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RTI FAQa : टीम अभिव्यक्ति

 प्रश्न- 1 लोक सभा सचिवालय सूचना का अधिकार (शुल्क एवं लागत का विनिमयन) नियम,2005  की प्रक्रीया क्या है? 

उत्तर -  1 लोक सभा सचिवालय सूचना का अधिकार (शुल्क एवं लागत का विनिमयन) नियम, 2005 निम्नानुसार-

                 जी. एस. आर. 747 (ई), दिनांक 27 दिसंबर, 2005- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005(22 सन 2005) की धारा 28 की उपधारा (2)(क), (ख) एवं (ग) के अंतर्गत शक्ति से अधिकृत लोक सभा के अध्यक्ष निम्नलिखित नियम बनाते है, अर्थातः-

1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ- 

3)  ये नियम लोक सभा सचिवालय सूचना का  अधिकार (शुल्कं एवं लागत  विनियमन) नियम, 2005 कहलाएंगे।

4) यह शासकीय राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रभावशिल होगा। 


2. परिभाषाएँ-   इन नियमों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो-

(क) “अधिनियम” से सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 अभिप्रेत है;

(ख) “धारा” से उक्त अधिनियम की धारा अभिप्रेत है;

(ग)  अन्य सभी शब्दों और पदों के जो इसमें प्रयुक्त है और परिभाषित नहीं है, वही अर्थ होंगे जो उस अधिनियम में है। 

 

3. अधिनियम की  धारा 6 की उपधारा (1) के अधीन सूचना प्राप्त करने के आवेदन पत्र के साथ आवेदन शुल्क दस रुपये नगद में रसीद प्राप्त कर दिए जाएं या मनिआर्डर द्वारा अथवा बै॔क डिमांड ड्राफ्ट या बैंकर चैक के द्वारा ड्राईग एण्ड डिसवर्सिग अधिकारी, लोक सभा को भुगतान हेतु दिए जाएं।  

4.  अधिनियम की धारा 7 की उपधारा (1)  के अधीन किसी सूचना को उपलब्ध कराने के लिए जो शुल्क लिया जाएगा वह नगद में रसीद प्राप्त कर या मनीआर्डर द्वारा या डिमांड ड्राफ्ट या बैंकर चैक जिसका भुगतान ड्राईग एण्ड डिसवर्सिग अधिकारी, लोक सभा को भुगतान हेतु दिए जाएं। जिनकी दरें निम्नानुसार है:-

(क)  तैयार किए गए या प्रतिलिपि किए गए प्रत्येक (ए- 4 या ए 3 साइज के पेपर पर आकार) कापी की हुई या बनाई हुई कागज के लिए दो रूपए;

(ख)  बडे आकार के कागज का वास्तविक खर्च या लागत मूल्य;

(ग)  नमून या आदर्श के लिए वास्तविक लागत या मूल्य; और

(घ) अभिलेखों के निरीक्षण के लिए, पहले घंटे के लिए कोई शुल्क नहीं; और बाद के प्रत्येक घंटे के लिए पाँच रूपए की शुल्क।

  

5.  अधिनियम की धारा 7  की उपधारा (5)  के अधीन  सूचना को उपलब्ध कराने के लिए शुल्क लिया जाएगा वह नगद में रसीद प्राप्त कर या मनीआर्डर द्वारा या डिमांड ड्राफ्ट या बैंकर्स चैक जिसका भुगतान ड्राईग एण्ड डिसवर्सिग अधिकारी, लोक सभा को भुगतान हेतु दिए जाएँ जिनकी दरें निम्नानुसार हैः-

 (क)  सूचना डिस्केट या फ्लॉपी में उपलब्ध कराने के लिए, प्रति डिस्केट या फ्लॉपी, पचास रुपए; और

(ख)   छपे फार्म पर सूचना उपलब्ध कराने हेतु प्रकाशन का तय शुदा मूल्य या फोटो कापी दो रूपये प्रति पृष्ठ प्रकाशन के भाग हेतु। 


1. भारत का राजपत्र, असाधारण, भाग 2, धारा 3, (क),  दिनांक 27-12-2005 को प्रकाशित(अंग्रेजी में)।


प्रश्न- राज्य सभा सचिवालय सूचना का अधिकार (शुल्क एवं लागत का विनिमयन) नियम,2005 की प्रक्रिया क्या है? 

उत्तर -  राज्य सभा सचिवालय सूचना का अधिकार (शुल्क एवं लागत का विनिमयन) नियम, 2005 निम्नानुसार-

                जी. एस. आर. 748 (ई), दिनांक 27 दिसंबर, 2005-  सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005(22 सन 2005) की धारा 28 की उपधारा (2)(क), (ख) एवं (ग) के अंतर्गत शक्ति से अधिकृत राज्य सभा के अध्यक्ष निम्नलिखित नियम बनाते है, अर्थातः-

6. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ- 

5)  ये नियम राज्य सभा सचिवालय सूचना का  अधिकार (शुल्कं एवं लागत  विनियमन) नियम, 2005 कहलाएंगे।

6) यह शासकीय राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रभावशिल होगा। 


7. परिभाषाएँ-   इन नियमों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो-

(क) “अधिनियम” से सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 अभिप्रेत है;

(ख) “धारा” से उक्त अधिनियम की धारा अभिप्रेत है;

(ग)  अन्य सभी शब्दों और पदों के जो इसमें प्रयुक्त है और परिभाषित नहीं है, वही अर्थ होंगे जो उस अधिनियम में है। 

 

8. अधिनियम की  धारा 6 की उपधारा (1) के अधीन सूचना प्राप्त करने के आवेदन पत्र के साथ आवेदन शुल्क दस रुपये नगद में रसीद प्राप्त कर दिए जाएं  अथवा बै॔क डिमांड ड्राफ्ट या बैंकर चैक के द्वारा ड्राईग एण्ड डिसवर्सिग अधिकारी, राज्य सभा सचिवालय को भुगतान हेतु दिए जाएं।  

9.  अधिनियम की धारा 7 की उपधारा (1)  के अधीन किसी सूचना को उपलब्ध कराने के लिए जो शुल्क लिया जाएगा वह नगद में रसीद प्राप्त कर या डिमांड ड्राफ्ट या बैंकर चैक जिसका भुगतान ड्राईग एण्ड डिसवर्सिग अधिकारी, राज्य सभा को भुगतान हेतु दिए जाएं। जिनकी दरें निम्नानुसार है:-

