।

4. जब वह शारीरिक या मानसिक अक्षमता के कारण पद पर बने रहने के अयोग्य हो गया हो।

5. जब उसने वित्तीय या ऐसे अन्य हित अर्जित कर लिए हो जिससे उसके पदीय कृत्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पडता हो।

नैतिक अधमता- 

      नैतिक अधमता से जुडे मामलों में दोषसिध्द ठहराये जाने पर मुख्य सूचना आयुक्त अथवा  सूचना आयुक्त को राष्ट्रपति द्वारा पद से हटाया जा सकता है।

      “नैतिक अधमता” शब्द की कोई परिभाषा नहीं दी गई है और न दी जा सकती है, क्योंकि नैतिक अधमता प्रत्येक मामले के तथ्यों एवं उसकी परिस्थितियों पर निर्भर करती है। एक कृत्य एक स्थान पर नैतिक अधमता वाला हो सकता है तो अन्य स्थान पर नहीं। उदाहणार्थ- किसी स्त्री के कुल्हे थपथपाना पाश्चात्य संस्कृति में अच्छा माना जा सकता है, लेकिन भारतीय संस्कति में नही।

    अत: ,मोटे तौर पर यह कहा जा सकता है न्याय, ईमानदारी, सदाचार आदि के प्रतिकुल आचरण को नैतिक अधमता कहा जा सकता है। किसी नैतिक अधमता को राष्ट्रपति की राय में होना आवश्यक है।


प्रश्न-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 14 (1) में “विहीत” किये गये अनूसार मुख्य सूचना आयुक्त या सूचना आयुक्त को राष्ट्रपति के आदेश द्वारा साबित कदाचार या असमर्थता के आधार पर उसके पद से कब हटाया जाएगा?

उत्तर- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 धारा - 14. (1) के अनुसार 

(1) उपधारा (2) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, मुख्य सूचना आयुक्त या किसी सूचना आयुक्त को राष्ट्रपति के आदेश द्वारा साबित कदाचार या असमर्थता के आधार पर उसके पद से तभी हटाया जाएगा, जब उच्चतम न्यायालय ने राष्ट्रपति द्वारा उसे किए गए किसी निर्देश को उस आधारपर हटा दिया जाना चाहिए।

टिप्पणी-

  धारा 14 मुख्य सूचना आयुक्त तथा सूचना आयुक्तों को पद से हटाये जाने के संबंध में है। मुख्य सूचना आयुक्त तथा  सूचना आयुक्त को निम्नांकित आधारों पर राष्ट्रपति द्वारा पद से हटाया जा सकेगा-

(क) कदाचार; अथवा

(ख) असमर्थता।

  लेकिन इन आधारों पर पदच्युति केवल तभी की जा सकेगी जब उच्चतम न्यायालय द्वारा जांच के पश्चात इस आशय की रिपोर्ट दे दी जाये।


प्रश्न-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 14 (2) में “विहीत” किये गये अनूसार मुख्य सूचना आयुक्त या सूचना उपायुक्त को, जिसके विरुद्ध उपधारा (1) के अधीन उच्चतम न्यायालय को निर्देश किया गया है, ऐसे निर्देश पर उच्चतम न्यायालय की रिपोर्ट प्राप्त होने पर राष्ट्रपति द्वारा आदेश पारित किए जाने तक  उसे पद से कौन निलम्बित कर सकेगा? 

उत्तर-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 धारा - 14. (2) के अनुसार

 राष्ट्रपति, उस मुख्य सूचना आयुक्त या सूचना आयुक्त को, जिसके विरूद्ध उपधारा (1) के

अधीन उच्चतम न्यायालय को निर्देश किया गया है, ऐसे निर्देश पर उच्चतम न्यायालय की रिपोर्ट प्राप्त होने पर राष्ट्रपति द्वारा आदेश पारित किए जाने तक पद से निलंबित कर सकेगा और यदि आवश्यक समझे तो जांच के दौरान कार्यालय में उपस्थिति होने से भी प्रतिषिद्ध कर सकेगा।

टिप्पणी-

     जब राष्ट्रपति द्वारा कदाचार असमर्थता बाबत जांच के लिए कोई मामला उच्चतम न्यायालय को निर्देशित किया जाता है, तब ऐसी रिपोर्ट के आने तक राष्टपति द्वारा सूचना आयुक्त अथवा मुख्य सूचना आयुक्त को निलम्बित किया जा सकेगा और आवश्यक होने पर उसे कार्यालय में उपस्थित होने से भी रोका जा सकेगा।


प्रश्न -- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 14 (3) में “विहीत” किये गये अनूसार राष्ट्रपति  मुख्य सूचना आयुक्त या सूचना उपायुक्त को किस आधार पर पद से हटाने जाने का आदेश कर सकेगा?

