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सर्वोच्च न्यायालय सम्मेलन 2025 : राज्य न्यायपालिका सुधारों की नई दिशा _अधिवक्ता सत्येन्द्र प्रकाश सूर्यवंशी


 तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना के नेतृत्व में 1 फरवरी 2025 को सर्वोच्च न्यायालय में आयोजित “राज्य न्यायपालिका मुद्दों समाधान राष्ट्रीय सम्मेलन” ने जिला अदालतों की चुनौतियों—लंबित मामलों, रिक्तियों व भ्रष्टाचार—पर केंद्रित चार सत्रों के माध्यम से सुधारों का खाका तैयार किया गया था । जिला न्यायाधीशों व उच्च न्यायालय प्रमुखों की उपस्थिति में चर्चा हुई थी । मुख्यतः संस्थानों और मामलों के निपटान के बीच की खाई को कम करने के तरीके; न्यायिक कार्यों में आने वाले मामलों की पहचान; मामलों के निपटान में बाधाओं की पहचान; विभिन्न स्तरों पर लंबित मामलों को कम करने की रणनीति पर वृहद् चर्चा हुई । इस सम्मेलन ने न्यायपालिका के सभी हितधारकों को एक साथ आने और राज्य न्यायपालिका के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने के लिए सार्थक बातचीत में शामिल होने का एक अमूल्य अवसर प्रदान किया था ।

उस सम्मलेन में चर्चा के निम्न बिंदु थे :-

सत्र 1: लंबित मामलों घटाने हेतु बाधाओं की पहचान व रणनीतियां (अध्यक्ष: जस्टिस खन्ना)।

सत्र 2: केस वर्गीकरण एकरूपता व ई-कोर्ट प्रौद्योगिकी (अध्यक्ष: जस्टिस गवई)।

सत्र 3: समयबद्ध भर्ती, पारदर्शी स्थानांतरण, IT कैडर व पदोन्नति निष्पक्षता (अध्यक्ष: जस्टिस सूर्यकांत)।

सत्र 4: प्रदर्शन मूल्यांकन, प्रशिक्षण पाठ्यक्रम व जवाबदेही (अध्यक्ष: जस्टिस खन्ना)।

उक्त सम्मलेन का विषयवस्तु, आज न्यायधानी में चर्चा का विषय क्यों बनना चाहिए ?

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (बिलासपुर) में अधिवक्ताओं का राजनीतिक दलों पर लगातार प्रभाव चैंबर आवंटन की पारदर्शिता कमी से जुड़कर लंबित मामलों (2025 में कुछ कमी आई) को बढ़ावा दे रहा है। साथ ही राजनीतिक गुटों का दबाव तंत्र , नए वकीलों को हाशिए पर धकेलते हैं। राजनितिक दलों के समर्थक वकील, चैंबर कमेटी प्रभावित कर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप भी लगते रहें है पारदर्शी आवंटन न होने से युवा/पहली पीढ़ी अधिवक्ता चैंबरहीन रहकर प्रैक्टिस प्रभावित, क्लाइंट खोते हैं। इन घटकों से भी लंबित प्रकरण में स्वाभाविक इजाफा देखने मिलता है

यह भी ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में साल 2025 के दौरान लंबे समय से चल रहे मामलों की संख्या में उल्लेखनीय  कमी आई है। अदालत ने मामलों का जल्दी फैसला करने पर जोर दिया, जिससे लोगों को समय पर न्याय मिलना बताया जा रहा है । कम से कम सुनने में यह आम जनता के लिए एक बड़ी राहत प्रदान करती है।मुख्य न्यायाधीश श्री न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा जी के नेतृत्व में हाईकोर्ट ने यह तय किया कि पुराने मामलों को पहले निपटाया जाए, ताकि लोगों को सालों तक अदालत के चक्कर न लगाने पड़ें। इसके लिए लगातार निगरानी की गई और न्याय से जुड़े सभी लोगों ने मिलकर काम किया है । 




जानकारी के अनुसार, 1 जनवरी 2025 को हाईकोर्ट में 84,305 मामले लंबित थे। साल भर में 55,416 नए मामले दर्ज हुए, जबकि 64,054 मामलों का निपटारा कर दिया गया। इससे साल के अंत तक लंबित मामलों में 8,638 की कमी आई, यानी करीब 10 प्रतिशत से ज्यादा मामले कम हो गए। वहीँ उपरोक्त तालिका में आज दिनांक 14 फरवरी 2026 के ताजा आंकडें दिख रहे होंगे, कोर्ट परिसर में और ऑफिसियल वेबसाइट में भी हर घंटे का अपडेट जस्टिस क्लॉक में देखने मिलता है I व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर मै यह कह सकता हूँ कि लंबित मामलों के संदर्भ में यह उपलब्धि मुख्य न्यायाधीश, न्यायाधीशों, न्यायिक अधिकारियों और कर्मचारियों की मेहनत का साझा नतीजा है। इसका सीधा फायदा आम लोगों को मिल रहा है, क्योंकि अब मामलों का फैसला पहले से जल्दी हो रहा है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय आगे भी लंबित मामलों को कम करने, न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने और लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास करता रहा है I उक्त सम्मलेन राज्य न्यायपालिका सुधारों की दिशा में मिल का पत्थर साबित हो सकता है I  

साभार : कार्यपालिका एवं न्यायपालिका की ऑफिसियल वेबसाइट

अधिवक्ता सत्येन्द्र गुड्डा भईया बिरकोना वाले मो० 9630228563


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