(क)  तैयार किए गए या प्रतिलिपि किए गए प्रत्येक (ए- 4 या ए 3 साइज के पेपर पर आकार) कापी की हुई या बनाई हुई कागज के लिए दो रूपए;

(ख)  बडे आकार के कागज का वास्तविक खर्च या लागत मूल्य;

(ग)  नमूना या आदर्श के लिए वास्तविक लागत या मूल्य; और

(घ) अभिलेखों के निरीक्षण के लिए, पहले घंटे के लिए कोई शुल्क नहीं; और बाद के प्रत्येक घंटे के लिए पाँच रूपए की शुल्क।

  

10.  अधिनियम की धारा 7  की उपधारा (5)  के अधीन  सूचना को उपलब्ध कराने के लिए शुल्क लिया जाएगा वह नगद में रसीद प्राप्त कर या डिमांड ड्राफ्ट या बैंकर्स चैक जिसका भुगतान ड्राईग एण्ड डिसवर्सिग अधिकारी, राज्य सभा सचिवालय को भुगतान हेतु दिए जाएँ जिनकी दरें निम्नानुसार हैः-

 (क)  सूचना डिस्केट या फ्लॉपी में उपलब्ध कराने के लिए, प्रति डिस्केट या फ्लॉपी, पचास रुपए; और

(ख)   छपे फार्म पर सूचना उपलब्ध कराने हेतु प्रकाशन का तय शुदा मूल्य या फोटो कापी दो रूपये प्रति पृष्ठ प्रकाशन के भाग हेतु। 


1. भारत का राजपत्र, असाधारण, भाग 2, धारा 3, (क),  दिनांक 27-12-2005 को प्रकाशित(अंग्रेजी में)।


प्रश्न-  छत्तीसगढ़ सूचना का अधिकार (अपील) नियम, 2006  क्या है?  प्रथम अपील व द्वितीय अपील की प्रक्रिया क्या है?

उत्तर -  छत्तीसगढ़ सूचना का अधिकार (अपील) नियम, 2006  निम्नानुसार-

   सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005(22 सन 2005) की धारा 27 की उपधारा (2)(क), (ख) एवं (ग) में प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग लाते हुए, राज्य सरकार, एतदद्वारा निम्नलिखित नियम बनाती है, अर्थातः-

11. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ- 

7)  ये नियम छत्तीसगढ़ सूचना का  अधिकार (अपील) नियम, 2006 कहलाएंगे।

8) यह शासकीय राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रभावशील होगा। 


12. परिभाषाएँ-   इन नियमों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो-

(क) “अधिनियम” से सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 अभिप्रेत है(क्र. 22 सन 2005);

(ख) “धारा” से उक्त अधिनियम की धारा अभिप्रेत है;

(ग) “गरीबी रेखा के नीचे” से अभिप्रेत है, कि छत्तीसगढ़ सरकार के वह नागरिक जिन्हें छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा गरीबी रेखा के नीचे का होना घोषित किया गया हो;  

(घ) “फीस” से अभिप्रेत है, अधिनियम के उपबंधों के अंतर्गत देय शुल्क;

(ड)  अन्य सभी शब्दों और पदों के जो इसमें प्रयुक्त है और परिभाषित नहीं है, वही अर्थ होंगे जो उनके लिए अधिनियम में है। 

13. प्रथम अपील-

1) यदि कोई व्यक्ति धारा 7 की उपधारा (1)  अथवा उपधारा (3)  के खण्ड (क) में विनिर्दिष्ट समय के भीतर विनिश्चय प्राप्त नहीं करता है या प्राप्त नहीं होता है अथवा लोक सूचना अधिकारी के विनिश्चय से व्यथित है, वह ऐसे कालावधि के व्यतीत होने के तीस दिवस के भीतर अथवा ऐसे निश्चय के प्राप्ति के तीस दिवस के भीतर लोक सूचना अधिकारी के, वरिष्ठ अपीलीय अधिकारी को अपील के ज्ञापन के साथ 50/- (यदि अपील आदेश डाक द्वारा चाही गई हो तो रू. 75) का शुल्क नगद या नान ज्युडिशियल स्टाम्प के साथ प्रस्तुत कर सकेगा। परन्तु यह कि ऐसा अपीलीय अधिकारी तीस दिवस की कालावधि के पश्चात भी अपील सुनवाई के लिए ग्रहण कर सकेगा यदि उसका समाधान हो जाता है कि अपीलार्थी पर्याप्त कारणों से अपील समयावधि में प्रस्तुत करने में विफल रहा है।

2) अपील के ज्ञापन में अपीलार्थी का नाम व पता, जन सूचना अधिकारी का नाम तथा पदनाम, जन सूचना अधिकारी द्वारा सूचना न देने अथवा अपूर्ण अथवा भ्रामक जानकारी देने अथवा फीस का भुगतान करने के आदेशों का अथवा समयावधि में जानकारी न देने का स्पष्ट उल्लेख किया जाएगा।

3) अपील की सुनवाई हेतु अपीलीय अधिकारी संबंधित जन सूचना अधिकारी को कम से कम 7 दिवस का नोटिस देगा।

4) उपनियम (1) के अंतर्गत अपील प्राप्त किए जाने से तीस दिवस के भीतर या ऐसी बढाई गयी कालावधि के भीतर जो अपील फाइल करने की तारीख से कुल मिलाकर पैंतालिस दिवस से अधिक नहीं हो, यथास्थिति लिखित में कारणों को अभिलिखित करते हुए निपटाई जाएगी।

5) अपील में पारित आदेश की प्रति अपीलार्थी को निःशुल्क प्रदाय की जाएगी।


14.  द्वितीय अपील – 

1) इस नियम के उपनियम (3)  के अधीन विनिश्चय के विरुद्ध द्वितीय अपील राज्य सूचना आयोग को उस तारीख से नब्बे दिवस के भीतर प्रस्तुत की जा सकेगी जिस तारीख को विनिश्वय पारित हो गया अथवा जब विनिश्चय वास्तविक रुप से प्राप्त किया गया है अथवा उस तारीख से जिस तारीख को प्रथम अपील प्रस्तुति को पैंतालिस दिवस हो गये है अथवा उस तारीख से जिस तारीख को प्रथम अपील प्रस्तुति को पैंतालिस दिवस हो गये। परन्तु यह कि राज्य सूचना आयोग नब्बे दिवस की कालावधि के बीतने के पश्चात भी अपील सुनवाई के लिए ग्रहण कर सकेगा, यदि उसका समाधान हो जाता है कि अपीलार्थी समय के भीतर अपील प्रस्तुत करने में प्रर्याप्त कारणों से विफल रहा है।

