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RTI MCQ SEC 21-26 : टीम अभिव्यक्ति

 प्रश्न-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 21 में विहीत किये गये अनूसार सदभावपूर्वक की गई कार्यवाही का संरक्षण  क्या है?

उत्तर-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 21 में विहीत किये गये अनूसार सदभावपूर्वक की गई कार्यवाही का संरक्षण  निम्नानुसार है-

धारा 21. सदभावपूर्वक की गई कार्यवाही का संरक्षण

  कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही किसी भी ऐसी बात के बारे में, जो इन अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियम के अधीन सदभावपूर्वक की गई हो या की जाने के लिए आशयित हो, किसी व्यक्ति के विरूद्ध न होगी।

टिप्पणी

 धारा 21 सदभावपूर्वक की गई कार्यवाहीयों के लिए संरक्षण प्रदान करती है। इसके अनुसार इस अधिनियम के अधीन किये गये सदभावपूर्वक कार्यों के लिए किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कोई वाद, अभियोजन या वैधानिक कार्यवाही संस्थित नहीं की जा सकेगी।

उद्देश्य-   इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य सूचना अधिकारियों को स्वतंत्रता, निष्पक्षता एवं भय रहित कार्य करने का अवसर प्रदान करना है।

लेकिन इस धारा का लाभ केवल तभी प्राप्त किया जा सकेगा जब कार्य सदभावपूर्वक किया जाये;

सदभावपूर्वक क्या है-  अधिनियम में शब्द सदभावपूर्वक’ को परिभाषित नहीं किया गया है। भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 52 में इसकी परिभाषा इस प्रकार की गई है – ‘कोई बात सदभावपूर्वक की गई या विश्वास की गई नहीं कही जाती है जो सम्यक सतर्कता और ध्यान के बिना की गई या विश्वास की गई हो।’

     इस परिभाषा के अनुसार ‘सदभावपूर्वक कार्य’ के लिए दो बातें आवश्यक है- सम्यक सतर्कता एवं ध्यान।

      यदि कोई कार्य असावधानी से किया जाता है तो उसे सदभावपूर्वक किया गया कार्य नहीं कहा जा सकता।


प्रश्न-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 21 कौनसी कार्यवाहियों के लिए संरक्षण प्रदान करती है?

 उत्तर-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 21  कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही किसी भी ऐसी बात के बारे में, जो इन अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियम के अधीन सदभावपूर्वक की गई हो या की जाने के लिए आशयित हो, किसी व्यक्ति के विरूद्ध न होगी।

सद् भावपूर्वक की गई कार्रवाही का संरक्षण हेतु टिप्पणी

धारा 21 सदभावपूर्वक की गई कार्यवाहीयों के लिए संरक्षण प्रदान करती है। इसके अनुसार इस अधिनियम के अधीन किये गये सदभावपूर्वक कार्यों के लिए किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कोई वाद, अभियोजन या वैधानिक कार्यवाही संस्थित नहीं की जा सकेगी।


प्रश्न-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 21 जो सदभावपूर्वक की गई कार्यवाही के संरक्षण के बारे मे है, इसका मुख्य उद्देश्य क्या है? और इस धारा का लाभ कब होगा?

उत्तर-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 21 जो सदभावपूर्वक की गई कार्यवाही के संरक्षण के बारे मे है, इसका मुख्य उद्देश्य सूचना अधिकारियों को स्वतंत्रता, निष्पक्षता एवं भय रहित कार्य करने का अवसर प्रदान करना है।

            लेकिन इस धारा का लाभ केवल तभी प्राप्त किया जा सकेगा जब कार्य सदभावपूर्वक किया जाये।


प्रश्न-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 21 जो सदभावपूर्वक की गई कार्यवाही के संरक्षण के बारे मे है,  उसमे विहित किये अनुसार  सदभावपूर्वक शब्द अधिनियम में परिभाषित किया है क्या? यदि हां तो उसकी परिभाषा क्या है? 

उत्तर-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 21 जो सदभावपूर्वक की गई कार्यवाही के संरक्षण के बारे मे है, उसमे विहित किये अनुसार  सदभावपूर्वक शब्द अधिनियम में

 शब्द सदभावपूर्वक’ को परिभाषित नहीं किया गया है। भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 52 में इसकी परिभाषा इस प्रकार की गई है – ‘कोई बात सदभावपूर्वक की गई या विश्वास की गई नहीं कही जाती है जो सम्यक सतर्कता और ध्यान के बिना की गई या विश्वास की गई हो।’

     इस परिभाषा के अनुसार ‘सदभावपूर्वक कार्य’ के लिए दो बातें आवश्यक है- सम्यक सतर्कता एवं ध्यान।

      यदि कोई कार्य असावधानी से किया जाता है तो उसे सदभावपूर्वक किया गया कार्य नहीं कहा जा सकता।


प्रश्न-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 22 में “विहीत ” किये गये अनुसार अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव कब होगा?

