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विधि और विधायी कार्य विभाग, छत्तीसगढ़ शासन


 

छत्तीसगढ़ शासन, विधि और विधायी कार्य विभाग

वर्तमान में विभाग के भारसाधक मंत्री तथा अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों की शक्तियां एवं कर्तव्य

  1. विधि मंत्री
  2. प्रमुख सचिव तथा विधि परामर्शी
  3. अतिरिक्त सचिव तथा अतिरिक्त विधि परामर्शी
  4. उप सचिव तथा उप विधि परामर्शी
  5. अवर सचिव तथा सहायक विधि परामर्शी
  6. अनुभाग अधिकारी
  7. सहायक विभिन्न श्रेणी

अधिकारियों की शक्तियां एवं कर्तव्य निम्नानुसार है:-

विधि मंत्री: विधि और विधायी कार्य विभाग के प्रमुख विधि मंत्री होते हैं। विधि परामर्शी एवं विधि विशेषज्ञ के रूप में किये जाने वाले कार्य के सिवाय सभी प्रशासकीय निर्णय विधि मंत्री द्वारा लिये जाते हैं। शासकीय अभिभाषक की नियुक्ति, नोटरी की नियुक्ति एवं उनके कार्यकाल का नवीनीकरण, आपराधिक प्रकरण की वापसी, दया याचिका, विभागीय संरचना, विभागीय बजट, विधानसभा संबंधी कार्य, न्यायालयों की स्थापना के कार्य में प्रशासकीय निर्णय विधि मंत्री द्वारा लिये जाते हैं ।

प्रमुख सचिव: प्रमुख सचिव विभाग के विभागाध्यक्ष एवं शासन के विधि परामर्शी तथा पदेन महाप्रशासक आॅफिशियल ट्रस्टी एवं प्रोक्टर होते हैं। विभाग का विभागीय नियंत्रण प्रमुख सचिव के पास होता है। विधि विभाग विधि संबंधी विशेषज्ञ विभाग में एवं राज्य के विभिन्न विधि संबंधी पहलुओं का निराकरण प्रमुख सचिव स्तर पर किया जाता है। राज्य शासन के एवं केन्द्र शासन के कुछ विभागों को विधि संबंधी परामर्श देते हैं। कार्यपालिका के अन्य विभागों के ड्राफ्टिंग, एग्रीमेंट एवं अन्य दस्तावेजों के संबंध में परामर्श देते हैं। शासन के सिविल एवं दांडिक प्रकरण जिसमें शासन पक्षकार हैं, उसके सुचारू रूप से संचालन का देखरेख करते है। सिविल प्रकरण में कोर्ट आॅफ अवाडर््स से संबंधित हो तो उस संबंध में परामर्श देते हैं ।

प्रमुख कार्य निम्नानुसार है:

  1. केन्द्र एवं अन्य राज्य सरकारों से पत्र व्यवहार के महत्वपूर्ण मामलें।
  2. सभी प्रकरण जिनमें महाधिवक्ता की राय ली जाना ।
  3. सभी प्रकरण जिनमें मंत्री/मुख्यमंत्री जी के आदेश आवश्यक हो ।
  4. राज्यपाल/कुलाधिपति/मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव से प्राप्त मत के प्रकरण ।
  5. संवैधानिक निर्देश ।
  6. विधानसभा के संबंध में मत हेतु प्राप्त सभी प्रकरण ।
  7. विधिक विलेखों के परीक्षण तथा प्रारुपण संबंधी महत्वपूर्ण प्रकरण ।
  8. ऐसे महत्वपूर्ण प्रकरण जो संबंधित अतिरिक्त सचिवों द्वारा प्राथमिकता से अथवा जिसे प्रस्तुत किये जाने की अपेक्षा प्रमुख सचिव करें ।
  9. स्थापना शाखा के महत्वपूर्ण प्रकरण जो अतिरिक्त सचिव द्वारा अंकित किए जावे ।
  10. न्यायिक शाखा-1 एवं 2 के महत्वपूर्ण प्रकरण ।
  11. विभाग का कोई भी प्रकरण जिसका प्रमुख सचिव स्वयं परीक्षण करना चाहें ।
  12. विभाग के समस्त अधिकारियों/कर्मचारियों के कार्य का निरीक्षण ।
  13. विधि विभाग से संबंधित अन्य कार्य जो अन्य किसी को आबंटित न हो ।
  14. प्रारुपण, विधीक्षा तथा अनुवाद शाखा से संबंधित समस्त कार्य ।
  15. सभी विभागों से प्राप्त मत के प्रकरण ।
  16. पुस्तकालय संबंधी समस्त कार्य ।