2) अपील के ज्ञापन में अपीलार्थी का नाम व पता प्रथम अपीलीय अधिकारी जिसके आदेश के विरूद्ध अपील की जा रही हो उसका नाम तथा पदनाम और जिस आदेश के विरुद्ध अपील की जा रही हो उसकी सत्यापित प्रति देना होगा।

3) 1 (राज्य सूचना आयोग) के समक्ष प्रस्तुत अपील के ज्ञापन के साथ रुपये 100/- (यदि आदेश की प्रति डाक से चाही गई हो तो रु. 125)  की फीस चालान, मनीआर्डर या नान ज्युडिशियल स्टाम्प के रुप में जमा करना होगा।

4) 1 {राज्य सूचना आयोग} यथास्थिति लोक प्राधिकारी और/ अथवा जन सूचना अधिकारी और / अथवा अपीलार्थी को युक्तियुक्त सुनवाई का अवसर प्रदान करने के पश्चात लिखित में कारणों को अभिलिखित करते हुए अपील का निराकरण करेगा।

5) अपील की सुनवाई हेतु 2{सूचना आयोग} संवंधित पक्षकारों को कम से कम सात दिवस का नोटिस देगा।

6) 1 {राज्य सूचना आयोग} का विनिश्चय अंतिम एवं बंधनकारी होगा।

15.  1 {राज्य सूचना आयोग} के विनिश्चय की प्रति अपीलार्थी को निःशुल्क प्रदाय की जाएगी परन्तु यदि अपीलार्थी आदेश की प्रति डाक द्वारा प्राप्त करना चाहता है तो अपीलार्थी से डाक शुल्क प्राप्त कर तीस दिवस के अंदर भेजी जाएगी।

16. नियत 3 एवं 4 के अन्तर्गत देय फीस ऐसे व्यक्तियों से जो गरीबी रेखा से नीचे है से प्रभारित नहीं की जाएगी।



1. छ. ग. शासन सा. प्र. वि. क्र. एफ. 2-11/ 2006/ 1/ 6, रायपुर, दिनांक 17-3-2006।

1. छ. ग. शासन सा. प्र. वि. क्र. एफ. 2-11/ 2006/ 1/ 6, रायपुर, दिनांक 23-5-2006 द्वारा “राज्य सूचना आयुक्त” के स्थान पर प्रतिस्थापित; छत्तीसग़ढ राजपत्र

(असाधारण) दिनांक 30-5-2006 पृष्ठ 307 पर प्रकाशित।


2. छ. ग. शासन सा. प्र. वि. क्र. एफ. 2-11/ 2006/ 1/ 6, रायपुर, दिनांक 23-5-2006 द्वारा शब्द “ सूचना आयुक्त” के स्थान पर प्रतिस्थापित; छत्तीसग़ढ राजपत्र

(असाधारण) दिनांक 30-5-2006 पृष्ठ 307 पर प्रकाशित।




प्रश्न-छत्तीसगढ़ सूचना का अधिकार (शुल्क एवं प्रभार) नियम, 2007 कब से प्रभावी है?

 उत्तर छत्तीसगढ़ सूचना का अधिकार (शुल्क एवं प्रभार) नियम, 2007 निम्नानुसार-

छत्तीसगढ़  शासन सा. प्र. वि. क्र.  एफ. 2-10 /2006 /1/ 6, रायपुर,  दिनांक 12- 10- 2006;  छत्तीसगढ़ राजपत्र, असाधारण,  दिनांक 28-10-2006 पृष्ठ 555-556 पर प्रकाशित।

अधिसूचना

रायपूर दिनांक १२ अक्टूबर, २००६

 

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005(22 सन 2005) की धारा 27 की उपधारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, राज्य सरकार की अधिसूचना दिनांक 9 मार्च, 2006 द्वारा जारी “छत्तीसगढ़ सूचना का अधिकार (शुल्क एवं प्रभार) नियम 2006” को एतदद्वारा  निरस्त करता है तथा सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 7 की उपधारा (9) के स्पष्टीकरण हेतु निम्नलिखित नियम बनात है, अर्थातः-


17. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ- 

1. ये नियम छत्तीसगढ़ सूचना का  अधिकार (शुल्कं एवं प्रभार) नियम, 2007 कहलाएंगे।

2. यह शासकीय राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रभावशील होगा। 



प्रश्न- छत्तीसगढ़ सूचना का अधिकार (शुल्क एवं प्रभार) नियम, 2007 के अनूसार नियम 2 परिभाषाएँ के अधीन (क)“अधिनियम” (ख)“धारा” (ग)“गरीबी रेखा से नीचे” की परिभाषा क्या है?

उत्तर -छत्तीसगढ़ सूचना का अधिकार (शुल्क एवं प्रभार) नियम, 2007 निम्नानुसार-

छत्तीसगढ़  शासन सा. प्र. वि. क्र.  एफ. 2-10 /2006 /1/ 6, रायपुर,  दिनांक 12- 10- 2006;  छत्तीसगढ़ राजपत्र असाधारण,  दिनांक 28-10-2006 पृष्ठ 555-556 पर प्रकाशित

अधिसूचना

रायपूर दिनांक १२ अक्टूबर, २००६

 सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005(22 सन 2005) की धारा 27 की उपधारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, राज्य सरकार की अधिसूचना दिनांक 9 मार्च, 2006 द्वारा जारी “छत्तीसगढ़ सूचना का अधिकार (शुल्क एवं प्रभार) नियम 2006” को एतदद्वारा  निरस्त करता है तथा सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 7 की उपधारा (9) के स्पष्टीकरण हेतु निम्नलिखित नियम बनात है, अर्थातः-


संक्षिप्त नाम और प्रारंभ- 

ये नियम छत्तीसगढ़ सूचना का  अधिकार (शुल्कं एवं प्रभार) नियम, 2007 कहलाएंगे।

यह शासकीय राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रभावशील होगा। 


नियम २ परिभाषाएँ-   इन नियमों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो-