उत्तर- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 22 में विहीत किये गये अनुसार अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव निम्नानुसार होगा- 

धारा 22. अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव होना-

      इस अधिनियम के उपबन्धों का, शासकीय गुप्त बात, अधिनियम 1923 (1923 का 19) और तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में या इस अधिनियम से अन्यथा किसी विधि के आधार पर प्रभाव रखने वाली किसी लिखत में असंगत किसी बात के होते हुए भी, प्रभाव होगा।

टिप्पणी

धारा 22 इस अधिनियम के अध्यारोही प्रभाव का उल्लेखित करती है।


प्रश्न--सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 23 में विहीत  किये गये अनुसार न्यायालयों की अधिकारिता का वर्जन की प्रक्रिया क्या है? 

उत्तर- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 23 में विहीत  किये गये अनुसार न्यायालयों की

अधिकारिता का वर्जन निम्नानुसार है-

धारा 23. न्यायालयों की अधिकारिता का वर्जन-

कोई न्यायालय, इस अधिनियम अधीन किए गए किसी आदेश की बाबत कोई वाद, आवेदन या अन्य कार्यवाही ग्रहण नहीं करेगा और ऐसे किसी आदेश को, इस अधिनियम के अधीन अपील से भिन्न किसी रूप में प्रश्नगत नहीं किया जाएगा।

न्यायालयों की अधिकारिता का वर्जन हेतु टिप्पणी

धारा 23 न्यायालय की अधिकारिता का वर्जन करती है। इसके अनुसार कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के अधीन पारित किसी आदेश के विरुद्ध कोई भी वाद, आवेदन या कार्यवाही ग्रहण नहीं कर सकेगा। केवल स अधिनियम के अधीन की जाने वाली अपील में ही उसे प्रश्नगत किया जा सकेगा।


प्रश्न-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 24 में विहीत  किये गये अनुसार अधिनियम का कतिपय संगठनो को लागू न होना कब होता है? इसकी प्रक्रिया क्या है?

उत्तर- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 24 अधिनियम का कतिपय संगठनो को लागू न होना निम्नानुसार-

धारा 24. अधिनियम का कतिपय संगठनो को लागू न होना -

 (1) इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट कोई बात, केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित आसूचना और सुरक्षा संगठनों को, जो दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट है या ऐसे संगठनों द्वारा उस सरकार कोप्रस्तुत की गई किसी सूचना को लागू नहीं होगी:

        परंतु भ्रष्टाचार और मानव अधिकारों के अतिक्रमण के अभिकथनों से संबंधित सूचना इस उपधारा से अपवर्जित नहीं होगी:

 परंतु यह और कि मानव अधिकारों के अतिक्रमण के आरोपों के मामले में माँगी गई जानकारी केवल सम्बधित सूचना आयुकत के अनुमोदन से ही दी जाएगी और धारा 7 में किसी बात के होते हुए भी, ऐसी जानकारी अनुरोध की प्राप्ति के पैंतालिस दिनों के भीतर प्रदत्त की जाएगी।

(2)  केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में किसी अधिसूचना द्वारा अनुसूची का, उस सरकार द्वारा स्थापित किसी अन्य आसूचना या सुरक्षा संगठन को उसमें सम्मिलित करके या उसमें पहले से विनिर्दिष्ट किसी संगठन का उससे लोप करके, संशोधन कर सकेगी और ऐसी अधिसूचना के प्रकाशन पर ऐसे संगठन को अनुसूची मे॔, यथास्थिति, सम्मिलित किया गया या उससे लोप किया गया समझा जाएगा।

(3)  उपधारा (2) के अधीन जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी।

(4)  इस अधिनियम की कोई बात ऐसे आसूचना और सुरक्षा संगठनों को लागू नहीं होगी, जो समय- समय पर राज्य सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाए;

 परंतु भ्रष्टाचार के अभिकथनों से सम्बधित सूचना इस धारा के अधीन अपवर्जित नहीं की जाएगी:

  परंतु यह और कि मानव अधिकारों के अतिक्रमण के आरोपों के मामले में माँगी गई जानकारी केवल सम्बधित सूचना आयुक्त के अनुमोदन से ही दी जाएगी और धारा 7 में किसी बात के होते हुए भी, ऐसी जानकारी अनुरोध की प्राप्ति के पैंतालीस दिनों के भीतर प्रदत्त की जाएगी।

(5) उपधारा (4) के अधिन जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना राज्य विधान मण्डल के समक्ष रखी जाएगी।


टिप्पणी

 धारा 24 के अनुसार इस अधिनियम के उपबंध केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित ऐसे आसूचना एवं सुरक्षा संगठनों को लागू नहीं होंगे जो दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट है।

 लेकिन भ्रष्टाचार एवं मानव अधिकारों के अतिक्रमण के अभिकथनों से संबंधित सूचनाएं इसका अपवाद होगी। ऐसी सूचनाएं 45 दिनों में उपलब्ध करानी होगी।

   यह अनुसूची परिवर्तन एवं संशोधन योग्य होगी। केन्द्रीय सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचना जारी कर इसमें संशोधन किया जा सकेगा। ऐसी अधिसूचना, यथास्थिति, संसद अथवा राज्य विधानमण्डल के समक्ष रखी जाऐगी।


प्रश्न-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 24 (1) के अधीन इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट कोई बात, केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित कौनसे  आसूचना एंव सुरक्षा संगठनों को लागू नहीं होंगे?