अतिरिक्त सचिव: अतिरिक्त सचिव राज्य शासन के विधि विभाग के पदेन अपर सचिव होते हैं जो प्रमुख सचिव विधि परामर्शी को सहायता करते हैं। सिविल प्रकरण जो शासन से संबंधित है, उससे संबंधित सभी प्रकरणों का निराकरण करते हैं ।

प्रमुख कार्य निम्नानुसार हैं:

  1. बजट
  2. अभियोजन स्वीकृति के प्रकरण ।
  3. दाण्डिक एवं व्यवहार अपील एवं पुनरीक्षण एवं इनसे संबंधित अभिमत एवं आपराधिक शाखा का समस्त कार्य ।
  4. विधानसभा संबंधी कार्य ।
  5. अधिकारी/कर्मचारी के मोटर/स्कूटर, भवन निर्माण आदि तथा 50 हजार रुपये से नीचे भविष्य निधि के अग्रिम ।
  6. ग्राम न्यायालय ।
  7. बंदियों से संबंधित दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 432 तथा संविधान के अनुच्छेद 161 के अंतर्गत दया याचिका तथा 14 वर्षीय बंदियों के नियम प्रकरण से संबंधित कार्य ।
  8. फास्ट ट्रेक कोर्ट संबंधी समस्त कार्य ।
  9. अभियोजन वापसी प्रकरण ।
  10. सिविल शाखा का समस्त कार्य ।
  11. उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय तथा सभी अधिकरणों हेतु प्रतिरक्षण आदेश।
  12. निर्वाचन शाखा का कार्य ।
  13. क्रिश्चियन मैरिज लाइसेंस ।
  14. विधि विभाग द्वारा प्रशासित अधिनियम एवं नियम ।
  15. वित्त आयोग ।
  16. शासकीय योजना ।
  17. याचिकाएं संबंधी कार्य ।
  18. केन्द्र एवं राज्य सरकारों से पत्र व्यवहार ।
  19. महाधिवक्ता की राय संबंधी प्रकरण ।
  20. मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव से संबंधित माॅनिटिरिंग व संबंधित समस्त कार्य ।
  21. विधायी समिति एवं मंत्रणा मंडल संबंधी कार्य
  22. सचिव, विधि द्वारा समय-समय पर सौपे गये अन्य कार्य ।
  23. विभाग के समस्त रुपये 15,000/- तक के देयक के भुगतान संबंधी स्वीकृति ।
  24. राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव से प्राप्त पत्राचार के प्रकरण ।
  25. शिकायत ।
  26. महाधिवक्ता फीस एवं महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारियों की नियुक्ति संबंधी एवं उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ताओं की नियुक्ति संबंधी समस्त कार्य ।
  27. अवमानना प्रकरण ।
  28. गबन के प्रकरण ।
  29. उच्च न्यायालय एवं अधीनस्थ न्यायालयों की स्थापना से संबंधित समस्त कार्य ।
  30. न्यायाधीशों के लिए आवास एवं भवनो का निर्माण संबंधी कार्य ।
  31. उच्च न्यायालय एवं अधीनस्थ न्यायालयों के अधिकारियों/कर्मचारियों से संबंधित प्रकरण ।
  32. विशेष न्यायालयों का गठन ।
  33. विधिक सेवा प्राधिकरण का कार्य ।
  34. हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का कार्य ।
  35. माध्यस्थम अधिकरण का कार्य ।
  36. पुस्तकालय संबंधी कार्य ।
  37. निर्वाचन ।
  38. विधि आयोग एवं अन्य आयोग का समस्त कार्य ।
  39. आरोप पत्र एवं अभिकथन का परीक्षण
  40. नोटरी एवं लोक अभियोजक/अतिरिक्त लोक अभियोजक/विशेष लोक अभियोजक एवं पैनल लायर्स संबंधी कार्य ।
  41. द्वितीय श्रेणी अधिकारियों एवं इससे उपर के अधिकारियों के अवकाश स्वीकृति प्रकरण एवं स्थापना से संबंधित महत्वपूर्ण कार्य एवं महाधिवक्ता स्थापना का कार्य।
  42. विधि विभाग से संबंधित अन्य कार्य जो अन्य किसी को आवंटित न हो ।
  43. प्रमुख सचिव/सचिव विधि महोदय की अनुपस्थिति में सभी आवश्यक कार्य।

उप सचिव के प्रमुख कार्य निम्नानुसार हैं:

  1. विधेयक एवं अध्यादेश जैसे संबंधित ड्राफ्टिंग, नियम, उपनियम, अधिसूचना का जांच परिमार्जन आदि उनके द्वारा किया जाता है और उससे संबंधित सभी मामलों का निराकरण किया जाता है एवं प्रमुख सचिव के कार्य में सहायता करते हैं ।
  2. विधि विभाग स्थापना संबंधी समस्त कार्य ।
  3. प्रतिरक्षण संबंधी कार्यवाही ।
  4. राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मुख्यसचिव से प्राप्त पत्राचार एवं मत के प्रकरण ।
  5. सभी प्रकार की याचिकाएं संबंधी कार्य ।
  6. विधि विभाग द्वारा प्रशासित अधिनियम एवं नियम।
  7. नोटरी एवं लोक अभियोजक/अतिरिक्त लोक अभियोजक/विशेष लोक अभियोजक एवं पेनल लायर्स संबंधी कार्य ।
  8. विधानसभा प्रश्न तथा उससे संबंधित कार्य ।
  9. शिकायत ।
  10. मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव से प्राप्त पत्र एवं निर्देश तथा माॅनिटरिंग संबंधी कार्य ।
  11. क्रिश्चियन मैरिज लाइसेंस ।
  12. महाधिवक्ता फीस एवं महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारियों की नियुक्ति संबंधी एवं उच्चतम न्यायालय के अधिवक्ताओं की नियुक्ति संबंधी समस्त कार्य ।
  13. अवमानना प्रकरण।
  14. गबन के प्रकरण।
  15. सिविल शाखा का समस्त कार्य ।
  16. तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के अवकाश स्वीकृति संबंधी कार्य।
  17. विधायी से संबंधित समस्त कार्य ।
  18. विधि विभाग से संबंधित अन्य कार्य जो अन्य किसी को आवंटित न हो।
  19. सचिव एवं अतिरिक्त सचिव, विधि द्वारा समय-समय पर सौंपे गये अन्य कार्य।
  20. उच्च न्यायालय एवं अधीनस्थ न्यायालयों से संबंधित समस्त कार्य ।
  21. न्यायाधीशों के लिए आवास एवं न्यायालय भवनों का निर्माण ।
  22. उच्च न्यायालय एवं अधीनस्थ न्यायालयों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से संबंधित प्रकरण।
  23. विशेष न्यायालयों का गठन ।
  24. वित्त आयोग ।
  25. शासकीय योजना ।
  26. मत शाखा का समस्त कार्य ।
  27. बजट संबंधी समस्त कार्य ।
  28. ग्राम न्यायालय का समस्त कार्य ।
  29. विधिक सेवा प्राधिकरण
  30. हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का कार्य ।
  31. माध्यस्थम अधिकरण का कार्य ।
  32. बंदियों से संबंधित दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 432 तथा संविधान के अनुच्छेद 161 के अंतर्गत दया याचिका तथा 14 वर्षीय बंदियों के नियम प्रकरण ।
  33. प्रकरण वापसी से संबंधित समस्त कार्य ।
  34. फास्ट ट्रेक कोर्ट का समस्त कार्य ।
  35. मंत्रणा मंडल से संबंधित समस्त कार्य ।
  36. स्टेट बार कौंसिल से संबंधित समस्त कार्य ।
  37. प्रमुख सचिव एवं अतिरिक्त सचिव, विधि द्वारा समय-समय पर सौंपे गये अन्य कार्य ।
  38. विधि आयोग ।
  39. प्रारुपण शाखा का समस्त कार्य
  40. अनुवाद ।
  41. विधीक्षा से संबंधित समस्त कार्य ।
  42. कोडीफिकेशन, कन्वेसिंग
  43. पुस्तकालय संबंधी कार्य ।
  44. आपराधिक पुर्नरीक्षण प्रकरण तथा अपील
  45. दाण्डिक तथा इनसे संबंधित अभिमत
  46. निर्वाचन ।
  47. आरोप पत्र एवं अभिकथन का परीक्षण
  48. अन्य आयोगों का कार्य ।
  49. शासकीय आयोग ।
  50. अभियोजन शाखा से संबंधित समस्त कार्य ।
  51. प्रमुख सचिव एवं अतिरिक्त सचिव,विधि द्वारा समय-समय पर सौंपे गये अन्य कार्य ।

अवर सचिव के कार्य निम्नानुसार हैं:

  1. अवर सचिव उप सचिव के कार्य में सहायता करेंगे साथ ही साथ कर्मचारियों की व्यवस्था एवं अनुशासन तथा उन पर नियंत्रण रखना और उनके कामकाज को ठीक ढंग से चलाये जाने के लिए जिम्मेदार होंगे ।
  2. प्रमुख सचिव के आदेश से अनुभाग अधिकारी तथा लिपिक वर्ग के कर्मचारियों की जिसमें निजी सहायक और शीघ्रलेखक भी शामिल है, भर्ती, चरित्र संबंधी जांच-पड़ताल, नियुक्ति, तबादला, पदोन्नति, पदावनति तथा प्रतिनियुक्ति से संबंधित सभी मामलों पर कार्यवाही करेंगे ।
  3. सचिवालयीन कर्मचारियों के पदक्रम सूची तैयार कर प्रसारित करना ।
  4. पदों के निर्माण तथा समाप्ति, वेतन निर्धारित उससे संबंधित विषय, वेतन बढ़ाने की मंजूरी के संबंध में कार्यवाही करना ।
  5. लिपिक वर्ग के कर्मचारियों की छुट्टी संबंधी आवेदन पत्र पर कार्यवाही करना।
  6. सभी शाखाओं में उपस्थिति की जांच करना और हमेशा देरी से आने वाले कर्मचारियों के मामले में ध्यान दिलाना ।
  7. सेवा पुस्तिका, छुट्टी का हिसाब रखना, सेवा पुस्तिका में लिखी हुई बातों को प्रमाणित करना, सेवा विवरणों का जांच करना उन्हें सही प्रमाणित करना ।
  8. सजाओं, अभ्यावेदनों, अपीलों और स्मरण पत्रों के संबंध में कार्यवाही करना।
  9. लिपिक वर्ग के कर्मचारियों के चरित्र तथा अल्पकालिक पंजियों को अपने कब्जे में रखना और इस बात का ध्यान में रखना कि अवर सचिवों को प्रत्येक वर्ष के नियत दिनांक को और किसी सचिव/उपसचिव/अवर सचिव के छुट्टियां तबादले पर जाते समय प्राप्त आवेदनों को समय पर भी प्रस्तुत किया जाना ।
  10. ऐसे लिपिक के संबंध में ध्यान आकर्षित करना जो कर्जदार या दिवालिया हो या जिन्होंने दूसरों के लिए जमानत दी हो और किसी लिपिक को स्थायी सेवा में लिये जाने के पहले यह समाधान कर लें कि वह कर्मचारी कर्जदार तो नहीं है ।
  11. सामान्यतः कार्यालय के संबंध में जारी किये गये सभी आदेश की स्थायी आदेश पत्रक के रूप में रखना ।
  12. सामान्य भविष्य निधि, सवारी, सायकिल तथा मकान बनाने के लिए रूपये एवं सामान्य भविष्य निधि से अंतिम रूप से रूपये निकालने से संबंधित आवेदन पत्र पर कार्यवाही करना ।
  13. लिपिक वर्ग के कर्मचारियों से संबंधित पेंशन और गेच्युटी के मामले पर कार्यवाही करना ।
  14. कार्यालय के लेखन सामग्री, फर्नीचर और फार्म, मांग पत्र तैयार करने की व्यवस्था करना और जो लेखन सामग्री प्राप्त हो उसको लेना और उसकी जांच करना ।
  15. प्रतिदिन आने वाले डाक को लेना और उसे शाखाओं में शीघ्र बंटवाना । विधानसभा सत्र की अवधि में प्रतिदिन विधानसभा के डाक लेना और शीघ्र बंटवाने की व्यवस्था करना ।
  16. सचिवालय के चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों को वर्दी देना ।
  17. टाइप राइटर के कामकाज की भलीभांति देखरेख करना। समय-समय पर उन्हें सुधरवाना ।
  18. महालेखापाल का वार्षिक स्थापना विवरण भेजना एवं अन्य कर्तव्यों का पालन करना जो समय-समय पर उच्च अधिकारियों द्वारा सौंपी जाये ।