 उत्तर--- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 धारा - 14. (3) के अनुसार

3) उपधारा (1)  में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी राष्ट्रपति, मुख्य सूचना आयुक्त या सूचना आयुक्त को आदेश द्वारा पद से हटा सकेगा, यदि यथास्थिति, मुख्य सूचना आयुक्त या सूचना आयुक्त-

(क)  दिवालिया न्यायनिर्णीत किया गया है; या

(ख)  वह ऐसे अपराध के लिए दोषसिद्ध ठहराया गया है, जिसमें राष्ट्रपति के राय में, नैतिक अधमता अंतर्वतित है; या

(ग)  अपनी पदावधि के दौरान, अपने पद के कर्तव्यों से परे किसी वैतनिक नियोजन में लगा हुआ है; या 

(घ) राष्ट्रपति की राय में, मानसिक या शारीरिक अक्षमता के कारण पद पर बने रहने के अयोग्य है; या

(ड)  उसने ऐसे वित्तिय और अन्य हित अर्जित किए है, जिनसे मुख्य सूचना आयुक्त या सूचना आयुक्त के रूप में उसके कृत्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पडने की संभावना है।


टिप्पणी-

पदच्युति के आधार-

      राष्टपति द्वारा निम्नांकित आधारों पर भी मुख्य सूचना आयुक्त या  सूचना आयुक्त

को उसके पद से हटाया जा सकेगा-

1. जब वह नैतिक अधमता के किसी मामले में दोष सिध्द ठहराया गया हो।

2. जब उसने लाभ का कोई पद धारण कर लिया हो अर्थात वह वैतनिक नियोजन में लग गया हो।

3. जब वह दिवालिया न्यायनिर्णित कर दिया गया हो।

4. जब वह शारीरिक या मानसिक अक्षमता के कारण पद पर बने रहने के अयोग्य हो गया हो।

5. जब उसने वित्तीय या ऐसे अन्य हित अर्जित कर लिए हो जिससे उसके पदीय कृत्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पडता हो।


प्रश्न : सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 14 (4) में “विहीत” किये गये अनूसार  मुख्य सूचना आयुक्त या सूचना आयुक्तों को कदाचार का दोषी कब समझा जाएगा? 

 उत्तर : सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 धारा - 14. (4) के अनुसार

यदि मुख्य सूचना आयुक्त या सूचना आयुक्त , किसी प्रकार भारत सरकार द्वारा या उसमें हितबद्ध है या किसी संविदा या करार से संबंद्ध या उसमें हितबद्ध है या किसी निगमित कंपनी के किसी सदस्य के रूप में से अन्यथा और उसके अन्य सदस्यों के साथ सामान्यत: उसके लाभ में या उससे प्रोदभूत होने वाले किसी फायदे या परिलब्धियों में हिस्सा लेता है तो वह उपधारा (1) के प्रयोजनों के लिए, कदाचार का दोषी समझा जाएगा।

कदाचार हेतु टिप्पणी

उपधारा (4)  के अनुसार निम्नांकित को कदाचार माना गया है-

(क) भारत सरकार द्वारा या उसकी ओर से की गई किसी संविदा या करार से सम्बद्ध या हितबध्द रहना; या

(ख)  किसी निगमित कम्पनी के सदस्य से अन्यथा किसी रूप में और उसके अन्य सदस्यों के साथ संयुक्त रुप में उसके लाभ में या उससे प्रोदभुत होने वाले किसी फायदे या परिलब्धियों 

में हिस्सा लेना।


प्रश्न--सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अनुसार “नैतिक अधमता” शब्द की पऱिभाषा क्या है? और उससे जुडे मामलों में दोषसिध्द ठहराये जाने पर मुख्या सूचना आयुक्त अथवा सूचना आयुक्त को किसके द्वारा पद से हटाया जा सकेगा?

   उत्तर-     “नैतिक अधमता” शब्द की कोई परिभाषा नहीं दी गई है और न दी जा सकती है, क्योंकि नैतिक अधमता प्रत्येक मामले के तथ्यों एवं उसकी परिस्थितियों पर निर्भर करती है। एक कृत्य एक स्थान पर नैतिक अधमता वाला हो सकता है तो अन्य स्थान पर नहीं। उदाहणार्थ- किसी स्त्री के कुल्हे थपथपाना पाश्चात्य संस्कृति में अच्छा माना जा सकता है, लेकिन भारतीय संस्कति में नही।

    अत: ,मोटे तौर पर यह कहा जा सकता है न्याय, ईमानदारी, सदाचार आदि के प्रतिकुल आचरण को नैतिक अधमता कहा जा सकता है। किसी नैतिक अधमता को राष्ट्रपति की राय में होना आवश्यक है।

       नैतिक अधमता से जुडे मामलों में दोषसिध्द ठहराये जाने पर मुख्य सूचना आयुक्त अथवा  सूचना आयुक्त को राष्ट्रपति द्वारा पद से हटाया जा सकता है।


प्रश्न--- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 15 में राज्य सूचना आयोग का गठन की विहीत प्रक्रिया क्या है? 

उत्तर--- राज्य सूचना आयोग का गठन

धारा 15. (1) प्रत्येक राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा ...................... राज्य का नाम सूचना आयोग के नाम से ज्ञात एक निकाय का गठन करेगी, जो ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कृत्यों का पालन करेगा, जो उसे इस अधिनियम के अधीन सौंपे जाएं।


