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सिविल प्रकरणों के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया

 कार्यालय प्रधान न्यायाधीश, कुटुम्ब न्यायालय बिलासपुर,(छ०ग०) द्वारा सिविल एवं न्यायिक प्रकरणों के लिए जारी विधिमान्य प्रक्रिया

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1. स्वयं पक्षकार को उपस्थित होकर वाद पत्र, याचिका, आवेदन न्यायालय कार्य दिवस में प्रातः 11.00 से लेकर सायं 04.00 बजे तक प्रस्तुत करना होगा जिसके साथ शपथ पत्र, स्वयं तथा प्रतिवादी/अनावेदक का मोबाइल नम्बर, व्हाट्सएप नम्बर, ई-मेल, पंजीयन पता, इत्यादि जो उपलब्ध हो, देना होगा।


2. विवाह विच्छेद या वैवाहिक संबंध के पुनर्स्थापना एवं भरण पोषण के प्रकरणों में प्रतिवादी/अनावेदक को मोबाइल नंबर से या उसके वाट्सएप के माध्यम से सूचना किया जाकर आहूत किया जा सकता है।


3. प्रतिवादी/अनावेदक मोबाईल या वाट्सएप या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दी गई सूचना के उपरांत उपस्थित नहीं होता है (विशेष परिस्थितियों को छोड़कर) पक्षकार को नोटिस की तामीली सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 की आदेश 5 नियम 12 के अंतर्गत जहां तक संभव हो नोटिस/समन की तामीली प्रतिवादी पर व्यक्तिगत करायी जाएगी साथ ही साथ पंजीकृत डाक के माध्यम से या अन्य माध्यम से भी व्यक्तिगत तामीली कराई जा सकेगी व व्यक्तिगत उपस्थिति हेतु लिखा जावेगा जिसमें वाद पत्र/आवेदन या दस्तावेजों की प्रतिलिपि संलग्न नहीं होगी।


4. समन या नोटिस की व्यक्तिगत तामीली के पश्चात या पंजीकृत नोटिस की व्यक्तिगत तामीली पश्चात अनुपस्थित होने पर एकपक्षीय कार्यवाही की जा सकती है तथा एकपक्षीय होने की सूचना प्रतिवादी को न्यायालय के द्वारा इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से समुचित मामलों में दी जा सकती है।


5. प्रतिवादी/उत्तरवादी/अनावेदक के उपस्थित होने पर न्यायमित्र / सुलहकर्ता उभय पक्ष के मध्य सुलह समझाइश हेतु कार्यवाही करेंगे।


6. सुलह समझाइस असफल रहने पर वादी/आवेदक के द्वारा वादपत्र/याचिका /आवेदन की प्रति सहित दस्तावेजों की प्रतिलिपि प्रतिवादी/अनावेदक को प्रदान कराई जावेगी।


7.वादी/याचिकाकर्ता/आवेदक/प्रतिवादी/अनावेदक के अनुपस्थित रहने पर वाद मित्र द्वारा उपस्थिति ली जा सकती है।


8. डिकी/आदेश की सत्य प्रतिलिपि पंजीकृत डाक के माध्यम से या न्यायालय के आदेशिका वाहक के माध्यम से या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से पक्षकारों को न्यायालय के द्वारा भेजी जायेगी।


9. सुलहकर्ता/न्यायमित्र के समक्ष मेल मिलाप की सुलह कार्यवाही असफल हो जाने पर धारा 24 हिन्दू विवाह अधिनियम के अंतर्गत वाद लंबित रहने के स्तर पर भरण-पोषण और कार्यवाहियों के व्यय का निर्धारण हेतु प्रस्ताव किया जा सकेगा।