(क) “अधिनियम” से सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005( क्र. 22 सन 2005) अभिप्रेत है;

(ख) “धारा” से उक्त अधिनियम की धारा अभिप्रेत है;

(ग) “गरीबी रेखा से नीचे” से अभिप्रेत है, कि छत्तीसगढ़ सरकार के वह नागरिक जिन्हें छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा गरीबी रेखा के नीचे का होना घोषित किया गया हो; 

  

(घ)अन्य सभी शब्दों और पदों के जो इसमें प्रयुक्त है और परिभाषित नहीं है, वही अर्थ होंगे जो उनके लिए अधिनियम में है। 


प्रश्न-छत्तीसगढ़ सूचना का अधिकार (शुल्क एवं प्रभार) नियम, 2007 के अनूसार अधिनियम के अधीन गरीबी रेखा से नीचे के व्यक्तियों द्वारा चाही गई कौन सी जानकारी निःशुल्क उपलब्ध करायी जाएगी?

उत्तर-छत्तीसगढ़ सूचना का अधिकार (शुल्क एवं प्रभार) नियम, 2007 के अनूसार अधिनियम के अधीन गरीबी रेखा से नीचे के व्यक्तियों द्वारा चाही गई जानकारी निम्न विवण अनुसार निःशुल्क उपलब्ध करायी जाएगी:-

1) आवेदक द्वारा मांगी गई जानकारी यदि उसके जीवन से संबंधित है, तो वह जानकारी उस प्रारूप में उपलब्ध करायी जाएगी जिसमें वह मांगी गई है।

2) चाही गई जानकारी यदि स्वयं से संबंधित नहीं है परन्तु यदि जानकारी 50 छायाप्रति पृष्ठों (ए- 4 साइज के) या तैयार करने में रूपये 100 (रूपये एक सौ केवल) के खर्च में दी जा सकती है, तो वह जानकारी चाहे गएस्वरुप में उपलब्ध करायी जाएगी।

3) यदि मांगी गई जानकारी 50  छायाप्रति पृष्ठों से अधिक की है या रूपये 100 से अधिक खर्च का है तो उक्त धारा 7(9) के अधीन कारण अभिलिखित कर आवेदक को कार्यालय में अभिलेखों, नस्तियों के अवलोकन करने का निवेदन किया जायेगा।


प्रश्न- छत्तीसगढ़ सूचना का अधिकार (शुल्क एवं प्रभार) नियम, 2007 के अनूसार जो आवेदक गरीबी रेखा के नीचे के व्यक्तियों की परिभाषा में नहीं आते है, उन्हें नस्ती अवलोकन करने का प्रथम घंटे का शुल्क कितना देना है और नियम कब से प्रभावी है?

उत्तर- छत्तीसगढ़ सूचना का अधिकार (शुल्क एवं प्रभार) नियम, 2007

छत्तीसगढ़  शासन सा. प्र. वि. क्र.  एफ. 2-10 /2006 /1/ 6, रायपुर,  दिनांक 12- 10- 2006;  छत्तीसगढ़ राजपत्र, असाधारण,  दिनांक 28-10-2006 पृष्ठ 555-556 पर प्रकाशित।

अधिसूचना

रायपूर दिनांक १२ अक्टूबर, २००६

 सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005(22 सन 2005) की धारा 27 की उपधारा (1) द्वारा प्रदत्त शक्तियों को प्रयोग में लाते हुए, राज्य सरकार की अधिसूचना दिनांक 9 मार्च, 2006 द्वारा जारी “छत्तीसगढ़ सूचना का अधिकार (शुल्क एवं प्रभार) नियम 2006” को एतदद्वारा  निरस्त करता है तथा सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 7 की उपधारा (9) के स्पष्टीकरण हेतु निम्नलिखित नियम बनात है, अर्थातः-

संक्षिप्त नाम और प्रारंभ- 

ये नियम छत्तीसगढ़ सूचना का  अधिकार (शुल्कं एवं प्रभार) नियम, 2007 कहलाएंगे।

यह शासकीय राजपत्र में प्रकाशन की तिथि से प्रभावशील होगा। 

जो आवेदक गरीबी रेखा के नीचे के व्यक्तियों की परिभाषा में नहीं आते है, उन्हें नस्ती अवलोकन करने का प्रथम घंटे का शुल्क रूपये 50 होगा। 


प्रश्न -  सूचना का अधिकार अधिनियम कब से प्रभावशील है? इसमें किस –किस को अधिकार प्रदान किए गए हैं?

उत्तर: सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 दिनांक 15 जून, 2005 से विधि का रूप ले चुका है। इसी के साथ सूचना की स्वतंत्रता अधिनियम, 2002 निरस्त हो गया है। इसके कतिपय प्रावधान उसी तिथि से प्रभाव में आ गए हैं। जम्मू एवं कश्मीर राज्य के अलावा सम्पूर्ण भारत में यह अधिनियम पूर्ण रुप से 12 अक्टूबर, 2005 से लागू हो गया है।

शासकीय गुप्त बात अधिनियम, 1923 और अन्य किसी कानून के प्रावधानों के बावजूद इस अधिनियम के प्रावधान प्रभावी है।

केन्द्रीय अधिनियम के प्रभावशील हो जाने पर, राजस्थान सरकार द्वारा अपने कानून राजस्थान सूचना का अधिकार अधिनियम, 2000 के निरसन बाबत नीतिगत निर्णय लिया जा चुका है।

इस अधिनियम द्वारा भारत के सभी नागरिकों को सूचना प्राप्त करने का अधिकार प्रदान किया गया है।


प्रश्न  सूचना का अधिकार अधिनियम  २००५ के अनूसार सूचना से क्या तात्पर्य है?

उत्तर; सूचना का अधिकार अधिनियम  २००५ के अनूसार “सूचना” से किसी इलैक्ट्रानिक रूप से धारित अभिलेख, दस्तावेज, ज्ञापन, ई-मेल, मत, सलाह, प्रेस विज्ञप्ति, परिपत्र, आदेश, लागबुक, संविदा, रिपोर्ट, कागजपत्र, नमूने माडल, आंकडो संबंधी सामग्री और किसी प्राइवेट निकाय से संबंधित ऐसी सूचना सहित, जिस तक तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधी के अधीन किसी लोक प्राधिकारी की पहुंच हो सकती है, किसी रूप में कोई सामग्री अभिप्रेत है।


प्रश्न . सूचना का अधिकार अधिनियम  २००५ के अनूसार अभिलेख में क्या-क्या सम्मिलित है?