(2)   राज्य सूचना आयोग निम्नलिखित से मिलकर बनेगा-

     (क) राज्य मुख्य सूचना आयुक्त; और 

      (ख) दस से अनधिक उतनी संख्या में राज्य सूचना आयुक्त, जितने आवश्यक समझे जाएं।


(3)  राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा निम्निलिखित से मिलकर बनी किसी समिति की सिफारिशपर की जाएगी-

vi. मुख्यमंत्री, जो समिति का अध्यक्ष होगा।

विधानसभा में विपक्ष का नेता; और

vii. मुख्यमंत्री द्वारा नाम निर्दिष्ट किया जाने वाला  मंत्रिमंडल का सदस्य।

स्पष्टीकरण – शंकाओं के निवारण के लिए यह घोषित किया जाता है कि जहां विधान सभा में विपक्षी दल  के नेता को उस रूप में मान्यता नहीं दी गई है, वहां विधान सभा में सरकार के विपक्षी एकल सबसे बडे समूह के नेता को विपक्षी दल का नेता समझा जाएगा।


(4) राज्य सूचना आयोग के कार्यों का साधारण अधीक्षण, निदेशन और प्रबंध राज्य मुख्य सूचना आयुक्त से निहीत होगा, जिसकी सहायता राज्य सूचना आयुक्तों द्वारा की जाएगी और वह ऐसी सभी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे सभी कार्य और बातें कर सकेगा, जिनका राज्य सूचना आयोग द्वारा  इस अधिनियम के अधीन किसी अन्य प्राधिकारी के निर्देशों के अधीन रहे बिना स्वतंत्र रुप से प्रयोग किया जा सकता है या जो की जा सकती है।


(5) राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्त विधि, विज्ञान ओर प्रौद्यगिकी, समाज सेवा, प्रबंध, पत्रकरिता, जनसंपर्क माध्यम या प्रशासन तथा शासन का व्यापक ज्ञान और अनुभव रखने वाले जनजीवन में प्रख्यात व्यक्ति होंगे।


(6) राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या कोई राज्य सूचना आयुक्त, यथास्थिति, संसद का सदस्य या किसी राज्य या संघ राज्यक्षेत्रों के विधान-मंडल का सदस्य नहीं होगा या कोई अन्य लाभ का पद धारित नहीं करेगा या किसी राजनैतिक दल से संबद्ध नहीं होगा अथवा कोई कारबार नहीं करेगा या कोई वृत्ति नहीं करेगा।


(7) राज्य सूचना आयोग का मुख्यालय, राज्य में ऐसे स्थान पर  होगा और जिसे राज्य  सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करें और राज्य  सूचना आयोग, राज्य   सरकार के पूर्व अनुमोदन से, राज्य  में अन्य स्थानों पर कार्यालय स्थापित कर सकेगा।


टिप्पणी

              इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग तथा कृत्यों का निर्वहन करने के लिए धारा 15 में एक राज्य सूचना आयोग का गठन का प्रावधान किया गया है। आयोग का गठन  राजपत्र में अधिसूचना जारी करते हुए राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।

गठन- 

   राज्य सूचना आयोग का गठन निम्नांकित से मिलकर होगा-

5. राज्य मुख्य सूचना आयुक्त एक; तथा

6.  राज्य केन्द्रीय सूचना आयुक्त (अधिक तम दस)

चयन समिति- 

         राज्य  मुख्य सूचना आयुक्त तथा सूचना आयुक्तों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जायेगी। इन पदों पर नियुक्त हेतु नामों की अनुशंसा एक चयन  समिति द्वारा की जाएगी, जिसमें निम्नांकित सदसय होंगे-

 (क) मुख्यमंत्री                                          अध्यक्ष

(ख) विधान सभा में विपक्ष का नेता                     सदस्य

(ग)  मुख्यमंत्री द्वारा नामनिर्देष्ट                         सदस्य  

       एक मंत्री


अधीक्षण की शक्तियां-

           राज्य सूचना आयोग के कार्यों के अधीक्षण, निदेशन और प्रबंधन की शक्तियां मुख्य सूचना आयुक्त में निहीत होगी। सूचना आयुक्तों द्वारा मुख्य सूचना आयुक्त के कार्यों में सहायता की जायेगी।


अहर्ताये

राज्य मुख्य सूचना आयुक्ततथा सूचना आयुक्त के पदों पर ऐसे व्यक्तियों को नियुक्त किया जायेगा जो निम्नांकित में विशेष ज्ञान एवं अनुभव रखता हों-

17) विधि;

18) विज्ञान और प्रौद्योगिकी;

19) समाज सेवा;

20) प्रबंधन;

21) पत्रकारिता;

22) जन माध्यम;

23) प्रशासन; अथवा

24) शासन।

प्रतिबंध-

            राज्य मुख्य सूचना आयुक्त अथवा सूचना आयुक्त-

 (क)  संसद या राज्य विधान मण्डल के सदस्य नहीं होगे;

(ख)  लाभ का कोई अन्य पद धारण नहीं कर सकेंगे;

(ग)  किसी राजनितिक दल से सम्बद्ध नहीं होंगे; अथवा

(घ)  कोई कारबार या वृत्ति नहीं कर सकेंगे।


मुख्यालय- 

राज्य सूचना आयोग का मुख्यालय  ऐसे स्थान पर होगा जो राज्य  सरकार राजपत्र में अधिसूचना जारी कर विहित्त करें।दिल्ली में होगा। 

        राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से आयोग द्वारा  मुख्य सूचना आयुक्त द्वारा भारत में अन्य स्थानों पर अपने कार्यालय स्थापित किए जा सकेंगे।


प्रश्न---सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 15 (2) में “विहीत” किये गये अनूसार  राज्य सूचना आयोग का गठन किन से मिलकर बनेगा?