उत्तर- (1) सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 24 (1) के अधीन इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट कोई बात, केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित आसूचना और सुरक्षा संगठनों को, जो दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट है या ऐसे संगठनों द्वारा उस सरकार को प्रस्तुत की गई किसी सूचना को लागू नहीं होगी:

परंतु भ्रष्टाचार और मानव अधिकारों के अतिक्रमण के अभिकथनों से संबंधित सूचना इस उपधारा से अपवर्जित नहीं होगी।

टिप्पणी-

धारा 24 के अनुसार इस अधिनियम के उपबंध केन्द्रीय सरकार द्वारा स्थापित ऐसे आसूचना एवं सुरक्षा संगठनों को लागू नहीं होंगे जो दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट है।


लेकिन भ्रष्टाचार एवं मानव अधिकारों के अतिक्रमण के अभिकथनों से संबंधित सूचनाएं इसका अपवाद होगी। ऐसी सूचनाएं 45 दिनों में उपलब्ध करानी होगी।


प्रश्न-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 24 (1) में विहित किये अनुसार मानव अधिकारों के अतिक्रमण के आरोपों के मामले में माँगी गई जानकारी  किसके अनुमोदन से ही दी जाएगी? और धारा 7 में किसी बात के होते हुए भी, ऐसी जानकारी अनुरोध की प्राप्ति के कितने दिनों के भीतर प्रदत्त की जाएगी?

उत्तर-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 24 (1) में विहित किये अनुसार मानव अधिकारों के अतिक्रमण के आरोपों के मामले में माँगी गई जानकारी केवल सम्बधित सूचना आयुक्त के अनुमोदन से ही दी जाएगी और धारा 7 में किसी बात के होते हुए भी, ऐसी जानकारी अनुरोध की प्राप्ति के पैंतालीस दिनों के भीतर प्रदत्त की जाएगी।


प्रश्न-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 24 (2) के अधीन इस अधिनियम में राजपत्र में किसी अधिसूचना द्वारा अनुसूची का, उस सरकार द्वारा स्थापित किसी अन्य आसूचना या सुरक्षा संगठन को उसमें सम्मिलित करके या उसमें पहले से विनिर्दिष्ट किसी संगठन का उससे लोप करके, संशोधन कौन कर सकेगा? 

उत्तर- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 24 (2) के अधीन  केन्द्रीय सरकार, राजपत्र में किसी अधिसूचना द्वारा अनुसूची का, उस सरकार द्वारा स्थापित किसी अन्य आसूचना या सुरक्षा संगठन को उसमें सम्मिलित करके या उसमें पहले से विनिर्दिष्ट किसी संगठन का उससे लोप करके, संशोधन कर सकेगी और ऐसी अधिसूचना के प्रकाशन पर ऐसे संगठन को अनुसूची मे॔, यथास्थिति, सम्मिलित किया गया या उससे लोप किया गया समझा जाएगा।


प्रश्न-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 24 (3) में विहित किये अनुसार उपधारा (2) के अधीन जारी की गई प्रत्येक अधिसुचना, किसके समक्ष रखी जाएगी?

उत्तर-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 24 (3) में विहित किये अनुसार उपधारा (2)  के अधीन जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी।


प्रश्न- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 24 (4) में विहित किये अनुसार इस अधिनियम की कोई बात ऐसे आसूचना और सुरक्षा संगठनों को लागू नहीं होगी, जो समय- समय पर किसके  द्वारा राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट कि जाएगी?

उत्तर -सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 24 (4) में विहित किये अनुसार इस अधिनियम की कोई बात ऐसे आसूचना और सुरक्षा संगठनों को लागू नहीं होगी, जो समय- समय पर राज्य सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट किए जाए;

  परंतु भ्रष्टाचार के अभिकथनों से सम्बधित सूचना इस धारा के अधीन अपवर्जित नहीं की जाएगी:

परंतु यह और कि मानव अधिकारों के अतिक्रमण के आरोपों के मामले में माँगी गई जानकारी केवल सम्बधित सूचना आयुक्त के अनुमोदन से ही दी जाएगी और धारा 7 में किसी बात के होते हुए भी, ऐसी जानकारी अनुरोध की प्राप्ति के पैंतालीस दिनों के भीतर प्रदत्त की जाएगी।


प्रश्न-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 24 (5) में विहित किये अनुसार उपधारा (2) के अधीन जारी की गई प्रत्येक अधिसुचना, किसके समक्ष रखी जाएगी?

उत्तर-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 24 (5) में विहित किये अनुसार उपधारा (4)  के अधीन जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना, राज्य विधान – मण्डल के समक्ष रखी जाएगी।


प्रश्न- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 25 में विहित किये अनुसार अधिनियम  की निगरानी और रिपोर्ट की कार्य प्रक्रिया क्या है?