उत्तर: अभिलेख में निम्नलिखित सम्मिलित है-

(क) कोई दस्तावेज, पाण्डुलिपि और फाइल;

(ख) किसी दस्तावेज की कोई माइक्रोफिल्म, माइक्रोफिशे और प्रतिकृति प्रति;

(ग)  ऐसी माइक्रोफिल्म में सन्निविष्ट प्रतिबिम्ब का पुनरूत्पादन और

(घ) किसी कम्प्युटर द्वारा या किसी अन्य युक्ति द्वारा उत्पादित कोई अन्य सामग्री।


प्रश्न - सूचना का अधिकार अधिनियम  २००५ के अनूसार सूचना के अधिकार से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: “सूचना का अधिकार” से इस अधिनियम के अधीन पहुंच योग्य सूचना का, जो किसी लोक प्राधिकारी द्वारा या उसके नियंत्रणाधीन धारित है, अधिकार अभिप्रेत है और जिसमें निम्नलिखित का अधिकार सम्मिलित है-

(i) कृति, दस्तावेजों, अभिलेखों का निरीक्षण;

(ii) दस्तावेजों या अभिलेखों के टिप्पण, उद्धरण या प्रमाणित लेना;

(iii) सामग्री के प्रमाणित नमुने लेना;

(IV) डिस्केट, फ्लापी, टेप, वीडीयो कैसेट के रूप में या किसी अन्य इलैक्ट्रानिक रिति में या प्रिंटआउट के माधयम से सूचना को, जहां ऐसी सूचना किसी कम्प्युटर या किसी अन्य युक्ति में भण्डारित है, अभिप्राप्त करना।


प्रश्न - सूचना का अधिकार अधिनियम  २००५ के अनूसार लोक प्राधिकरण का क्या अर्थ है?

उत्तर: इसका अर्थ किसी ऐसे प्राधिकरण, निकाय या स्व-शासित संस्थान से है जो-

(क) संविधान के अन्तर्गत या द्वारा,

(ख) संसद द्वारा बनाई गई किसी कानून द्वारा;

(ग)  विधान सभा द्वारा बनाई गये कानून विधि द्वारा:

(घ)  समुचित सरकार द्वारा जारी की गई अधिसूचना या किए गए आदेश द्वारा स्थापित या गठित कोई प्राधिकारी या निकाय या स्वायत्त सरकारी संस्था अभिप्रेत है और इसके अंतर्गत-

(i) कोई ऐसा निकाय है जो केन्द्रीय सरकार के स्वामित्वाधीन, नियंत्रणाधीन या उसके द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उपलब्ध कराई गई निधियों द्वारा वित्त पोषित है;

(ii) कोई ऐसा गैर-सरकारी संगठन है जो समुचित सरकार द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उपलब्ध कराई गई निधियों द्वारा वित्तपोषित है।


प्रश्न - सूचना का अधिकार अधिनियम  २००५ के अनूसार लोक प्राधिकरण के क्या-क्या कर्तव्य है?

उत्तर: हर लोक प्राधिकरण अपने समस्त अभिलेखों को भली प्रकार श्रेणीबद्ध एवं सूचीबद्ध कर इस प्रकार एवं इस रुप में संधारित करेगा कि सुचना का अधिकार सुगम हो जावे। अपने स्त्रोंतों की प्राप्यता को ध्यान में रखते हुए, कम्प्यटरीकृत किए जाने योग्य समस्त अभिलेखों का, युक्तियुक्त समय में कम्प्यूटरीकरण एवं सम्पूर्ण देश में विभिन्न तरीकों से नेटवर्क से जुडाव सुनिश्चित करेगा ताकि अभिलेखों तक पहुँच सुगम हो जावे। सके अतिरिक्त लोक प्राधिकरण को विभिन्न सूचनाएं भी आवश्यक रुप से प्रकाशित करनी होंगी।


प्रश्न -  सूचना का अधिकार अधिनियम  २००५ के अनूसार लोक प्राधिकरण द्वारा क्या सूचनायें प्रकाशित करना आवश्यक है?

उत्तर: हर लोक प्राधिकरण 12 अक्टूबर 2005 से पूर्व निम्न सूचनायें प्रकाशित करेगा: 

(ख)  इस अधिनियम के अधिनियमन से एक सौ बीस दिन के भीतर-

i. अपने संगठन की विशिष्टियां, कृत्य और कर्तव्य का विवरण;

ii. अपने  अधिकारीयों और कर्मचारीयों की शक्तियाँ और कर्तव्य;

iii.  विनिश्चय करने की प्रक्रिया में पालन की जाने वाली प्रक्रिया जिसमें पर्यवेक्षण और उत्तरदायित्व के क्या माध्यम सम्मिलित है;

iv. अपने कृत्यों के निर्वहन के लिए स्वयं द्वारा स्थापित मापमान;

v. अपने द्वारा या अपने नियंत्रणाधीन धारित या अपने कर्मचारीयों द्वारा अपने कृत्यों के निर्वहन के लिए प्रयोग किये गये नियम, विनियम, अनुदेश, निर्देशिका और अभिलेख;

vi.  ऐसे दस्तावेजों के, जो उसके द्वारा धारित या उसके नियंत्रणाधीन है, प्रवर्गों का विवरण;

vii.  किसी व्यवस्था की विशिष्टीयाँ जो उसकी निती की संरचना या उसके कार्यान्वयन के संबंध में जनता के सदस्यों से परामर्श के लिए या उनके द्वारा अभ्यावेदन के लिए विदयमान है;

viii.  ऐसे बोर्डों, परिषदों, समितीयों व अन्य निकायों के विवरण जिनमें दो या अधिक व्यक्ति है, जिनका उसके भाग रूप में या इस बारे में सलाह देने के प्रयोजन के लिए गठन किया गया है कि क्या उन बोर्डों, परिषदों, समितीयों व अन्य निकायों की बैठकें जनता के लिए खुली होंगी या ऐसी बैठकों के कार्यवृत्त तक जनता की पहुंच होगी;