उत्तर सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 धारा - 15 (2) राज्य सूचना आयोग निम्नलिखित से मिलकर बनेगा-


(2)   राज्य सूचना आयोग निम्नलिखित से मिलकर बनेगा-

     (क) राज्य मुख्य सूचना आयुक्त; और 

      (ख) दस से अनधिक उतनी संख्या में राज्य सूचना आयुक्त, जितने आवश्यक समझे जाएं।


गठन हेतु टिप्पणी

              इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग तथा कृत्यों का निर्वहन करने के लिए धारा 15 में एक राज्य सूचना आयोग का गठन का प्रावधान किया गया है। आयोग का गठन  राजपत्र में अधिसूचना जारी करते हुए राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।

गठन- 

   राज्य सूचना आयोग का गठन निम्नांकित से मिलकर होगा-

1. राज्य मुख्य सूचना आयुक्त एक; तथा

2.  राज्य केन्द्रीय सूचना आयुक्त (अधिक तम दस)


प्रश्न--सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 15 (3) में “विहीत” किये गये अनूसार राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया क्या है?

उत्तर--सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 धारा - 15. (3) -

राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा निम्निलिखित से मिलकर बनी किसी समिति की सिफारिशपर की जाएगी-

i. मुख्यमंत्री, जो समिति का अध्यक्ष होगा।

विधानसभा में विपक्ष का नेता; और

ii. मुख्यमंत्री द्वारा नाम निर्दिष्ट किया जाने वाला  मंत्रिमंडल का सदस्य।

स्पष्टीकरण – शंकाओं के निवारण के लिए यह घोषित किया जाता है कि जहां विधान सभा में विपक्षी दल  के नेता को उस रूप में मान्यता नहीं दी गई है, वहां विधान सभा में सरकार के विपक्षी एकल सबसे बडे समूह के नेता को विपक्षी दल का नेता समझा जाएगा।


चयन समिति हेतू टिप्पणी

         राज्य  मुख्य सूचना आयुक्त तथा सूचना आयुक्तों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जायेगी। इन पदों पर नियुक्त हेतु नामों की अनुशंसा एक चयन  समिति द्वारा की जाएगी, जिसमें निम्नांकित सदसय होंगे-

 (क) मुख्यमंत्री                                          अध्यक्ष

(ख) विधान सभा में विपक्ष का नेता                     सदस्य

(ग)  मुख्यमंत्री द्वारा नामनिर्देष्ट                         सदस्य  

       एक मंत्री


प्रश्न--सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 15 (4) में “विहीत” किये गये अनूसार राज्य सूचना आयोग के कार्यों का साधारण अधीक्षण, निदेशन और प्रबंधन, किसके अधिकार में निहीत होगा?

उत्तर-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 धारा - 15. (4)-

राज्य सूचना आयोग के कार्यों का साधारण अधीक्षण, निदेशन और प्रबंध राज्य मुख्य सूचना आयुक्त से निहीत होगा, जिसकी सहायता राज्य सूचना आयुक्तों द्वारा की जाएगी और वह ऐसी सभी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे सभी कार्य और बातें कर सकेगा, जिनका राज्य सूचना आयोग द्वारा  इस अधिनियम के अधीन किसी अन्य प्राधिकारी के निर्देशों के अधीन रहे बिना स्वतंत्र रुप से प्रयोग किया जा सकता है या जो की जा सकती है।


प्रश्न--सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 15 (5) में “विहीत” किये गये अनूसार राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और  राज्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति हेतू योग्यता क्या है?

उत्तर--सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 धारा - 15. (5)-

 राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्त विधि, विज्ञान ओर प्रौद्यगिकी, समाज सेवा, प्रबंध, पत्रकरिता, जनसंपर्क माध्यम या प्रशासन तथा शासन का व्यापक ज्ञान और अनुभव रखने वाले जनजीवन में प्रख्यात व्यक्ति होंगे।

अर्हताएं- हेतू टिप्पणी

राज्य मुख्य सूचना आयुक्ततथा सूचना आयुक्त के पदों पर ऐसे व्यक्तियों को नियुक्त किया जायेगा जो निम्नांकित में विशेष ज्ञान एवं अनुभव रखता हों-

1) विधि;

2) विज्ञान और प्रौद्योगिकी;

3) समाज सेवा;

4) प्रबंधन;

5) पत्रकारिता;

6) जन माध्यम;

7) प्रशासन; अथवा

8) शासन।


प्रश्न- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 15 (6) में “विहीत” किये गये अनूसार राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या राज्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति हेतू बाध्यतायें क्या है?

उत्तर-- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 धारा - 15. (6)-

राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या कोई राज्य सूचना आयुक्त, यथास्थिति, संसद का सदस्य या किसी राज्य या संघ राज्यक्षेत्रों के विधान-मंडल का सदस्य नहीं होगा या कोई अन्य लाभ का पद धारित नहीं करेगा या किसी राजनैतिक दल से संबद्ध नहीं होगा अथवा कोई कारबार नहीं करेगा या कोई वृत्ति नहीं करेगा।


प्रतिबंध- हेतू टिप्पणी

प्रतिबंध-

            राज्य मुख्य सूचना आयुक्त अथवा सूचना आयुक्त-

 (क)  संसद या राज्य विधान मण्डल के सदस्य नहीं होगे;

(ख)  लाभ का कोई अन्य पद धारण नहीं कर सकेंगे;

(ग)  किसी राजनितिक दल से सम्बद्ध नहीं होंगे; अथवा

(घ)  कोई कारबार या वृत्ति नहीं कर सकेंगे।


प्रश्न---सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 15 (7) में “विहीत” किये गये अनूसार राज्य सूचना आयोग का मुख्यालय व कार्यालय कहाँ होते है ?