अनुभाग अधिकारियों की शक्तियां एवं कर्तव्य:

  1. अनुभाग में नियंत्रण और अनुशासन बनाए रखना, कार्यालय में देर से आने वाले कर्मचारियों का उपस्थिति रजिस्टर में रिकार्ड रखना तथा रिपोर्ट करना ।
  2. शासकीय नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार प्रकरणों को प्रस्तुत करवाना ।
  3. कार्यालयीन समय में कक्ष से अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों पर नजर रखना और रिपोर्ट करना ।
  4. कक्ष के किसी कर्मचारी के छुट्टी पर जाने पर उसके टेबिल के कार्य की व्यवस्था करवाना ।
  5. कक्ष के कर्मचारियों के कार्यभार में सद्भाव से तालमेल बनाए रखना ।
  6. तत्काल और समय-सीमा के प्रकरण तुरन्त प्रस्तुत कराना, उन्हें देखना चाहिए कि निपटारे के किसी भी स्टेज पर ऐसे प्रकरणों में देर न हो । प्रकरण प्रस्तुत होने के बाद उसकी वापसी का इंतजार करना चाहिए और यदि कक्ष से वह नस्ती वापस नहीं आती है तो अवर सचिव के ध्यान में लाना चाहिए । ऐसे प्रकरण स्वयं ले जाकर प्रस्तुत करना चाहिए ।
  7. विचाराधीन पत्र पर जो कार्यवाही होना है, उस कार्यवाही के लिए सुझाव देना ।
  8. जटिल और महत्वपूर्ण विषयों पर टीप स्वयं प्रस्तुत करना ।
  9. निर्धारित साप्ताहिक या मासिक रिपोर्ट भेजना ।
  10. कार्यालय द्वारा तैयार की गई प्रथम टीप की जांच करना कि उसमें पूर्ण तथ्य दिए हैं या नहीं तथा उच्चाधिकारियों को अपनी टीका या सुझाव देना।
  11. कक्ष में प्राप्त डाक का वितरण करना ।
  12. प्रत्येक सप्ताह में आवक रजिस्टर का निरीक्षण करना और उसमें अपने हस्ताक्षर करना ।
  13. अन्य विभागों/कक्षों में भेजी गई नस्तियों और पत्रों के विषय में स्मरण पत्र भेजना।
  14. लंबित प्रकरणों की साप्ताहिक सूची बनवाकर प्रस्तुत करना ।
  15. सहायक की डायरी तथा पेंडिंग फाइल रजिस्टर की जांच करना ।
  16. रूटिन प्रकार के पत्र व्यवहार के प्रारूप अनुमोदित करने तथा स्वच्छ प्रतियों में हस्ताक्षर करना ।
  17. निपटाए और लंबित प्रकरणों के स्टेटमेन्ट भिजवाना ।
  18. यह देखना कि कोई विचाराधीन पत्र या प्रकरण बिना कार्यवाही किए हुए छूट न जावे ।
  19. यह देखना कि कोई प्रकरण विलंबित स्टेटमेंट में दर्शाने से तो नहीं छूट गया है।
  20. इन्स्पेक्शन रिपोर्ट पर कार्यवाही, त्रुटियों को पूरा करवाना ।
  21. रिकार्ड के विनष्टीकरण के आदेश देना ।
  22. तीन वर्ष से अधिक समय की अभिलेखिक नस्तियां अभिलेखागार में भिजवाना।
  23. जावक लिपिक के स्टेम्प रजिस्टर की जांच करना ।
  24. कक्ष में पदस्थ अधीनस्थ कर्मचारियों के आकस्मिक अवकाश, ऐच्छिक अवकाश स्वीकृत करना ।

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