ix.  अपने अधिकारियों और कर्मचारियों की निर्देशिका;

x.  अपने प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी द्वारा प्राप्त मासिक पारश्रमिक जिसमें उसके विनियमों में यथा उपबंधित प्रतिकर की प्रणाली सम्मिलीत है ;

xi. . सभी योजनाओं, प्रस्तावित व्ययोँ और किये गये संवितरणों पर रिपोर्टों की विशिष्टीयां उपदर्शित करते हुए अपने प्रत्येक अभिकरण को आबंटीत बजट ;

xii.  सहायिकी कार्यक्रमों के निष्पादन की रिती जिसमें आबंटीत राशि और ऐसे कार्यक्रमों के फायदाग्राहियों के ब्यौरे सम्मिलित है;

xiii.  अपने द्वारा अनुदत्त रियातों, अनुज्ञापत्रों या प्राधिकारों के प्राप्ति कर्ताओं की विशिष्टीयां;

xiv.  किसी इलेक्ट्रॉनिक रूप में सूचना के संबंध में ब्यौरे, जो उसको उपलब्ध हो या उसके द्वारा धारित हो;

xv.  सूचना अभिप्राप्त करने के लिए नागरिकों को उपलब्ध सुविधाओं की विशिष्टीयां, जिनके अन्तर्गत किसी पुस्तकालय या वाचन कक्ष के यदि लोक उपयोग के लिए अनुरक्षित हैं तो कार्यकरण घण्टे सम्मिलित हैं;

xvi. लोक सूचना अधिकारीयों के नाम, पदनाम और अन्य विशिष्टीयां;

xvii.  ऐसी अन्य सूचना, जो विहित की जाए;

प्रकाशित करेगि और तत्पशचात इन प्रकाशनों को प्रत्येक वर्ष में अद्तन करेगा;

(ग)  महत्त्वपूर्ण नीतीयों की विरचना करते समय या ऐसी विनिश्चयों की घोषणा करते समय, जो जनता को प्रभावित करते हो, सभी सुसंगत तथ्यों को प्रकाशित करेगा;

(घ)  प्रभावित व्यक्तियों को अपने प्रशासनिक या न्यायिककल्प विनिश्चयों के लिए कारण उपलब्ध कराएगा।


प्रश्न -. सूचना का अधिकार अधिनियम  २००५ के अनूसार  क्या लोक प्राधिकरण के लिए सूचना को व्यापक रूप से प्रसारित किया जाना आवश्यक है?

1. उत्तर: प्रत्येक लोक अधिकारी का निरंतर यह प्रयास होगा कि यह स्वप्रेरणा से संसूचना के विभिन्न साधनों के माध्यम से, जिसके अंतर्गत इंटरनेट भी है, नियमित अंतरालों पर जनता को उतनी सूचना उपलब्ध कराने के लिए उपधारा (1)  के खंड (ख)  की अपेक्षाओं के अनुसार उपाय करे, जिससे कि जनता को सूचना प्राप्त करने के लिए इसअधिनियम का कम से कम अवलम्ब हो।

2. उपधारा (1) के प्रयोजन के लिए, प्रत्येक सूचना को विस्तृत रूप से और ऐसे प्ररूप और रीति में प्रसारिर किया जाएगा, जो जनता के लिए सहज रूप से पहुंच योग्य हो सके।

3. सभी सामग्री को, उस क्षेत्र में लागत प्रभावशीलता, स्थानीय भाषा और संसूचना की अत्यंत प्रभावी पद्धती को ध्यान में रखते हुए, प्रसारित किया जाएगा तथा सूचना तक, यथास्थिति, केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य सूचना अधिकारी के पास इलेक्ट्रानिक प्ररूप में संभव सीमा तक निःशुल्क या माध्यम की ऐसी लागत पर या ऐसी मुद्रण लागत कीमत पर, जो विहीत की जाए, सहज पहुंच होनी चाहिए।

स्पष्टीकरण=-  उपधारा (3)  या उपधारा (4)  के प्रयोजनों के लिए ‘प्रसारित’ से सूचना पट्टों, समाचारपत्रों, लोक उदघोषणाओं, मिडिया प्रसारणों, इंटरनेट या किसी अन्य युक्ति के माध्यम से जिसमें किसी लोक प्राधिकारी के कार्यालयों का निरीक्षण सम्मिलित है, जनता को सूचना की जानकारी देना या संसूचित कराना अभिप्रेत है।


प्रश्न - सूचना का अधिकार अधिनियम  २००५ के अनूसार लोक सूचना अधिकारी कौन होते है?

उत्तर: लोक सूचना अधिकारी लोक प्राधिकरण द्वारा अपनी प्रशासनिक इकाइयों या कार्यालयों में मनोनीत वे अधिकारी हैं जो आवेदकों को आवेदित सूचना उपलब्ध करावेंगे। लोक प्राधिकरण इतने अधिकारी मनोनीत करेंगे, जितनी आवश्यकता है। केन्द्रीय कार्यालयों में उन्हें केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी और राज्य के कार्यालयों में राज्य ल्क सूचना अधिकारी कहा जावेगा। केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी में केन्द्रीय सहायक लोक सूचना अधिकारी और राज्य लोक सूचना अधिकारी में राज्य सहायक लोक सूचना अधिकारी सम्मिलित है। उनका मनोनयन 12 अक्टूबर, 2005 से पूर्व होना आवश्यक है।

        प्रत्येक लोक प्राधिकरण उपखण्ड स्तर पर सहायक लोक सूचना अधिकारी का मनोनयन भी उक्त तिथि से पूर्व सूचना आवेदन या अपील को प्राप्त कर सम्बधित लोक सूचना अधिकारी या उससे वरिष्ठ अधिकारी (अपील अधिकारी) या सम्बधित सूचना आयोग को अग्रप्रेषित करने के लिए करेगा। यह उल्लेखनीय है कि यदि सूचना आवेदन पत्र या अपील केन्द्रीय सहायक लोक सूचना अधिकारी या राज्य सहायक लोक सूचना अधिकारी जैसी भी स्थिति हो, को प्रस्तुत की गई है तो उसके निस्तारण की अवधि 5 दिन अधिक हो जावेगी।

      लोक सूचना अधिकारी अपने कर्तव्य के उचित प्रकार से निर्वहन हेतु किसी अन्य अधिकारी से आवेदित सूचना उपलब्ध कराने हेतु सहायता मांग सकता है। ऐसी स्थिति में वह समस्त सहायता देगा और वह अधिकारी भी कानून का उल्लंघन होने पर लोक सूचना अधिकारी माना जावेगा अर्थात वह भी उतना ही उत्तरदायी होगा जितना लोक सूचना अधिकारी।


प्रश्न - सूचना का अधिकार अधिनियम  २००५ के अनूसार लोक सूचना अधिकारी के क्या-क्या कर्तव्य है?