उत्तर----सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 धारा - 15. (7)

(7) राज्य सूचना आयोग का मुख्यालय, राज्य में ऐसे स्थान पर  होगा और जिसे राज्य  सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करें और राज्य  सूचना आयोग, राज्य   सरकार के पूर्व अनुमोदन से, राज्य  में अन्य स्थानों पर कार्यालय स्थापित कर सकेगा।


मुख्यालय हेतु टिप्पणी-

राज्य सूचना आयोग का मुख्यालय  ऐसे स्थान पर होगा जो राज्य  सरकार राजपत्र में अधिसूचना जारी कर विहित्त करें।दिल्ली में होगा। 

        राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से आयोग द्वारा  मुख्य सूचना आयुक्त द्वारा भारत में अन्य स्थानों पर अपने कार्यालय स्थापित किए जा सकेंगे।


प्रश्न--सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 16 में “विहीत” किये गये अनूसार राज्य मुख्य सूचना आयुक्त की पदावधि और सेवा शर्ते क्या है ?

उत्तर---धारा 16.  के अनुसार मुख्य सूचना आयुक्त पदावधि और सेवा शर्ते निम्नानूसार होगीं -

16 राज्य मुख्य सूचना आयुक्त पदावधि और सेवा शर्ते

1) राज्य  मुख्य सूचना आयुक्त, उस तारीख से, जिसको वह अपना पद ग्रहण करता है, पांच वर्ष की अवधि के लिए पद धारण करेगा और पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा: 

पंरतु यह कि कोई राज्य मुख्य सूचना आयुक्त पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त करने के पश्चात उस रूप में पद धारण नहीं करेगा।


2) प्रत्येक राज्य सूचना आयुक्त, उस तारीख से, जिसको वह अपना पद ग्रहण करता है पांच वर्ष की अवधि के लिए या पैसंठ वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, इनमें से जो भी पूर्वतर हो पद धारण करेगा और राज्य सूचना आयुक्त के रूप में पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा:

      परंतु प्रत्येक राज्य सूचना आयुक्त, इस उपधारा के अधीन अपना पद रिक्त करने पर धारा 15 की उपधारा (3)  में विनिर्दिष्ट रीति से मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में नियुक्त के लिए पात्र होगा;

    परंतु यह और कि जहां राज्य सूचना आयुक्त की राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में नियुक्ती कियी जाता है, वहां उसकी पदावधि राज्य सूचना आयुक्त और राज्य  मूख्य सूचना आयुक्त के रूप में कुल मिलाकर पांच वर्ष से अधिक नहीं होगी।    


3) राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या कोई राज्य सूचना आयुक्त, अपना पद ग्रहण करने से पूर्व राज्यपाल या उनके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति के समक्ष पहली अनुसूची में इस प्रयोजन के लिए उपवर्णित प्ररूप के अनुसार एक शपथ या प्रतिज्ञान लेगा और उस पर हसताक्षर करेगा। 


4) राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या कोई राज्य सूचना आयुक्त, किसी भी समय, राज्यपाल को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा:

   परंतु राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या किसी राज्य सूचना आयुक्त को धारा 17 में विनिर्दिष्ट रीति से हटाया जा सकेगा।

  

5)   संदेय वेतन और भत्ते तथा सेवा के अन्य निबंधन और शर्ते-

(क) राज्य मुख्य सूचना आयुक्त की वही होंगी, जो किसी निर्वाचन आयुक्त की है;

(ख)  राज्य सूचना आयुक्त की वही होगी, जो राज्य सरकार के मुख्य सचिव की है;

    परंतु यदि राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या कोई राज्य सूचना आयुक्त अपनी नियुक्ति के समय, भारत सरकार के अधीन या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी पूर्व सेवा के संबंध में कोई पेंशन, अक्षमता या क्षति पेंशन से भिन्न प्राप्त कर रहा है तो राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या राज्य सूचना आयुक्त के रूप में सेवा के संबंध में उसके वेतन में से, उस पेंशन की रकम को , जिसके अंतर्गत पेंशन का ऐसा कोई भाग, जिसे संराशिभूत किया गया था और सेवानिवृत्ति उपदान के समतुल्य पेंशन को छोडकर सेवा निवृत्ति फायदों के अन्य रुपों के समतुल्य पेंशन भी है, रकम को कम कर दिया जायगा:

    परंतु यह और कि जहां राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या राज्य सूचना आयुक्त अपनी नियुक्ति के समय, किसी केन्द्रीय अधिनियम या राज्य अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित किसी निगम में या केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन किसी सरकारी कंपनी में की गई किसी पूर्व सेवा के संबंध में सेवानिवृत्ति फायदे प्राप्त कर रहा है तो वहां राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या राज्य सूचना आयुक्त के रूप में सेवा के संबंध में उसके वेतन में से, सेवा निवृत्ति फायदों के समतुल्य पेंशन की रकम कम कर दी जाएगी:

      परंतु यह भी कि राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या राज्य सूचना आयुक्त के वेतन, भत्तों और सेवा की अन्य शर्तों में उसकी नियुक्ति के पश्चात उसके अलाभकारी रूप में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा।

  

6) राज्य सरकार, राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या राज्य  सूचना आयुक्तों को उतने अधिकारी और कर्मचारी उपलब्ध कराएगी, जितने इस अधिनियम के अधीन उनके कृत्यों के दक्ष पालन के लिए आवश्यक हों और इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए नियुक्त किए गय अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को संदेय वेतन और भत्ते तथा सेवा के निबंधन और शर्ते ऐसी होंगी जो विहीत की जाएं।

             

टिप्पणी

 धारा 16 राज्य मुख्य सूचना आयुक्त एवं सूचना आयुक्त की पदावधि तथा सेवा शर्ते के बारे में प्रावधान करती है।

पदावधि-

 राज्य मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति पाँच वर्षों के लिए की जाएगी, लेकिन वह-

iii. 65  वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद पद धारण नहीं कर सकेगा; तथा

iv. पुनर्नियुक्ति का पात्र नहीं होगा।

राज्य मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति भी पाँच वर्षों॑ के लिए की जाएगी लेकिन वह-

    i    65  वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद पद धारण नहीं कर सकेगा; तथा

ii     पुनर्नियुक्ति का पात्र नहीं होगा।

     iii      मुख्य सूचना आयुक्त का पद पर कार्य करने की सम्पूर्ण अवधि कुल मिलाकर पाँच वर्षों से अधिक नहीं हो सकेगी।


शपथ-

          राज्य मुख्य सूचना आयुक्त तथा  सूचना आयुक्त को पदभार ग्रहण करने से पूर्व राज्यपाल या उसके द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति के समक्ष निर्धारित प्ररुप में शपथ या प्रतिज्ञान करना होगा तथा उस पर उसके हस्ताक्षर किए जाएंगे।

त्यागपत्र-

         राज्य मुख्य सूचना आयुक्त अथवा सूचना आयुक्त द्वारा राज्यपाल को सम्बोधित करते हुए कभी भी अपने पद से त्यागपत्र दिया जा सकेगा।

  

 वेतन –भत्ते एवं सेवा शर्तें-

          राज्य मुख्य सूचना आयुक्त की सेवा शर्ते वे ही होंगी जो भारत के  निर्वाचन आयुक्त की है।

      इसी प्रकार सूचना आयुक्त की सेवा शर्ते वे ही होगी जो  राज्य  के मुख्य सचिव की है।

       उनको संदेय वेतन एवं भत्ते भी तदनुरुप ही होगे। इनकी सेवा शर्तों तथा वेतन भत्तों में ऐसा कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा जो उनके लिए अहितकर हो।


प्रश्न--सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 16 (1) में “विहीत” किये गये अनूसार राज्य मुख्य सूचना आयुक्त नियुक्ति के बाद उसके  पद धारण करने की अवधि क्या है ?

उत्तर-  सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 धारा - 16. (1) के अनुसार पद धारण की अवधि-

1) राज्य  मुख्य सूचना आयुक्त, उस तारीख से, जिसको वह अपना पद ग्रहण करता है, पांच वर्ष की अवधि के लिए पद धारण करेगा और पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा: 

पंरतु यह कि कोई राज्य मुख्य सूचना आयुक्त पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त करने के पश्चात उस रूप में पद धारण नहीं करेगा।


पदावधि हेतु टिप्पणी-

राज्य मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति पाँच वर्षों के लिए की जाएगी, लेकिन वह-

i. 65  वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद पद धारण नहीं कर सकेगा; तथा

ii. पुनर्नियुक्ति का पात्र नहीं होगा।


प्रश्न--सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 16 (2) में “विहीत” किये गये अनूसार राज्य मुख्य सूचना आयुक्त कितने वर्ष की आयु प्राप्त करने तक पद धारित कर सकेगा?

उत्तर--सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 धारा - 16. (2) के अनुसार 

प्रत्येक राज्य सूचना आयुक्त, उस तारीख से, जिसको वह अपना पद ग्रहण करता है पांच वर्ष की अवधि के लिए या पैसंठ वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, इनमें से जो भी पूर्वतर हो पद धारण करेगा और राज्य सूचना आयुक्त के रूप में पुनर्नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा:

परंतु प्रत्येक राज्य सूचना आयुक्त, इस उपधारा के अधीन अपना पद रिक्त करने पर धारा 15 की उपधारा (3)  में विनिर्दिष्ट रीति से मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में नियुक्त के लिए पात्र होगा;

परंतु यह और कि जहां राज्य सूचना आयुक्त की राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में नियुक्ती कियी जाता है, वहां उसकी पदावधि राज्य सूचना आयुक्त और राज्य  मूख्य सूचना आयुक्त के रूप में कुल मिलाकर पांच वर्ष से अधिक नहीं होगी।    


पदावधि हेतु टिप्पणी-

राज्य मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति भी पाँच वर्षों॑ के लिए की जाएगी लेकिन वह-

    i    65  वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद पद धारण नहीं कर सकेगा। 


प्रश्न--सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 16 (3) में “विहीत” किये गये अनूसार राज्य मुख्य सूचना आयुक्त  या  राज्य सूचना आयुक्त पद ग्रहण करने के पूर्व किसके समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान लेगा और उस पर हस्ताक्षर करेगा ?