उत्तर-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 25  में विहित किये अनुसार अधिनियम  की निगरानी और रिपोर्ट  प्रक्रिया निम्नानुसार-

 धारा 25. निगरानी और रिपोर्ट करना

1. यथास्थिति केन्द्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग प्रत्येक वर्ष के अन्त के पश्चात यथासाध्यशीघ्रता से वर्ष के दौरान इस अधिनियम के कार्यान्वयन के संबंध में एक रिपोर्ट तैयार करेगा और उसकी एक प्रति समुचित सरकार को भेजेगा।

2. प्रत्येक मंत्रालय या विभाग, अपनी अधिकारिता के भीतर लोक प्राधिकरणों के सम्बध में, ऐसी सूचना एकत्रित करेगा और उसे यथास्थिति केन्द्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग को उपलब्ध कराएगा, जो इस धारा के अधीन रिपोर्ट तैयार करने के लिए अपेक्षित है और इस धारा के प्रयोजनों के लिए, उस सूचना को प्रस्तुत करने तथा अभिलेख रखने से सम्बधित अपेक्षाओं का पालन करेगा।

3. प्रत्येक रिपोर्ट में, उस सम्बध में कथन होगा, जिसमें रिपोर्ट निम्नलिखित से सम्बधित है-

(क) प्रत्येक लोक प्राधिकारी को किए गए अनुरोधों की संख्या:

(ख) ऐसे विनिश्चयों की संख्या, जहाँ आवेदक, अनुरोधों के अनुसरण में दस्तावेजों तक पहुँच के लिए पात्र नहीं थे, इस अधिनियम के वे उपबन्ध, जिनके अदीन ये विनिश्चय किए गए थे और ऐसे समयों की संख्या, जब ऐसे उपबन्धों का अवलंब लिया गया था;

(ग) पुनर्विलोकन के लिए यथास्थिति केन्द्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग को निर्दिष्ट की गई अपीलों की संख्या अपीलों के स्वरूप और अपीलों के निष्कर्ष;

(घ) इस अधिनियम के प्रशासन के सम्बध में किसी अधिकारी के विरूद्ध की गई अनुशासनिक कार्यवाही की विशिष्टीयाँ;

(ड)  इस अधिनियम के अधीन प्रत्येक लोक प्राधिकारी द्वारा एकत्रित की गई प्रभारों की रकम;

(च)  कोई ऐसे तथय, जो इस अधिनियम की भावना और आशय को ग्रहण कराने या कार्यान्वित करने के लिए लोक प्राधिकारीयों के प्रयास उपदर्शित करते है;

( छ)  सूधार के लिए सिफारशें, जिसके अंतर्गत इस अधिनियम या अन्य विधान या सामान्य विधि के विकास, अभिवृद्धि आधुनिकीकरण, सुधार या संशोधन के लिए विशिष्ट लोक प्राधिकारियों की बाबत सिफारशों या सूचना तक पहुंच के अधिकार को प्रवर्तनशील बनाने से सूसंगत कोई अन्य विषय भी है।


4. यथास्थिति, केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार प्रत्येक वर्ष के अंत के पश्चात, यथासाध्य, शीघ्रता से, उपधारा (1)  में निर्दिष्ट यथास्थिति, केन्द्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग की रिपोर्ट की एक प्रति संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष या जहाँ राजय विधान मंडल के दो सदन है वहां प्रत्येक सदन के समक्ष और जहां राज्य विधान-मंडल का एक सदन है वहां उस सदन के समक्ष रखवाएगी।

5. यदि आयोग को ऐसा प्रतीत होता है कि इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का प्रयोग करने के संबंध में किसी लोक प्राधिकारी की पद्धति इस अधिनियम के उपबंधों या भावना के अनुरूप नहीं है तो वह प्राधिकारी को ऐसे उपाय विनिर्दिष्ट करते हुए सिफारिश कर सकेगी, जो उसकी राय में ऐसी अनुरूपता को बढाने के लिए जाने चाहिए।

टिप्पणी

       धारा 25 निगरानी तथा रिपोर्ट तैयार करने के संबंध में है। इसके अनुसार केन्द्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग द्वारा, यथास्थिति, इस अधिनियम की क्रियान्विती के संबंध में प्रतिवर्ष एक रिपोर्ट तैयार की जायगी तथा उसकी एक प्रति समुचित सरकार को प्रेषित की जायेगी।

         ऐसी रिपोर्ट के लिए संबंधित मंत्रालय या विभाग द्वारा लोक प्राधिकरनों से सूचनायें एकत्रित की जायेगी और उन्हें केन्द्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग तक पहुँचाया जायेगा।

  रिपोर्ट में निम्नाकिंत बातों का उल्लेख किया जायेगा-

 (क) प्रत्येक लोक प्राधिकारी को किये गये अनुरोधों की संख्या;

(ख)  ऐसे अनुरोधों की संख्या जो वांछित सूचना तक पहुँच –योग्य नहीं पाये गये;

(ग) ऐसे अनुरोधों की संख्या जो वांछित सूचना तक पहुँच –योग्य नहीं पाये गये;

(घ) किसी अधिकारी के विरूद्ध शिकायत  बाबत की गई अनुशासनात्मक कार्यवाहीयाँ एवं उनकी विशिष्टियां;

(ड) एकत्रित प्रभारों की राशि;

(च) ऐसे तथ्य जो इस अधिनियम की भावना और आशय को ग्रहण कराने या कार्यान्वित करने के लिए लोक प्राधिकारियों के प्रयास उपदर्शित करते है; तथा

(छ) सुधार के सुझाव।

 ऐसी रिपोर्ट समुचित सरकार द्वारा, यथास्थिति, संसद अथवा राज्य विधान मण्डल के समक्ष रखी जायेगी।


प्रश्न- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 25 (1) में विहित किये अनुसार अधिनियम  की निगरानी और रिपोर्ट  तैयार करने का कार्य कौन करता है?

उत्तर-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 25 (1) में विहित किये अनुसार अधिनियम  की निगरानी और रिपोर्ट यथास्थिति केन्द्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग प्रत्येक वर्ष के अन्त के पश्चात यथासाध्यशीघ्रता से वर्ष के दौरान इस अधिनियम के कार्यान्वयन के संबंध में एक रिपोर्ट तैयार करेगा और उसकी एक प्रति समुचित सरकार को भेजेगा।

टिप्पणी-

  धारा 25 निगरानी तथा रिपोर्ट तैयार करने के संबंध में है। इसके अनुसार केन्द्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग द्वारा, यथास्थिति, इस अधिनियम की क्रियान्विती के संबंध में प्रतिवर्ष एक रिपोर्ट तैयार की जायगी तथा उसकी एक प्रति समुचित सरकार को प्रेषित की जायेगी।


प्रश्न -सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 25 (2) में विहित किये अनुसार अधिनियम  की निगरानी और रिपोर्ट तैयार करने के लिए अपनी अधिकारिता के भीतर लोक प्राधिकरणों के सम्बन्ध में, ऐसी सूचना एकत्रित कर उसे केन्द्रीय सूचना अयोग या राज्य सूचना आयोग को कौन उपलब्ध कराएगा? 

उत्तर- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 25 (2) में विहित किये अनुसार  प्रत्येक मंत्रालय या विभाग, अपनी अधिकारिता के भीतर लोक प्राधिकरणों के सम्बध में, ऐसी सूचना एकत्रित करेगा और उसे यथास्थिति केन्द्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग को उपलब्ध कराएगा, जो इस धारा के अधीन रिपोर्ट तैयार करने के लिए अपेक्षित है और इस धारा के प्रयोजनों के लिए, उस सूचना को प्रस्तुत करने तथा अभिलेख रखने से सम्बधित अपेक्षाओं का पालन करेगा।

टिप्पणी-

ऐसी रिपोर्ट के लिए संबंधित मंत्रालय या विभाग द्वारा लोक प्राधिकरनों से सूचनायें एकत्रित की जायेगी और उन्हें केन्द्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग तक पहुँचाया जायेगा।


प्रश्न-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 25 (3) में विहित किये अनुसार अधिनियम  के कार्यान्वयन  रिपोर्ट  में कौनसी बातों का उल्लेख होता है? 

उत्तर-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 25 (3) में विहित किये अनुसार  अधिनियम  के कार्यान्वयन  रिपोर्ट  में निम्नांकित  बातों का उल्लेख किया जायेगा-

उपधारा (3) प्रत्येक रिपोर्ट में, उस सम्बध में कथन होगा, जिसमें रिपोर्ट निम्नलिखित से सम्बधित है-

(क) प्रत्येक लोक प्राधिकारी को किए गए अनुरोधों की संख्या:

(ख) ऐसे विनिश्चयों की संख्या, जहाँ आवेदक, अनुरोधों के अनुसरण में दस्तावेजों तक पहुँच के लिए पात्र नहीं थे, इस अधिनियम के वे उपबन्ध, जिनके अदीन ये विनिश्चय किए गए थे और ऐसे समयों की संख्या, जब ऐसे उपबन्धों का अवलंब लिया गया था;

(ग) पुनर्विलोकन के लिए यथास्थिति केन्द्रीय सूचना आयोग या राज्य सूचना आयोग को निर्दिष्ट की गई अपीलों की संख्या अपीलों के स्वरूप और अपीलों के निष्कर्ष;

(घ) इस अधिनियम के प्रशासन के सम्बध में किसी अधिकारी के विरूद्ध की गई अनुशासनिक कार्यवाही की विशिष्टीयाँ;

(ड)  इस अधिनियम के अधीन प्रत्येक लोक प्राधिकारी द्वारा एकत्रित की गई प्रभारों की रकम;

(च)  कोई ऐसे तथय, जो इस अधिनियम की भावना और आशय को ग्रहण कराने या कार्यान्वित करने के लिए लोक प्राधिकारीयों के प्रयास उपदर्शित करते है;

( छ)  सूधार के लिए सिफारशें, जिसके अंतर्गत इस अधिनियम या अन्य विधान या सामान्य विधि के विकास, अभिवृद्धि आधुनिकीकरण, सुधार या संशोधन के लिए विशिष्ट लोक प्राधिकारियों की बाबत सिफारशों या सूचना तक पहुंच के अधिकार को प्रवर्तनशील बनाने से सूसंगत कोई अन्य विषय भी है।

 टिप्पणी-

  रिपोर्ट में निम्नाकिंत बातों का उल्लेख किया जायेगा-

 (क) प्रत्येक लोक प्राधिकारी को किये गये अनुरोधों की संख्या;

(ख)  ऐसे अनुरोधों की संख्या जो वांछित सूचना तक पहुँच –योग्य नहीं पाये गये;

(ग) ऐसे अनुरोधों की संख्या जो वांछित सूचना तक पहुँच –योग्य नहीं पाये गये;

(घ) किसी अधिकारी के विरूद्ध शिकायत  बाबत की गई अनुशासनात्मक कार्यवाहीयाँ एवं उनकी विशिष्टियां;

(ड) एकत्रित प्रभारों की राशि;

(च) ऐसे तथ्य जो इस अधिनियम की भावना और आशय को ग्रहण कराने या कार्यान्वित करने के लिए लोक प्राधिकारियों के प्रयास उपदर्शित करते है; तथा

(छ) सुधार के सुझाव।

 ऐसी रिपोर्ट समुचित सरकार द्वारा, यथास्थिति, संसद अथवा राज्य विधान मण्डल के समक्ष रखी जायेगी।


प्रश्न-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 25 (5) में विहित किये अनुसार जब आयोग को ऐसा प्रतीत होता है कि इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का प्रयोग करने के संबंध में किसी लोक प्राधिकारी की पद्धति इस अधिनियम के उपबंधों या भावना के अनुरूप नहीं है तो वह प्राधिकारी को ऐसे उपाय विनिर्दिष्ट करते हुए सिफारिश करने का अधिकार रखती है क्या? 

उत्तर-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 25 (5) में विहित किये अनुसार यदि आयोग को ऐसा प्रतीत होता है कि इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों का प्रयोग करने के संबंध में किसी लोक प्राधिकारी की पद्धति इस अधिनियम के उपबंधों या भावना के अनुरूप नहीं है तो वह प्राधिकारी को ऐसे उपाय विनिर्दिष्ट करते हुए सिफारिश कर सकेगी, जो उसकी राय में ऐसी अनुरूपता को बढाने के लिए जाने चाहिए।

 

प्रश्न-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 26 के अन्तर्गत केन्द्रीय सरकार द्वारा वित्तिय संसाधनों को ध्यान में रखते हुए तैयार किये जाने वाले कार्यक्रम कौनसे है?

उत्तर-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 26 के अन्तर्गत वित्तिय संसाधनों को ध्यान में रखते हुए केन्द्रीय सरकार द्वारा निम्नांकित के बारे में कार्यक्रम तैयार किये जा सकेंगे-

धारा 26. केन्द्रीय सरकार द्वारा कार्यक्रम तैयार किया जाना

1. केन्द्रीय सरकार, वित्तिय और अन्य संसाधनों की उपलब्धि की सीमा तक-

(क)  जनता की, विशेष रूप से, उपेक्षित समुदायों की, इस अधिनियम के अधिन अनुध्यात अधिकारों का प्रयोग करने के ज्ञान में वृद्धि करने के लिए शैक्षिक कार्यक्रम बना सकेगी और आयोजित कर सकेगी;

(ख)  लोक प्राधिकारियों को. खंड क में निर्दिष्ट कार्यक्रमों और आयोजन में भाग लेने और उनके लिए ऐसे कार्यक्रम करने के लिए बढावा दे सकेगी;

(ग)  लोक प्राधिकारियों द्वारा उनके क्रियाकलापों के बारे में सही जानकारी का समय से और प्रभावी रूप में प्रसारित किए जाने को बढावा दे सकेगी;

(घ) लोक प्राधिकरणों के यथास्थिति, केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारीयों को प्रशिक्षित कर सकेगी और लोक प्राधिकरण द्वारा अपने प्रयोग के लिए सुसंगत प्रशिक्षण सामग्रीयों पेश कर सकेगी।

2. समुचित सरकार, इस अधिनियम के प्रारंभ से अठारह मास के भीतर, अपनी राजभाषा में, सहज व्यापक रूप और रिति से ऐसी सूचना वाली एक मार्गदर्शिका संकलित करेगी, जिसकी ऐसे किसी व्यक्ति द्वारा युक्तियुक्त रूप में अपेक्षा की जाए, जो अधिनियम में विनिर्दिष्ट किसी अधिकार का प्रयोग करना चाहता है।

3. समुचित सरकार, यदि आवश्यक हो, उपधारा (2)  में निर्दिष्ट मार्गदर्शी सिद्धान्तों को नियमित अंतरालों पर अद्यतन और प्रकाशित करेगी, जिनमें विशिष्टतया और उपधारा (2)  की व्यापकता पर प्रतिकुल प्रभाव डाले बिना निम्नलिखित सम्मिलित होगा-

(क) इस अधिनियम के उद्देश्य;

(ख)  धारा 5 की उपधारा (1)  के अधीन नियुक्त प्रत्येक लोक प्रधिकारी के यथास्थिति. केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्यलोक सूचना अधिकारी का डाक और गली का पता, फोन और फैक्स नंबर और यदि उपलब्ध हो तो उसका इलैक्ट्रोनिक डाक पता;

(ग)  वह रीति और प्ररूप, जिसमें किसी यथास्थिति, केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी को किसी सूचना तक पहुंच का अनुरोध किया जाएगा;

(घ)  इस अधिनियम के अधीन लोक प्राधिकरण के किसी यथास्थिति, केन्द्रीय  लोक  सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी से उपलब्ध सहायता और उसके कर्तव्य;

(ड) आयोग से उपलब्ध सहायता;

( च) इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त या अधिरोपित किसी अधिकार या कर्तव्य की बाबत किसी कार्य या कार्य करने में असफल रहने के संबंध में विधि में उपलब्ध सभी उपचार, जिनके अंतर्गत आयोग को अपील फाइल करने की रिति भी है;

(छ)  धारा 4  के अनुसार अभिलेखोंके प्रवर्गो के स्वैच्छिक प्रकटन के लिए उपबंध करने वाले उपबंध;

(ज) किसी सूचना तक पहुंच के लिए अनुरोधों के संबंध में संदत्त की जाने वाली फीसों से संबंधित सूचनाएं;

(झ) इस अधिनियम के अनुसार किसी सूचना तक पहुंच प्राप्त करने के संबंध में बनाए गए या जारी किए गए कोई अतिरिक्त विनियम या परिपत्र।

4.  समुचित सरकार को, यदि आवश्यक हो, नियमित अंतरालों पर मार्गदर्शी सिद्धान्तों को अद्यतन और प्रकाशित करना चाहिए।

टिप्पणी

 धारा 26 के अन्तर्गत केन्द्रीय सरकार द्वारा तैयार किये जाने वाले कार्यक्रमों का उल्लेख किया गया है। वित्तिय संसाधनों को ध्यान में रखते हुए केन्द्रीय सरकार द्वारा निम्नांकित के बारे में कार्यक्रम तैयार किये जा सकेंगे-

(क)  जनता कोअपने अधिकारों से अवगत कराने हेतु शैक्षिक कार्यक्रम;

(ख)  लोक प्राधिकारियों को ऐसे कार्यक्रम में भाग लेने तथा ऐसे कार्यक्रम करने के लिए बढावा देने वाले कार्यक्रम;

(ग)  कार्यक्रमों का प्रसारित किये जाने के संबंध में, तथा;

(घ) लोक प्राधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम।

 साथ ही सरकार द्वारा समय समय पर राजभाषा में मार्गदर्शिका प्रकाशित की जाएगी जिसमें-

1) अधिनियम केउद्देश्य;

2) लोक प्राधिकारीयों के नाम व पत्ते;

3) अनुरोध की रीति व प्ररूप;

4) आयोग से उपलब्ध सहायता;

5) अपील की रीति;

6) सूचना प्रापत करने के लिए निर्धारित फीस बाबत जानकारी;

7) सूचना तक पहुँच संबंधी अन्य नियम, विनियम आदि।


प्रश्न-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 26 (1) के अन्तर्गत केन्द्रीय सरकार,  वित्तिय और अन्य संसाधनों की उपलब्धि की सीमा तक तैयार किये जाने वाले कार्यक्रम कौनसे है?

उत्तर-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 26 (1)के अन्तर्गत केन्द्रीय सरकार द्वारा  वित्तिय और अन्य संसाधनों की उपलब्धि की सीमा तक निम्नांकित बारे में कार्यक्रम तैयार किये जा सकेंगे-

1. केन्द्रीय सरकार, वित्तिय और अन्य संसाधनों की उपलब्धि की सीमा तक-

(क)  जनता की, विशेष रूप से, उपेक्षित समुदायों की, इस अधिनियम के अधिन अनुध्यात अधिकारों का प्रयोग करने के ज्ञान में वृद्धि करने के लिए शैक्षिक कार्यक्रम बना सकेगी और आयोजित कर सकेगी;

(ख)  लोक प्राधिकारियों को. खंड क में निर्दिष्ट कार्यक्रमों और आयोजन में भाग लेने और उनके लिए ऐसे कार्यक्रम करने के लिए बढावा दे सकेगी;

(ग)  लोक प्राधिकारियों द्वारा उनके क्रियाकलापों के बारे में सही जानकारी का समय से और प्रभावी रूप में प्रसारित किए जाने को बढावा दे सकेगी;

(घ) लोक प्राधिकरणों के यथास्थिति, केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारीयों को प्रशिक्षित कर सकेगी और लोक प्राधिकरण द्वारा अपने प्रयोग के लिए सुसंगत प्रशिक्षण सामग्रीयों पेश कर सकेगी।

टिप्पणी-

धारा 26 के अन्तर्गत केन्द्रीय सरकार द्वारा तैयार किये जाने वाले कार्क्रमों का उल्लेख किया गया है। वित्तिय संसाधनों को ध्यान में रखते हुए केन्द्रीय सरकार द्वारा निम्नांकित के बारे में कार्यक्रम तैयार किये जा सकेंगे-

(क)  जनता कोअपने अधिकारों से अवगत कराने हेतु शैक्षिक कार्यक्रम;

(ख)  लोक प्राधिकारियों को ऐसे कार्यक्रम में भाग लेने तथा ऐसे कार्यक्रम करने के लिए बढावा देने वाले कार्यक्रम;

(ग)  कार्यक्रमों का प्रसारित किये जाने के संबंध में, तथा;

(घ) लोक प्राधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम।


प्रश्न-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 26 (2) में विहित किये गये अनुसार समुचित सरकार, इस अधिनियम के प्रारंभ से कितने दिनों के भीतर, अपनी राजभाषा में, सहज व्यापक रूप और रिति से ऐसी सूचना वाली एक मार्गदर्शिका संकलित करेगी, जिसकी ऐसे किसी व्यक्ति द्वारा युक्तियुक्त रूप में अपेक्षा की जाए, जो अधिनियम में विनिर्दिष्ट किसी अधिकार का प्रयोग करना चाहता है?

उत्तर- सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 26 (2) में विहित किये गये अनुसार समुचित सरकार, इस अधिनियम के प्रारंभ से अठारह मास  के भीतर, अपनी राजभाषा में, सहज व्यापक रूप और रिति से ऐसी सूचना वाली एक मार्गदर्शिका संकलित करेगी, जिसकी ऐसे किसी व्यक्ति द्वारा युक्तियुक्त रूप में अपेक्षा की जाए, जो अधिनियम में विनिर्दिष्ट किसी अधिकार का प्रयोग करना चाहता है।


प्रश्न-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 26 (3) में विहित किये गये अनुसार समुचित सरकार द्वारा समय समय पर राजभाषा में जो मार्गदर्शिका प्रकाशित की जायेगी उसमें  कौनसे विषय सम्मिलित होंगे? 

उत्तर-सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 26 (3) में विहित किये गये अनुसार समुचित सरकार, यदि आवश्यक हो, उपधारा (2)  में निर्दिष्ट मार्गदर्शी सिद्धान्तों को नियमित अंतरालों पर अद्यतन और प्रकाशित करेगी, जिनमें विशिष्टतया और उपधारा (2)  की व्यापकता पर प्रतिकुल प्रभाव डाले बिना निम्नलिखित सम्मिलित होगा-

(क) इस अधिनियम के उद्देश्य;

(ख)  धारा 5 की उपधारा (1)  के अधीन नियुक्त प्रत्येक लोक प्रधिकारी के यथास्थिति. केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी का डाक और गली का पता, फोन और फैक्स नंबर और यदि उपलब्ध हो तो उसका इलैक्ट्रोनिक डाक पता;

(ग)  वह रीति और प्ररूप, जिसमें किसी यथास्थिति, केन्द्रीय लोक सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी को किसी सूचना तक पहुंच का अनुरोध किया जाएगा;

(घ)  इस अधिनियम के अधीन लोक प्राधिकरण के किसी यथास्थिति, केन्द्रीय  लोक  सूचना अधिकारी या राज्य लोक सूचना अधिकारी से उपलब्ध सहायता और उसके कर्तव्य;

(ड) आयोग से उपलब्ध सहायता;

( च) इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त या अधिरोपित किसी अधिकार या कर्तव्य की बाबत किसी कार्य या कार्य करने में असफल रहने के संबंध में विधि में उपलब्ध सभी उपचार, जिनके अंतर्गत आयोग को अपील फाइल करने की रिति भी है;

(छ)  धारा 4  के अनुसार अभिलेखोंके प्रवर्गो के स्वैच्छिक प्रकटन के लिए उपबंध करने वाले उपबंध;

(ज) किसी सूचना तक पहुंच के लिए अनुरोधों के संबंध में संदत्त की जाने वाली फीसों से संबंधित सूचनाएं;

(झ) इस अधिनियम के अनुसार किसी सूचना तक पहुंच प्राप्त करने के संबंध में बनाए गए या जारी किए गए कोई अतिरिक्त विनियम या परिपत्र।

टिप्पणी-

साथ ही सरकार द्वारा समय समय पर राजभाषा में मार्गदर्शिका प्रकाशित की जाएगी जिसमें-

1) अधिनियम केउद्देश्य;

2) लोक प्राधिकारीयों के नाम व पत्ते;

3) अनुरोध की रीति व प्ररूप;

4) आयोग से उपलब्ध सहायता;

5) अपील की रीति;

6) सूचना प्रापत करने के लिए निर्धारित फीस बाबत जानकारी;

7) सूचना तक पहुँच संबंधी अन्य नियम, विनियम आदि।



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