उत्तर: प्रत्येक लोक सूचना अधिकारी सूचना आवेदनोंका निपटारा करेगा।

लोक सूचना अधिकारी जहां आवश्यकता समझे, किसी भी अन्य अधिकारी से अपने कर्तव्य निर्वहन के लिए सह्योग ले सकता है।

कोक सूचना अधिकारी आवेदक की यथोचित सहायता करेगा। जहां आवेदन लिखित में नहीं दिया जा सकता है, लोक सूचना अधिकारी ऐसे आवेदक को सूचना लिख कर देने में समस्त युक्तियुक्त सहयोग प्रदान करेगा।

 यदि लोक सूचना अधिकारी से इन्द्रीय रुप से निःशक्त आवेदक द्वारा किसी अभिलेख या उसके वंश तक पहुँच चाही गई है, तो वह उसे सूचना की पहुँच तक या उसके निरीक्षण हेतु समर्थ बनाने के लिए सहायता करेगा।

 यदि आवेदित सूचना या आवेदन की विषय वस्तु अन्य लोक प्राधिकरण के कृत्यों से संबंधित है तो लोक सूचना अधिकारी उसे या उसका सुसंगत अंश आवेदन प्राप्ति से अधिकतम 5 दिन में सम्बधित लोक प्राधिकरण को हस्तांतरित करेगा और आवेदक को अविलम्ब सूचित करेगा।

     लोक सूचना अधिकारी, आवेदन प्राप्ति पर, जितनी जल्दी सम्भव हो, आवेदन प्राप्ति तिथि से 30 दिन की अवधि में निर्धारित शुल्क पर सूचना उपलब्ध करावेगा अथवा विशिष्ट कारण दर्शाते हुए उसे निरस्त करेगा।

    लोक सूचना अधिकारी से किसी व्यक्ति के जीवन या उसकी स्वतंत्रता से सम्बधित सूचना चाही गई है, तो वह उसे आवेदन प्राप्ति से 48 घंटे उपलब्ध करावेगा। यदि लोक सूचना अधिकारी निर्धारित अवधि में आवेदन पर निर्णय करने में विफल रहता है तो यह माना जावेगा कि उसने आवेदन अस्वीका कर दिया है।

   लोक सूचना अधिकारी आवेदक को उसका आवेदन अस्वीकार करने की स्थिति में निम्न सूचनाएं देगा:

(क) अस्विकृति के कारण;

(ख)  अस्विकति आदेश के विरुद्ध अपील करने की समयावधि; और

(ग) अपील अधिकारी का विवरण।

  लोक सूचना अधिकारी आवेदक द्वारा जिस प्रारुप में सूचना चाही गई है, उसी में देगा, जब तक इसका गैर अनुपातिक रुप से लोक प्राधिकरण के स्त्रोतों पर कुप्रभाव न पडे अथवा प्रश्नगत अभिलेख की सुरक्षा या परिक्षण के लिए घातक न हो।

   लोक सूचना अधिकारी तृतीय पक्ष सम्बधी सूचना उपलब्ध कराने से पूर्व उसे नोटिस देगा, उसकी प्रस्तुति आने पर उस पर विचार करेगा।


प्रश्न -  सूचना का अधिकार अधिनियम  २००५ के अनूसार क्या नागरिकों को भी सभी प्रकार की सूचनायें प्राप्त हो सकती है?

4) उत्तर: इस अधिनियम के अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, इसमें अन्यथा उपबंधित के सिवाय, निम्नलिखित सूचना को प्रकट करने से छुट दी जाएगी, अर्थात-

(क)  सूचना जिसके प्रकटन से,

iii. भारत की प्रभुता और अखंडता, राज्य की सुरक्षा, रणनीति वैज्ञानिक या आर्थिक हित विदेश से संबंध पर प्रतिकूल प्रभाव पडता हो; या

iv. किसी अपराध को करने का उद्दीपन होता हो;

       (ख) सूचना, जिसके प्रकटन से किसी न्यायालय या अधिकरण द्वारा अभिव्यक्त रूप से निषिद्ध किया गया है या जिसके प्रकटन से न्यायालय का अवमान होता हो;

      (ग)  सूचना जिसके प्रकटन से संसद या किसी राज्य के विधान –मंडल के विशेषाधिकार भंग हो संकेत हो;

      (घ)  सूचना, जिसमें वाणिज्यिक विश्वास, व्यापार गोपनीयता या बौद्धिक संपदा, सम्मिलित है, जिसके प्रकटन से किसी तीसरे पक्षकार की प्रतियोगी स्थिति को नुकसान होता है;

 परंतु यह कि ऐसी सूचना को प्रकट किया जा सकेगा यदि लोक सूचना अधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि ऐसी सूचना का प्रकटन विस्तृत लोक हित समाविष्ट है;

  (ड)  किसी व्यक्ति को उसकी वैश्वासिक नातेदारी में उपलब्ध सूचनाः

  परंतु यह कि ऐसी सूचना को प्रकट किया जा सकेगा यदि लोक सूचना अधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि ऐसी सूचना के प्रकटन में विस्तृत लोक हित में आवश्यक है;

(च)  किसी विदेशी सरकार से विश्वास में प्राप्त सूचना;

(छ)  सूचना, जिसके प्रकट करने से किसी व्यक्ति के जीवन या शारिरीक सुरक्षा के लिए या सूचना के संसाधन की पहचान करने में या विश्वास में दी गई सहायता या सुरक्षा प्रयोजनों के लिए खतरा होगा;

(ज) सूचना, जिसके प्रकट करने से अन्वेषण या अपराधियों के गिरफ्तार करने या अभियोजन की क्रिया में अडचन पडेगी;

(झ)  मंत्रिमंडल के कागजपत्र, जिसमें मंत्रिपरिषद के सचिवों और अन्य अधिकारियों के विचार –विमर्श के अभिलेख सम्मिलित है;

 परंतुयह कि मंत्रिपरिषद के विनिश्चय उनके कारण तथा यह सामग्री जिसके आधार पर विनिश्चय किए गए थे, विनिश्चय किए जाने और विषय को पूरा या समाप्त होने के पश्चात जनता को उपलब्ध कराया जाएगा;

      परंतु यह और कि वे विषय जो इस धारा में सूचीबद्ध छूटों के अंतर्गत आते है, प्रकट नहीं किए जाएंगें।

(त्र)  सूचना, जो व्यक्तिगत सूचना से संबंधित है, जिसके प्रकट करने का किसी लोक क्रियाकलाप या हित से संबंध नहीं है या जिससे व्यष्टि की एकिन्तता पर अनावश्यक अतिक्रमण नहीं होता है;

     परंतु यह कि ऐसी सूचना प्रकट की जा सकेगी यदि यथास्थिति, सूचना अधिकार या अपील प्राधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि ऐसी सूचना का प्रकटन विस्तृत लोक हित में न्यायोचित है। 

5) ऐसी सूचना से, जिसको, यथास्थिति संसद या किसी राज्य विधान मंडल को देने से इंकार नहीं किया जा सकता है, किसी व्यक्ति को इंकार नहीं किया जाएगा।

  

6) कोई लोक प्राधिकारी, उपधारा (1)  में विनिर्दिष्ट छूटों में किसी बात के होते हुए भी, सूचना तक पहुंच को अनुज्ञात कर सकेगा, यदि सूचना के प्रकटन में लोक हित, लोक प्राधिकारी को नुकसान से अधिक है।

7)   उपधारा (1)  के खण्ड (क)  या खण्ड (झ) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी घटना, वृत्तांत या विषय से संबंधित कोई सूचना जो उस तारीख से जिसको धारा 6 के अधीन कोई अनुरोध किया जाता है, 20 वर्ष पूर्व हुई है या होती है, उस धारा के अधीन अनुरोध करने वाले व्यक्ति को उपलब्ध कराई जाएगीः

परंतु यह कि जहां उस तारीख से जिसको 20 वर्ष की उपलब्धि को संगणित किया जाना है,

    उदभुत कोई प्रश्न उत्पन्न होता है, वहां केन्द्रीय सरकार का विनिश्चय अन्तिम होगा।


प्रश्न - सूचना का अधिकार अधिनियम  २००५ के अनूसार क्या आंशिक प्रकटीकरण स्वीकृत किया जा सकता है?

 उत्तर: यदि प्रकटीकरण की छूट से सम्बन्धित सूचना होने के आधार पर सूचना की पहुँच हेतु दिया गया आवेदन अस्वीकार कर दिया गया है तो अभिलेख के उस भाग तक पहुँच उपलब्ध कराई जा सकती है।

(क)  जिसमें प्रकटीकरण से छूट से सम्बन्धित सूचना नहीं है; और

(ख) जिसे प्रकटीकरण से छूट सम्बधी भाग से युक्तियुक्त रूप से अलग किया जा सकता है।

  लोक सूचना अधिकारी आंशिक सूचना उपलब्ध कराने की स्वीकृति की स्थिति में आवेदक को निम्न प्रकार से सूचित करते हुए नोटिस देगा:-

(क)  वांछित अभिलेख का केवल वही अंश उपलब्ध कराया जा रहा है जो सूचना प्रकटीकरण से छूट सम्बन्धी अभिलेख से अलग किया जा सका है; उसका संदर्भ देते हुए तथ्यों के महत्त्वपूर्ण प्रश्नों पर निष्कर्ष;

(ख) निर्णय के कारण एवं जिस सामग्री के आधार पर निचोड निकाला गया है, उसका संदर्भ देते हुए तथ्यों के महत्त्वपूर्ण प्रश्नों पर निष्कर्ष;

(ग)  निर्णयकर्ता अधिकारी का नाम एवं पदनाम;

(घ) गणना किए गए शुल्क का विवरण एवं आवेदक द्वारा चुकाई जाने वाली शुल्क राशि; और

(ड) आंशिक सूचना के प्रकटीकरण न करने के निर्णय, शुल्क राशि, सूचना के पहुँच के प्रकार के पुर्नविलोकन सम्बन्धी अधिकार एवं अपने से वरिष्ठ अधिकारी अथवा सूचना आयोग, जैसी भी स्थिति हो, समयावधि, प्रक्रिया एवं सूचना की पहुँच का अन्य प्रकार का विवरण।


प्रश्न - सूचना का अधिकार अधिनियम  २००५ के अनूसार क्या सभी विभाग सूचनाएं देने के लिए आबद्ध हैं?

उत्तर: अधिनियम की द्वितीय सूची में वर्णित केन्द्रीय सरकार के आसूचना या गुप्तचर और सुरक्षा से सम्बधिंत निम्न 18  संगठनों या उनके द्वारा सरकार को उपलब्ध कराई गई सूचना इस अधिनियम की सीमा से बाहर है:-

1. आसूचना ब्यूरो।

2. मंत्रिमंडल सचिवालय के अनुसंधान और विश्लेषण खंड।

3. राजस्व असूचना निदेशालय।

4. केन्द्रीय आर्थिक असूचना ब्यूरो।

5. प्रवर्तन निदेशालय।

6. स्वापक नियंत्रण ब्यूरो।

7. वैमानिक अनुसंधान केन्द्र।

8. विशेष सीमान्त बल।

9. सीमा सुरक्षा बल।

10. केन्द्रीय आरक्षित पुलिस बल।

11. भारत तिब्बत सीमा बल।

12. केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल।

13. राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड।

14. असम राइफल।

15. 1[15 शस्त्र सीमा बल।]

16. विशेष शाखा सीआईडी अंडमान और निकोबार।

17. अपराध शाखा सीआईडी-सीबी, दादरा और नागर हवेली।

18. विशेष शाखा लक्षद्वीव पुलिस।

19. 2[ 19. विशेष संरक्षण समूह]

20. प्रतिरक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन।

21. सीमा सडक विकास मण्डल।

22. वित्तीय गुप्तचर इकाई, भारत।



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