उत्तर--सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 धारा - 16. (3) के अनुसार 

राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या कोई राज्य सूचना आयुक्त, अपना पद ग्रहण करने से पूर्व राज्यपाल या उनके द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति के समक्ष पहली अनुसूची में इस प्रयोजन के लिए उपवर्णित प्ररूप के अनुसार एक शपथ या प्रतिज्ञान लेगा और उस पर हस्ताक्षर करेगा। 

शपथ हेतु टिप्पणी-

  राज्य मुख्य सूचना आयुक्त तथा  सूचना आयुक्त को पदभार ग्रहण करने से पूर्व राज्यपाल या उसके द्वारा प्राधिकृत किसी अन्य व्यक्ति के समक्ष निर्धारित प्ररुप में शपथ या प्रतिज्ञान करना होगा तथा उस पर उसके हस्ताक्षर किए जाएंगे।


प्रश्न--सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 16 (4) में “विहीत” किये गये अनूसार राज्य मुख्य सूचना आयुक्त  या  राज्य सूचना आयुक्त किसे सम्बोधित अपने पद का त्याग करने का अधिकार रखता है ?

उत्तर--सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 धारा - 16. (4)  विहीत किये गये अनुसार-

1) राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या कोई राज्य सूचना आयुक्त, किसी भी समय, राज्यपाल को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा:

परंतु राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या किसी राज्य सूचना आयुक्त को धारा 17 में विनिर्दिष्ट रीति से हटाया जा सकेगा।


त्यागपत्र हेतु टिप्पणी-

त्यागपत्र-

         राज्य मुख्य सूचना आयुक्त अथवा सूचना आयुक्त को कभी भी स्वहस्ताक्षरित लेख द्वारा राज्यपाल को सम्बोधित करते हुए कभी भी अपने पद से त्यागपत्र देने का अधिकार होगा।


प्रश्न-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 16 (5) में “विहीत” किये गये अनूसार राज्य मुख्य सूचना आयुक्त  या  राज्य सूचना आयुक्त के संदेय वेतन और भत्ते तथा उसके सेवा के अन्य निबन्धन और शर्ते क्या हैं?

उत्तर- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 धारा - 16. (5) के अनुसार 

  संदेय वेतन और भत्ते तथा सेवा के अन्य निबंधन और शर्ते-

(क) राज्य मुख्य सूचना आयुक्त की वही होंगी, जो किसी निर्वाचन आयुक्त की है;

(ख)  राज्य सूचना आयुक्त की वही होगी, जो राज्य सरकार के मुख्य सचिव की है;

    परंतु यदि राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या कोई राज्य सूचना आयुक्त अपनी नियुक्ति के समय, भारत सरकार के अधीन या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी पूर्व सेवा के संबंध में कोई पेंशन, अक्षमता या क्षति पेंशन से भिन्न प्राप्त कर रहा है तो राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या राज्य सूचना आयुक्त के रूप में सेवा के संबंध में उसके वेतन में से, उस पेंशन की रकम को , जिसके अंतर्गत पेंशन का ऐसा कोई भाग, जिसे संराशिभूत किया गया था और सेवानिवृत्ति उपदान के समतुल्य पेंशन को छोडकर सेवा निवृत्ति फायदों के अन्य रुपों के समतुल्य पेंशन भी है, रकम को कम कर दिया जायगा:

    परंतु यह और कि जहां राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या राज्य सूचना आयुक्त अपनी नियुक्ति के समय, किसी केन्द्रीय अधिनियम या राज्य अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित किसी निगम में या केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार के स्वामित्वाधीन या नियंत्रणाधीन किसी सरकारी कंपनी में की गई किसी पूर्व सेवा के संबंध में सेवानिवृत्ति फायदे प्राप्त कर रहा है तो वहां राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या राज्य सूचना आयुक्त के रूप में सेवा के संबंध में उसके वेतन में से, सेवा निवृत्ति फायदों के समतुल्य पेंशन की रकम कम कर दी जाएगी:

      परंतु यह भी कि राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या राज्य सूचना आयुक्त के वेतन, भत्तों और सेवा की अन्य शर्तों में उसकी नियुक्ति के पश्चात उसके अलाभकारी रूप में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा।


वेतन –भत्ते एवं सेवा शर्ते हेतु टिप्पणी-

राज्य मुख्य सूचना आयुक्त की सेवा शर्ते वे ही होंगी जो भारत के  निर्वाचन आयुक्त की है।

      इसी प्रकार सूचना आयुक्त की सेवा शर्ते वे ही होगी जो  राज्य  के मुख्य सचिव की है।

       उनको संदेय वेतन एवं भत्ते भी तदनुरुप ही होगे। इनकी सेवा शर्तों तथा वेतन भत्तों में ऐसा कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा जो उनके लिए अहितकर हो।


प्रश्न--सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 16 (6) में “विहीत” किये गये अनूसार राज्य मुख्य सूचना आयुक्त  या  राज्य सूचना आयुक्त को  उसके कृत्यों के दक्ष पालन करने हेतु उतने अधिकारी और कर्मचारी कौन उपलब्ध कराएगा, और उनकी सेवा के अन्य निबन्धन और शर्ते क्य है?