10. उभयपक्ष की सहमति के आधार पर घारा 24 हिन्दू विवाह अधिनियम के आवेदन पर आदेश पारित किया जा सकता है या उभयपक्ष के मौखिक या लिखित आवेदन के आधार पर निराकरण किया जा सकता है किंतु जो आदेश न्यायालय के द्वारा दिया जाता है उसका पालन करना अनिवार्य होगा, नहीं तो न्यायालय के द्वारा प्रतिवादी/अनावेदक के बचाव का अधिकार समाप्त किया जा सकेगा।


 11. प्रतिवादी/अनावेदक को जवाबदावा हेतु दिये गए समय के भीतर अपना जवाबदावा पेश करना होगा और दोनों पक्ष को वाद प्रश्न/अवधार्य प्रश्न निर्मित किए जाने के पूर्व समस्त दस्तावेजों को प्रस्तुत करना होगा। 


12. उभयपक्ष के द्वारा जो दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हैं उन दस्तावेजों को सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के आदेश 13 के नियम 3 एवं 4 के अंतर्गत अग्राह्य या ग्राह्य किये जाने पर सुना जाकर उसमें प्रदर्श चिन्हित करने की कार्यवाही की जा सकेगी।


13. वाद प्रश्न/अवधार्य प्रश्न निर्मित होने के बाद वादी/आवेदक के दस्तावेजों में तिथि अनुसार कम से प्रदर्श पी एवं प्रतिवादी/अनावेदक के दस्तावेजों में प्रदर्श डी- चिन्हित की जाएगी, और दस्तावेजों में प्रदर्श चिन्हित करने के पश्चात् उभयपक्ष अपना साक्ष्य न्यायालय में बोलकर शपथपूर्वक दे सकते हैं या कमिश्नर के समक्ष साक्ष्य दे सकते हैं, जिसमें प्रदर्श के रूप में चिन्हित दस्तावेजों को घटनाकम या तथ्यों के साथ कम से रखते हुए साक्ष्य लिपिबद्ध करायी जाएगी, जिसमें प्रश्न-उत्तर के रूप में साक्ष्य लिखा जा सकता है।


14. उभयपक्ष को उनके मोबाईल नंबर पर एस.एम.एस. या व्हाट्सएप में प्रकरण की कार्यवाही की जानकारी यथासंभव भेजी जा सकती है।


15. यदि कोई पक्ष बिना सूचना के अनुपस्थित है तो उसे न्यायालय के द्वारा या न्यायमित्र के द्वारा या दूसरे पक्ष के द्वारा उसके मोबाईल नंबर, व्हाट्‌सएप नंबर या डाक के माध्यम से सूचना भेजी जा सकती है।


16. कुटुम्ब न्यायालय अधिनियम 1984 की धारा 16 के अंतर्गत उभयपक्ष औपचारिक प्रकृति के साक्ष्य को शपथपत्र पर दे सकते हैं तो उसकी प्रतिलिपि साक्ष्य तिथि से पूर्व विपक्ष को व्हाट्सएप के माध्यम से या डाक से भेजकर या व्यक्तिगत दी जा सकती है।


17. यदि उभयपक्ष दस्तावेजों में प्रदर्श चिन्हित करने के पश्चात् कोई अतिरिक्त दस्तावेज पेश करना चाहते हो तो न्यायमित्र एवं विपक्ष को अग्रिम सूचना देंगे और यदि कोई स्थगन की आवश्यकता हो तो भी विपक्ष को पूर्व सूचना देकर न्यायालय में आवेदन पेश कर सकते हैं।


18. कुटुम्ब न्यायालय अधिनियम 1984 की धारा 15 के अनुसार न्यायालय के समक्ष जो साक्ष्य प्रस्तुत किया जाए उसमें अत्यधिक विस्तार से लिखने के स्थान पर साक्ष्य का सारांश लिखा जा सकता है और संक्षिप्त में मुख्यतः विवादित बिंदुओं पर ही प्रतिपरीक्षण किया जा सकता है।


सही/-

(रमाशंकर प्रसाद)

प्रधान न्यायाधीश

कुटुम्ब न्यायालय, बिलासपुर (छ०ग०)

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