उत्तर--सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 धारा - 16. (6) के अनुसार 

राज्य सरकार, राज्य मुख्य सूचना आयुक्त या राज्य  सूचना आयुक्तों को उतने अधिकारी और कर्मचारी उपलब्ध कराएगी, जितने इस अधिनियम के अधीन उनके कृत्यों के दक्ष पालन के लिए आवश्यक हों और इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए नियुक्त किए गय अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को संदेय वेतन और भत्ते तथा सेवा के निबंधन और शर्ते ऐसी होंगी जो विहीत की जाएं।


Comments

Followers

बासी खबर की ताजगी

छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना

छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए भूमि अधिग्रहण में बड़े पैमाने पर मुआवजा घोटाले का खुलासा हुआ है। इस घोटाले में राजस्व अधिकारियों और भू-माफियाओं की मिलीभगत से सरकारी खजाने को लगभग ₹43 करोड़ का नुकसान हुआ है।( स्त्रोत :  The Rural Press ) घोटाले का तरीका भूमि रिकॉर्ड में हेरफेर : अभनपुर तहसील के नायकबांधा, उरला, भेलवाडीह और टोकनी गांवों में भूमि अधिग्रहण के दौरान, अधिकारियों ने खसरा नंबरों में हेरफेर कर एक ही भूमि को छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित कर दिया। इससे 17 असली भू-स्वामियों की भूमि को 97 हिस्सों में बांटकर 80 नए नाम रिकॉर्ड में जोड़ दिए गए ।(स्त्रोत :  हरिभूमि ) मुआवजा राशि में बढ़ोतरी : इस हेरफेर के परिणामस्वरूप, मुआवजा राशि ₹29.5 करोड़ से बढ़कर ₹78 करोड़ हो गई, जिससे ₹43 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान हुआ ।( स्त्रोत :  The Rural Press ) जांच और कार्रवाई शिकायत और जांच : 8 अगस्त 2022 को कृष्ण कुमार साहू और हेमंत देवांगन ने इस घोटाले की शिकायत की। इसके बाद, रायपुर कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए, जिसमें घोटाले की प...

लालफीताशाही बनाम सुशासन

भारत में लालफीताशाही (Red Tapeism) एक ऐसी प्रशासनिक प्रणाली को दर्शाती है जिसमें सरकारी कार्य अत्यधिक नियमों, प्रक्रियाओं और दस्तावेज़ीकरण की वजह से धीमी गति से होते हैं। यह शब्द आमतौर पर नकारात्मक अर्थ में प्रयोग होता है और इसके कारण नागरिकों, उद्यमियों और कभी-कभी स्वयं अधिकारियों को भी भारी परेशानी होती है। छत्तीसगढ़ प्रदेश में हाल में कई राष्ट्रीय एजेंसियां भ्रष्टाचार के प्रकरणों में अन्वेषण कर रही है, तथाकथित प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों पर लगातार हो रही कार्यवाहियां यह दर्शाता है कि प्रशासनिक नक्सलवाद कई दशकों से छत्तीसगढ़ के सम्पदा का दोहन विधिविरुद्ध तरीके से प्रशासनिक अधिकारी कर रहें है. लालफीताशाही के प्रमुख लक्षण: ब्यूरोक्रेटिक प्रक्रिया की अधिकता: किसी भी कार्य को करने के लिए अनेक स्तरों पर अनुमति लेनी पड़ती है। निर्णय लेने में विलंब: अधिकारी निर्णय लेने से बचते हैं या अत्यधिक दस्तावेज़ मांगते हैं। दस्तावेज़ों की अधिकता: फॉर्म भरने, प्रमाणपत्र देने, अनुमोदन लेने आदि के लिए कई दस्तावेज़ों की आवश्यकता होती है। अधिकारियों का असहयोग: कई बार सरकारी कर्मचारी नागरिकों को...

कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व

  छत्तीसगढ़ में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के लिए सीएसआर फंडिंग का उद्देश्य निम्नलिखित प्रमुख सामाजिक और विकासात्मक लक्ष्यों की पूर्ति करना है: ✅ 1. सामाजिक विकास और कल्याण: CSR फंडिंग का मुख्य उद्देश्य समाज के कमजोर, वंचित और पिछड़े वर्गों के जीवन स्तर को ऊपर उठाना है। इसके तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और पोषण संबंधी पहल की जाती हैं। ✅ 2. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देना: सरकारी व ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार, स्मार्ट क्लास, छात्रवृत्ति, पुस्तकें और शिक्षण संसाधनों की व्यवस्था की जाती है। ✅ 3. स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार: CSR फंडिंग से ग्रामीण अस्पतालों का आधुनिकीकरण, मोबाइल हेल्थ क्लिनिक, टीकाकरण अभियान, मातृ और शिशु स्वास्थ्य, और गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए सहायता दी जाती है। ✅ 4. आजीविका और कौशल विकास: ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण (Skill Development), स्वयं सहायता समूह (SHGs) के सशक्तिकरण, और रोजगारपरक कार्यक्रमों का संचालन किया जाता है। ✅ 5. पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग...